इस दिन द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। जिन्हे शेषनाग का अवतार भी माना जाता है। बलराम जी का शस्त्र हल और मूसल है इसीलिए इन्हें "हलधर" भी कहा जाता है, साथ ही "संकर्षण, हलायुध, रोहिणीनन्दन, काम और नीलाम्बर" आदि नामों से भी जाना जाता है।...
शिव आराधना का श्रावण मास आस्था और विश्वास के साथ ही प्रकृति के सुंदरतम श्रृंगार का मनभावन मौसम है। तृप्त धरा चारों और हरियाली की लहराती चुनर में इठलाती है। नदियों में ऊँची-ऊँची उठती लहरें और झरनों का सुमधुर कलरव हर मन को आकर्षित करता है।
अक्षय तृतीया या अखा तीज वैशाख शुक्ल तीज को कहते हैं। हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किया जाता है उसका अच्छा फल या परिणाम होता है इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। वैसे धार्मिक दृष्टि से प्रत्येक मास के तृतीया का अपना महत्व होता है, अक्ष...
आ गया फागुन मास ढोलक की थाप मंजीरे और झांझ की मधुर ध्वनि के साथ होली गायन का मौसम। होली राग रंग का लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है संगीत और रंग इसके प्रमुख अंग हैं। होली गायन की परंपरा प्राचीन काल से है बसंत पंचमी से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है।
कहा जाता है कि आदि अनादि काल तक शिव ही सत्य है। भगवान शिव के प्रति सबको सच्ची आस्था है इसलिए ही शक्ति स्वरूप शिव-शंकर को अनंत माना गया है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव को सृष्टि के सृजनकर्ता कहा गया हैं जिनकी पूजा और भक्ति से हमारे समस्त कष्ट दूर हो जाते है। शिव जिनसे...
यूँ तो सृष्टि के कण-कण में ईश्वर का वास है। लेकिन सूर्य और चन्द्रमा ईश्वर के दिव्यचक्षु सदृश है। जब-जब सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है, हम प्रभावित होते हैं। ऐसा ही एक त्योहार हैं मकर संक्रांति, शीत ऋतु के पौष मास में जब भगवान सूर्य उत्तरायण होकर मकर राशि में प्र...
भारतीय संस्कृति जो कि धर्म पर आधारित है इसलिए धार्मिक दृष्टि से व्रत का विधान भी है। प्राय: हर मास कोई ना कोई व्रत अवश्य पड़ता है।
चौथ का व्रत वैसे तो हर मास ही आता है और कुछ लोग हर मास की चौथ का व्रत करते हैं लेकिन इन चौथ में सबसे अधिक महत्व माघ मास की शुक्ल पक्ष...
वैदिक काल में जिसे हम रक्षासूत्र कहते थे उसे ही आजकल राखी कहा जाता है। मुझे याद है बचपन में हमारी बुआजी ऋषि पञ्चमी वाले दिन पहले पहले रेशम की पाँच या सात पतली रंगीन डोरियों से बनी रक्षासूत्र थोड़ा फैलाकर हम सभी के हाथ में बाँधती थी। बाद में हमारे आग्रह पर हमारी माताजी ने रेशमी फूँदों वाली राखी हमा...
हिंदू धर्म में व्रत-उपवास की परंपरा अत्यंत प्राचीन और महत्त्वपूर्ण रही है। इन्हीं व्रतों में एक विशेष स्थान है एकादशी व्रत का। हर माह की दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) में पड़ने वाली एकादशी, न केवल धार्मिक रूप से पूजनीय है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद फलदायी...
देवोत्थान एकादशी के महत्व को समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि एकादशी व्रत क्या है और इसका हमारे जीवन में क्या स्थान है। भारतीय संस्कृति में एकादशी, जिसे ग्यारस भी कहा जाता है, अत्यंत पावन तिथि मानी गई है। हिन्दू धर्म में यह व्रत गहन श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ...
कार्तिक का माह आते ही अनायास मन में नया उत्साह संचारित होने लगता है, उत्सवों का जो क्रम प्रारम्भ होता है वो सतत चलता रहता है और जन जीवन में नवीन ऊर्जा का प्रसारण करता है। इसी क्रम में दीपावली के नौ दिनों के पश्चात अक्षय नवमी के पर्व मनाया जाता है। अक्षय नवमी जिसे "आंव...
दसे दशहरा, बीसे दिवाली, छऊवे छठ हमारे सनातन समाज में बहुत ही प्रचलित उक्ति है जिससे श्रावण माह पश्चात आने वाले प्रमुख त्योहारों और उत्सवों के बारे में एक जानकारी मिलती है। क्योंकि श्रावण माह के बाद बाद आश्विन माह में १५ दिनों तक पितृ पूजन वाला कार्यक्रम चलता है...
