Bhartiya Parmapara

क्यों होता है अधिकमास | अधिकमास का पौराणिक आध...

भारतीय पंचांग (खगोलीय गणना) के अनुसार प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अधिक मास होता है। यह सौर और चंद्र मास को एक समान लाने की गणितीय प्रक्रिया है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किए गए जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। सूर्य की बारह संक्रांति होती हैं औ...

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं | हनुमान जयंती

"गुरु" का न होना लघु होना है। जीवन में गुरु के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है। अर्थात "जो अपने कर्म, ज्ञान एवं व्यवहार से हमारी लघुता मिटा दे वही गुरु है।" इस परिभाषा की दृष्टि से हनुमानजी एक महान गुरु हैं।
हमारे जीवन से लघुता को मिटाने के लिये गुरु हमें तीन चीज देते हैं। वह तीन चीज है दी...

क्या है पितृपक्ष की पौराणिक कथा ?

शास्त्रों के अनुसार जब महाभारत के युद्ध में दानवीर कर्ण का निधन हो गया और उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंची, तो उन्हें खाने के लिए भोजन की बजाय सोना, चांदी और गहने दिए गए। हैरान होकर कर्ण की आत्मा ने इंद्र देव से इसका कारण पूछा, तब इंद्र देव ने कर्ण को बताया कि आपने अपने पूरे...

श्राद्ध क्या होते है? | पितरों को श्राद्ध की...

मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले अत्रि मुनि ने श्राद्ध का उपदेश दिया था। इसके बाद सबसे पहला श्राद्ध महर्षि निमि ने निकाला था। बाद में धीरे-धीरे कई अन्य महर्षि भी श्राद्ध कर्म करने लगे और पितरों को अन्न का भोग लगाने लगे। जैसे-जैसे श्राद्ध की परंपरा बढ़ती गई देवता और पितर...

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन | गणपति विसर्जन

हिंदू पंचांग के अनुसार 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव पर घरों और पंडालों में स्थापित विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन अंनत चतुर्दशी पर किया जाता है। 

अनंत चतुर्दशी का महत्व | विष्णु जी की पूजा

गणपति जी विसर्जन के साथ साथ इस दिन भगवान विष्णु जी के अंनत स्वरूप की पूजा अर्चना भी की जाती है। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु, यमुना नदी और शेषनाग जी की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखते है और अनंत सूत्र बांधते है जिससे जीवन के सभी कष...

ओणम पर्व इतिहास और महत्व

ओणम पर्व के साथ साथ चिंगम महीने में केरल में चावल की फसल का त्योहार और वर्षा के फूल का त्योहार मनाया जाता है। ओणम का पर्व भगवान् विष्णु के वामन अवतार से जुड़ा हुवा है, इस पर्व को केरल में राजा महाबलि के स्मृति में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को लेकर जो कथा स...

परिवर्तिनी एकादशी | परिवर्तिनी एकादशी: महत्व,...

हिन्दू पंचांग में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं| ऐसा माना जाता है कि इसी तिथि को भगवान विष्णु शयन अवस्था में अपना करवट बदलते हैं। भगवान विष्णु के एकादशी तिथि में अपना करवट बदलने या परिवर्तित करने के कारण ही इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा...

तेजादशमी पर्व

भारत के अनेक प्रांतों में तेजादशमी का पर्व श्रद्धा,आस्था एवं विश्वास के प्रतीकस्वरूप मनाया जाता है। मध्यप्रदेश,राजस्थान में गांव-गांव में तेजादशमी मनाई जाती है और इस दिन अनेक जगहों पर तेजाजी के मंदिरों में मेले लगाए जाते हैं। मान्यता है कि सर्पदंश से बचने के लिए वीर त...

गणपति बप्पा मोरया | जाने गणेश जी को "गणपति बप...

गणपति बप्पा से जुड़े इस मोरया नाम के पीछे एक गणेश भक्त ही है। चौदहवीं सदी में पुणे के पास चिंचवड़ में मोरया गोसावी नाम के प्रसिद्ध गणेश भक्त रहते थे। चिंचवड़ में इन्होंने कठोर गणेश साधना की और जीवित समाधि ली थी। तभी से यहां का गणेश मन्दिर देश भर में विख्यात हुआ और गणे...

गणेश उत्सव क्यों मनाते है - Why Celebrate Gan...

बहुत पहले की बात है जब सृष्टि की शुरुआत हुई थी तब यह सवाल उठा कि प्रथम पूजनीय किसे माना जाये? सभी देवगण भगवान शिव के पास गए और इस समस्या के लिए सुझाव माँगा तब शिव जी ने कहा कि जो भी देव पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करके सबसे पहले आएगा वो प्रथम पूजनीय होगा |

हरतालिका व्रत का महत्व | हरतालिका व्रत क्यों...

यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन आता है। इस दिन सुहागने और कुंवारी लड़किया गौरी-शंकर की पूजा करती हैं। मान्यता है कि हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और कुंवारी लड़कियों को मनचाहे...

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