Bhartiya Parmapara

आदि पेरुक्कु का त्योहार | तमिलनाडु का मानसून...

आदि पेरुक्कु पर्व समृद्धि और उर्वरता का प्रतिक है जिसे तमिलनाडु में मानसून त्योहार के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व तमिल महीने के 18 वें दिन मनाया जाता है।महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले इस पर्व के दिन जल-अनुष्ठान के रूप में, प्रकृति का सम्मान किया जाता है। इस दिन उफनत...

भाई दूज (यम द्वितीया): भाई-बहन के प्रेम, परंप...

भारतीय संस्कृति एवं हिंदू धर्मानुसार भाई बहन के प्यार निश्चय प्रेम की तीन तिथियां होती है। रक्षाबंधन, होली की दूज, तथा दीपावली के बाद भाई दूज। यह तीनों तिथियों का मूल दर्शन एवं भाव भाई बहन के प्यार को स्थायित्व देना है।

हम सभी जानत...

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा, पूजा विधि और 14 गांठो...

अनंत चतुर्दशी पर्व के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं, इस दिन 14 गांठों वाला अनंत सूत्र भी बांधा जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है और हाथ में 14 गांठों वाला सूत्र बांधा जाता है। आइए जानते हैं इन 14 गां...

जितिया व्रत कथा - संतान की दीर्घायु के लिए पू...

व्रत :-जितिया। 
मनोकामना :- वंश वृद्धि ,संतान दीर्घायु हो। 
पूजन :-शिव -पार्वती, गणेश के साथ जितबानन गोसाई की पूजा। 
विधि:- निर्जला उपवास। नदी के तट पर कथा सुनना। पार्वती माँ की शृंगार सामग्री के साथ गणेश जी के लिए कुछ खिलौने, प्रसाद, दान -दक्ष...

नवरात्रि का महत्व | साल में कितनी बार नवरात्र...

हम में से बहुत कम लोग यह जानते है कि एक साल में 4 बार नवरात्रि पड़ते हैं। साल के प्रारम्भ में पहले माह चैत्र में पहली नवरात्र होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है, इसके बाद अश्विन माह में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है और साल के अंतिम माघ माह में गुप्...

दीपोत्सव: संस्कार, सामाजिकता और विज्ञान का सं...

दीपोत्सव सनातनी भारतीयों द्वारा पांच दिनों तक हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला वैज्ञानिकता से अनुप्राणित अनुपम सांस्कृतिक पर्व है। यह ईश्वरीय मानव रूप द्वारा किए किये अच्छे कार्यों का स्मरण तथा स्तुति है। दीप पर्व समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक है, यह बताता है कि जो भी स...

शीतला सप्तमी व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार माँ शीतला दुर्गा और माँ पार्वती का ही अवतार हैं। ये प्रकृति की उपचार शक्ति का प्रतीक हैं। इस दिन भक्त अपने बच्चों के साथ माँ की पूजा आराधना करते हैं जिसके फलस्वरूप परिवार प्राकृतिक आपदा तथा आकस्मिक विपत्तियों से सुरक्षित रहता है। 

पितृ पक्ष: श्राद्ध की परंपरा और महत्व

हम प्रत्येक त्यौहार बड़े उत्साह से मनाते हैं। 
नाग पंचमी से लेकर ऋषि पंचमी, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और अनंत चौदस त्योहार के बाद बारी आती है, पितरों को तृप्त करने की श्राद्ध की। हमारी भारतीय संस्कृति अनूठी अद्भुत है। हमारी परंपरा हमे बड़ो का आदर और सम्मान करना...

शरद पूर्णिमा पूजा

हिंदू धर्म में पूर्णमासी का अपना विशेष महत्व होता है। प्रत्येक महा पूर्णमासी आती है और धर्मपरायणया लोग पूर्णमासी के दिन सत्यनारायण भगवान का व्रत कथा पूजन करते हैं प्रत्येक पूर्णिमा का अपना महत्व तो है ही लेकिन शरद पूर्णमासी का अपना एक विशेष महत्व हमारे हिंदू धर्म एवं...

बलराम जयंती, हल षष्ठी और चंद्र छठ का महत्व

इस दिन द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। जिन्हे शेषनाग का अवतार भी माना जाता है। बलराम जी का शस्त्र हल और मूसल है इसीलिए इन्हें "हलधर" भी कहा जाता है, साथ ही "संकर्षण, हलायुध, रोहिणीनन्दन, काम और नीलाम्बर" आदि नामों से भी जाना जाता है।...

रेशम की डोर | रक्षाबंधन: प्रेम, विश्वास और सु...

शिव आराधना का श्रावण मास आस्था और विश्वास के साथ ही प्रकृति के सुंदरतम श्रृंगार का मनभावन मौसम है। तृप्त धरा चारों और हरियाली की लहराती चुनर में इठलाती है। नदियों में ऊँची-ऊँची उठती लहरें और झरनों का सुमधुर कलरव हर मन को आकर्षित करता है।

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