अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अनिवार्य है अभिवादनशीलता
पुराणों में महर्षि मार्कंडेय की एक कथा मिलती है। महर्षि मार्कंडेय मृकंडु के पुत्र थे। महर्षि मार्कंडेय जब मात्र पाँच वर्ष के थे तभी उनके पिता मृकंडु को पता चला कि मेरे पुत्र की आयु तो केवल छह म...
स्त्रियों द्वारा मांग में सिंदूर लगाना - भारतीय वैदिक परम्परा खासतौर पर हिन्दू समाज में शादी के बाद हर सुहागिन महिला को मांग में सिन्दूर भरना आवश्यक है। सिन्दूर द्वारा मांग भरा जाना सुहाग का प्रतीक समझा जाता है। वर्तमान समय में सिन्दूर के स्थान पर कुंकुम अन्य कॉस...
स्वास्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में मंगल प्रतीक माना जा रहा है। अतः कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वास्तिक चिन्ह अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वास्तिक का अर्थ है - अच्छा या मंगल करने वाला । “अमर कोश” में भी इसका...
ॐ का प्रयोग करना - भारतीय संस्कृति में प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा ॐ का प्रयोग किया जाता था, आज भी ॐ का प्रयोग किया जाता है। ॐ के प्रयोग का हमारे जीवन में क्या महत्व है? इसका प्रयोग क्यों किया जाता है? इसके पीछे वैज्ञानिकता क्या है? अनेक प्रश्न हमारे सामने है ? ॐ का प्...
नमस्कार शब्द नमः+कार दो शब्दों से मिलकर बना है। नमस्कार का आशय है हम संसार के कारक को हमेशा सादर नमन करते हैं क्योंकि हमारी निज कोई सता नहीं है जो कुछ भी इस संसार में है वह इस संसार के कर्ता नियंता का है। अतः हमारा दूसरे व्यक्ति से जो मिलन हुआ है वह उस परमसत्ता की कृप...
हम मंदिर में कहीं भी जाते हैं तो प्रदक्षिणा जरूर करते हैं। यह प्रदक्षिणा क्यों की जाती है क्योंकि जब हम ईश्वर के आस-पास परिक्रमा करते हैं तो हमारी तरफ ईश्वर (प्रत्यक्षतः प्राकृतीय) की सकारात्मक शक्ति आकृष्ट होती है और जीवन की नकारात्मकता घटती है।
भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से करना - जब कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। यह भारतीय परम्परा रही है। लोगों का मानना है कि अन्त में हमेशा मीठा खिलाना चाहिए जिससे हमारे संबंधों में मिठास बनी रहे।
विवाह स्त्री और पुरुष के बीच अनोखा एवं आत्मिक, भावनात्मक संबंध है। विवाह को हम दूसरा जन्म ही मानते हैं क्योंकि विवाह के पश्चात स्त्री एवं पुरुष दोनों का संपूर्ण जीवन बदल जाता है। विवाह का शाब्दिक अर्थ ही "विशेष उत्तरदायित्व" वहन करना। हमारी भारतीय संस्कृति में जन्म से...
हमारे संस्कार हमें मानव कोटि से बहुत ऊँचाई पर ले जाकर देवत्व तक पहुंचाने में समर्थ हैं। अतः यह कहना समुचित है कि संस्कारों की योजना व्यक्ति को नियमबद्ध एवं संयमित जीवन जीना सिखाती है। हमारे ये संस्कार पारिवारिक और सामाजिक स्वास्थ्य का समन्वय है। ये संस्कार मूलतः वैज्ञ...
सनातन हिंदू धर्म में पुरुषों द्वारा सिर पर शिखा अर्थात चोटी रखने का विधान है।शिखा को हिंदुओं के एक सम्मानित प्रतीक चिह्न के रूप में मान्यता प्राप्त है। आज उनके सिरों पर से चोटी लगभग गायब हो चुकी है। वर्तमान में कुछ ही सनातन परंपरा के अनुयायी हिंदुओं, ब्राह्मणों य...
हमारी भारतीय संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक मानव के सोलह संस्कार होते हैं। विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार जो मानव का त्रयोदश संस्कार है। विवाह प्रथा के पूर्व की स्थिति मानव पहले पूर्णरूपेण संस्कृति नहीं था ।वह जंगलों में रहता था। किसी भी प्रकार का बंधन किसी पर भी ला...
