भद्र देश में अश्वपति नाम का एक राजा था। बहुत पूजा, पाठ करके भगवान सावित्री के आशीर्वाद और वरदान से उनको एक सुंदर, सुशील, गुणवान कन्या हुई उसका नाम सावित्री रखा गया। सावित्री की शादी की उम्र होने पर योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता ने उसे ही अपना जीवन साथी ख...
राम की शक्ति पूजा जिसे नवरात्रि का आरंभ भी माना जाता है और इस कथा को अपने खूबसूरत शब्द - विन्यास, वाक्य - विन्यास के साथ प्रस्तुत किया है मां बागेश्वरी के सुयोग्य पुत्र- महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला l निराला जी की कृति राम की शक्ति पूजा की आरंभिक पंक्तियां- "रवि...
वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को बसंत ऋतु का समापन होकर ग्रीष्म ऋतु का प्रारम्भ होता है और इसी दिन को हम सनातनी 'अक्षय तृतीया' या 'आखा तीज' के रूप में मनाते हैं। यह दिन अबूझ या सर्वसिद्ध या स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में माना गया है, इसलिये सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता...
होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक, १८ [अठारह ] दिनों तक मनाया जाता है - यह आस्था, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का सबसे बड़ा उत्सव है। चूँकि, बीते दो साल से कोरोना महामारी के चलते यह उत्सव बन्द कमरे तक सीमित करना पड़ा था इसलिये इस बार स...
भारतीय हिंदू संस्कृति, परंपराओं एवं सनातन धर्म में महाशिवरात्रि के पर्व का अत्यधिक महत्व है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा एवं आराधना की जाती है। शिव का शाब्दिक अर्थ होता है - कल्याण एवं रा का अर्थ है - दानार्थ धातु, इन्हीं दोनों के मेल से शिवरात्रि शब्द बना है जिसका...
माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है जया एकादशी के दिन व्रत रखने से एवं भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मृत्यु के उपरांत स्वर्ग की प्राप्ति के लिए जया एकादशी का व्रत एवं जया एकादशी व्रत कथा का पाठ...
मान्यता है कि पोंगल पर्व में किसान अपनी आगामी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए प्रार्थना करते हैं। इस पर्व को तमिलनाडु के सांस्कृतिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्साह पूर्वक से मनाया जाता है। इस पर्व में मुख्यतः सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। इस त्योहार को 4 दिन त...
माघ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस उपवास को करने से जहां हमें शारीरिक पवित्रता और निरोगता प्राप्त होती है, वहीं अन्न, तिल आदि दान करने से धन-धान्य में बढ़ोत्तरी होती है। मनुष्य जो और जैसा दान करता है, शरीर त्यागने क...
पौष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी का अपना अलग महत्व है। अधिकांश इस एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है, माना जाता है कि इस दिन जिस व्यक्ति ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के सा...
भगवान श्री राम चेतना और माता सीता प्रकृति शक्ति की प्रतीक हैं। चेतना व प्रकृति का मिलन का योग असाधारण है। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को यह विशेष योग भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसे "विवाह पंचमी" कहते हैं।
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी मोक्षदा एकादशी कहलाती हैं। इस व्रत के प्रभाव से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन श्री कृष्ण व गीता का पूजन शुभ फलदायक होता है। भोजन कराकर दान आदि कार्य करने से विशेष फल प्राप्त होते है। मोक्ष का अर्थ है मोह का त्याग। इ...
गोवर्धन पूजा या अन्नकूट पर्व दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। इस दिन लोग घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करते हैं। इस दिन गायों की सेवा का विशेष महत्व है। इस दिन के लिए मान्यता प्रचलित...
