Bhartiya Parmapara

छला समर्पण | परिवार, संवेदना और अवमूल्यन की क...

घर के आँगन में पीपल का पुराना पेड़ खामोशी से खड़ा था। उसकी छाँव में खेलते हुए बीते साल जैसे किसी पुराने संदूक में बंद पड़े थे। इस घर की दीवारों ने न जाने कितनी कहानियाँ देखी थीं—हँसी की, आँसुओं की, त्याग और उपेक्षा की। बड़े बेटे ने महज़ छठी कक्षा से ही घर का बोझ...

अंतर्वेदना: आत्मा को छू लेने वाली लघुकथा

"मुझे अपनी शरण में ले लो राम... ले लो राम। 
मुझे अपनी शरण में ले लो राम...!!" 
"रानो, तुम यह उदासी भरा भजन क्यों गा रही हो? और यह क्या—तुम्हारी आँखें तो सरोवर की तरह डबडबा गई हैं?" प्यारे ने अपनी पत्नी रानो के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा। 

डिग्री नहीं, दिशा ज़रूरी – करियर और जीवन की स...

"रागिनी! ज़रा अपनी पढ़ाई-लिखाई और खेल-कूद की जितनी भी डिग्रियाँ हैं, सब ले आओ,“ आरती की थाली लिए सासू माँ ने मुस्कराते हुए कहा। रागिनी चौंकी, फिर मुस्कराकर मोबाइल स्क्रॉल करते हुए बोली, मम्मी जी! आप मेरी डिग्रियों का क्या करेंगी? आपको उनसे क्या मतलब?"

आडंबर की कहानी | प्रकृति के प्रति मानव समाज

"माँ! हमें नदी किनारे बसना था न? कम से कम पानी तो मिल जाता। यहाँ तो कोई इंसान हमें झाँकने तक नहीं आता।"
नीम का छोटा पौधा चिंता व्यक्त करते हुए अपनी माँ से बोला।

ज़िंदगी के साथ भी, ज़िंदगी के बाद भी – जीवन द...

ये क्या पोथी पुराण ले कर बैठे रहते हो जी। जब देखो पोस्ट करना फिर थोड़ी देर बाद फेसबुक में लाइक कमेंट्स देखना। क्या मिलता है समझ नहीं आता? 
आज अनुराधा सुबह–सुबह अपने पति मनोरम से तीखी आवाज़ में बोली।  
मनोरम ने पूछा– तुम्हें क्या हो...

नारी का अंतर्मन और स्नेह की प्यास

आसमान में टकटकी लगाए, अश्रुपूरित नयनों से अतीत के उन सुनहरे पलों को समेटते हुए, मन न जाने कितने ही उतार-चढ़ाव पार कर चुका था।  यूं तो जीवन में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं थी, किंतु शारीरिक और भौतिक आवश्यकताओं के अतिरिक्त, भावना प्रधान मन की कुछ मानसिक आवश्यकताएं भी...

माँ की समझ - बच्चों का भविष्य और मोबाइल का जा...

मजा आ गया अनन्या पार्टी में, सचमुच जिंदगी में खुशियां तो बस सहेलियों के साथ ही मिलती है, अब हम जल्द ही गोवा ट्रिप प्लान करते हैं तब तक तू रिल्स के लिए गाने सिलेक्ट कर के रख लें कहते हुए दोनों खिलखिलाने लगी।

और सुन आज के पार्टी के व...

माँ से सास तक: विभा की शक्ति और सामंजस्य की य...

पलक झपकते ही जैसे उम्र की सीढ़ियां पीछे छूटने लगी। जीवन रूपी पगडंडी पर चलते हुए अनेक उतार-चढ़ाव आए किंतु विभा धैर्य से सब कुछ सहकर हर स्थिति में सामंजस्य बिठा ही लेती। आज तक अपनी हर भूमिका उसने बड़े ही शिद्दत से निभायी अब नजर अतीत के पन्नों से हटकर भविष्य के सुनहरे पन्...

शादी में सहमति और बेटी के सपनों का सम्मान – श...

शर्मा जी!  हमें और हमारे बेटे राहुल को आपकी बेटी नेहा पहली नजर में ही पसंद आ गई। इस बारे में आप लोगों का क्या विचार है? हम जल्द ही जानना चाहते हैं। जी....जी... तिवारी जी; ये तो बहुत ही शुभ समाचार है। शादी पक्की हो इससे पहले मैं आप लोगों के समक्ष अपनी कुछ बातें रख...

संयम की अंगाकर रोटी ने स्कूल मेले में सबका दि...

इस बार स्कूल में बहुत मजा आने वाला है। आएगा भी क्यों नहीं;  बाल मेले का आयोजन जो हो रहा है। यह एक प्रतियोगिता भी है। राहुल और संयम को पिछली बार का आयोजन याद आने लगा।  
बड़ा मजा आया था उन्हें।

आधुनिक विवाह और सामाजिक विडंबना: बदलते रिश्तो...

बहुत दिनों बाद अपनी सखी के घर गई थी मैं, बेटी की शादी की बधाई भी देनी थी और मौसी जी के सेहत भी पूछ लेने के आशय से चार बजे पहुंची तो तीनों पीढ़ी एक साथ बैठी थी। नानी,मां और बेटी, साथ बैठ चाय पी रही थी। मैंने पूछा,“बड़ी देर से आई हो पग फेरे के लिए सिया?" सब थोड़ी...

राशन की दुकान पर भ्रष्टाचार: व्यवस्था की सच्च...

निशा अखबार में आज कुछ नई खबर आई है क्या जो इतनी आंखें गड़ाए पढ़ रही हो। 
कुछ नया नहीं है निखिल, पता नहीं हमारे देश का क्या होगा हर तरफ बस भ्रष्टाचार की खबरें पढ़ने मिलती।

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