Bhartiya Parmapara

सर्दियों की सीख: मौसम बदलने का महत्व

सर्दी की सिख 

ठंडी हवाएँ गाँव में दस्तक देने लगी थीं। सुबह की धूप अब हल्की पड़ने लगी थी और लोग गर्म कपड़े निकालने लगे थे। गाँव का आठ साल का अनुज अभी भी ठंड को अनदेखा करते हुए अपने दोस्तों के साथ जमीन पर खेल रहा था। उसका चेहरा लाल, हाथ ठिठुरे हुए, लेकिन खेलने का जोश कम नहीं।

दूर से दादी ने आवाज़ दी—“अनुज! ठंडी बढ़ गई है,

अब घर आ जा।” 
अनुज ने अनसुना कर दिया। लेकिन कुछ देर बाद छींक पर छींक आने लगी और वह घर लौट आया। 
दादी ने उसे अंगीठी के पास बैठाते हुए कहा— “देखा, मौसम को हल्के में लोगे तो शरीर नाराज़ होगा।” 
अनुज ने पूछा—“दादी, सर्दी में ऐसा क्या होता है कि आप बार-बार सावधान करती हैं? मौसम बदलने से शरीर पर इतना असर क्यों?” 
दादी मुस्कराईं, “बेटा, हर मौसम के अपने कपड़े और अपना खाना होता है। अगर हम उसे नहीं अपनाते, तो बीमारी घेर लेती है।”

अनुज ध्यान से सुनने लगा। 
दादी ने समझाया— “गर्मियों में हम हल्के कपड़े पहनते हैं और ठंडी चीज़ें खाते हैं। लेकिन सर्दी में शरीर की गर्मी कम हो जाती है, इसलिए हमें ऐसे खाने की जरूरत होती है जो अंदर से ताकत दे—जैसे गुड़, तिल, मेवे, अदरक, हल्दी, गरम दूध और मौसमी सब्जियाँ। ये सब शरीर को गर्म रखती हैं और बीमारी दूर रखती हैं।”

अनुज ने पूछा— “लेकिन क्यों दादी?” 
“क्योंकि बेटा,” दादी ने अंगीठी की ओर देखते हुए कहा, 
“ठंडी हवा शरीर की गर्मी खींच लेती है। ऐसे में हमारा खाना ही आग की तरह काम करता है। अगर सही खाना नहीं लिया तो जुकाम, खाँसी और बुखार जल्दी पकड़ लेते हैं।”

दादी ने फिर उसे गुड़-रोती और अदरक की चाय दी। पहला घूंट लेते ही अनुज की आँखें चमक उठीं। “वाह दादी, ये तो बहुत स्वादिष्ट है!”

दादी ने बताया— “सर्दी सिर्फ कपड़े और खाना बदलने का मौसम नहीं है, यह आदतें सुधारने का मौसम भी है। जल्दी उठना, धूप सेकना, मफलर पहनना, गुनगुना पानी पीना—ये सब जरूरी है।” 
अनुज ने उत्सुकता से पूछा— “क्या जानवर भी ऐसा करते हैं?” 
“हाँ!” दादी बोलीं।

“गाय-भैंस को ठंड से बचाने के लिए गरम चारा देना पड़ता है। पक्षी धूप ढूँढते हैं। कुत्ते पेड़ों के नीचे धूप में लेटते हैं। प्रकृति में हर जीव मौसम के हिसाब से बदलता है।”

अनुज को पहली बार एहसास हुआ कि वह मौसम को बिलकुल नजरअंदाज कर रहा था। 
अगली सुबह उसने खुद टोपी-मफलर पहना, गुनगुना पानी पिया और स्कूल गया। वहाँ टीचर ने पूछा—“बच्चों, सर्दियों में कैसे अपना ख्याल रखना चाहिए?”

अनुज ने हाथ उठाकर बोला— “मैडम, दादी ने सिखाया है कि मौसम के हिसाब से खाना, कपड़े और आदतें बदलनी चाहिए। ठंड में गरम भोजन, धूप, और अच्छी नींद बहुत जरूरी है।”

टीचर खुश होकर बोलीं— “बहुत अच्छी बात! जो मौसम को समझता है, वही स्वस्थ और मजबूत रहता है।”

शाम को घर लौटकर अनुज ने दादी को गले लगाया— 
“दादी, अब मुझे समझ आ गया। मैं अब हर मौसम का सम्मान करूँगा।”

दादी ने प्यार से कहा— “यही समझदारी है बेटा। 
मौसम बदलता है, और हमें भी उसके हिसाब से बदलना चाहिए।”

अनुज मुस्कराया— “इस बार सर्दी मेरे लिए ठंडी नहीं, सीख देने वाली गर्म होगी!”

और वह दिन अनुज की ज़िंदगी में सर्दी की सबसे प्यारी सीख बन गया।

                                                

                                                  

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