वैदिक काल की विदुषी : गार्गी और मैत्रेयी -
विदुषी गार्गी एवं विदुषी मैत्रेयी के ऊपर चर्चा करने से पहले मैं बताना चाहती हूँ विदुषी शब्द का अर्थ क्या होता है, विदुषी का अर्थ एक ऐसी स्त्री जो बहुत विद्वान हो ऋग्वेद में विदुषी स्त्री को ऋषि कहते हैं और आज हम ऐसी ही 2 विदुषी महिलाओं के बारे में चर्चा करेंगे। गार्गी एवं मैत्रेयी के बारे में यह भी कहा जाता है वह ब्रह्मवादिनी थी।
महाभारत आदि ग्रंथों में भी ब्रह्मवादिनी मैत्रेयी, गार्गी वेद विदुषी महिलाओं के ब्रह्मविद्या संबंधी उच्च कोटि के संवाद प्राप्त होते हैं। यह ब्रह्मवादिनी वेद की अधिकारी विद्वान थी और वेद की शिक्षाओं की स्वामिनी बनकर शिक्षा को विश्व के लोगों के कल्याण के लिए प्रयोग करती थी। ब्रह्म वादियों के जो संस्कार प्रमुख रूप से बताए गए हैं उनमें उपनयन संस्कार का महत्वपूर्ण स्थान है। यह ब्रह्मवादिनी महिलाएं प्रतिदिन दो यज्ञ करती थी। अपने निवास पर रहते हुए भी अपने भरण-पोषण के लिए भिक्षावृत्ति करके पेट पालती थी।
गार्गी –
गार्गी वैदिक काल की एक दार्शनिक एवं ब्रह्मवादिनी थी। वैदिक काल की महिलाएं अपने अनुकरणीय बुद्धि और सर्वोच्च आध्यात्मिक गुणों के लिए प्रसिद्ध थी। गार्गी अपने उस समय की असाधारण महिलाओं में से एक थी वह विदुषी के साथ एकप्रवर्तिका भी थी। गार्गी का पूरा नाम "गार्गी वचकनु" था, वह ऋषि वचकनु की पुत्री थी। गार्गी की रुचि प्रारंभ से ही शिक्षाविदों के साथ रहने की थी। आपने सभी के अस्तित्व की उत्पत्ति पर प्रश्न उठाते हुए भजनों की रचना की। ब्रह्मविद्या का ज्ञान साथ होने के कारण वह ब्रह्मवादिनी कहलायी।
राजा जनक ने जब ब्रह्म यज्ञ किया उसी समय दार्शनिकों की एक बैठक का आयोजन भी किया उस बैठक में बहुत सारे दार्शनिक एकत्र हुए तथा गार्गी जी भी वहां पर सम्मिलित हुई राजा जनक ने 1000 गायें सोने की सींग मडवा कर तथा आभूषण पहना कर रखी थी जो जीतेगा वही वह गाय ले जाएगा। विद्वान बैठे रहे पहल किसी ने नहीं की सब सोच रहे थे यदि गाय ले जाते हैं तो आत्म शलघना मालूम पड़ेगी। अंत में ऋषि याज्ञवल्क्य ने अपने शिष्यों से गाय हॉक कर ले जाने के लिए कहा वैसे ही सभा में बैठे सारे विद्वान उठ खड़े हुए और फिर प्रश्न उत्तर का क्रम चालू हो गया। ऋषि ने सब को हरा दिया अंत में गार्गी जी ने याज्ञवल्क्य जी से प्रश्न पूछे उन्होंने आत्मा और सत्य के बारे में पूछा, भूत भविष्य वर्तमान तथा आकाश की रचना किसने की आदि प्रश्न पूछे तथा संतुष्टि हुई कुछ प्रश्नों पर ऋषि चुप रह गए किंतु गार्गी जी का उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था उन्होंने कहा ऋषि जैसा महान अन्य कोई विद्वान नहीं है और गाय ले जाने का हक उन्हीं का है। उस समय गार्गी की उम्र केवल 18 वर्ष थी।
वह एक प्राचीन दार्शनिक वेदों के प्रसिद्ध व्याख्याता ब्रह्मविद्या की ज्ञाता के नाम से जानी जाती हैं बृहदारण्यक उपनिषद के छठी बी तथा आठवीं क्रम में आपका नाम प्रमुख है गर्ग गोत्र में जन्म लेने के कारण ही उनका नाम गार्गी पड़ा। वेदों की रचना गढ़ने में गार्गी का एक विशेष योगदान है।
मैत्रेयी –
मैत्रेयी मित्र ऋषि की कन्या थी और ऋषि याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी थी। याज्ञवल्क्य जी की पहली पत्नी का नाम कात्यायनी था। मैत्रेयी की योग्यता एवं प्रतिभा के कारण ऋषि का अनुराग एवं स्नेह मैत्रेयी के प्रति अधिक था यह बात कात्यायनी को बहुत बुरी लगती थी वह मैत्रेयी से ईष्या करती थी। पति के संन्यास लेने के कारण ऋषि ने दोनों पत्नियों में अपनी संपत्ति आधी आधी बांट दी लेकिन मैत्रेयी ने पति का साथ मांगा अंत में धन प्राप्त करने के बाद अपनी सारी संपत्ति बड़ी पत्नी को सौंप कर पति के साथ चली गई। मैत्रेयी अपने पति के साथ आध्यात्मिक विषयों पर संवाद किया करती थी। आश्व लायन ग्रह सूत्र में ब्रह्म यज्ञ तर्पण में मैत्रेयी का नाम सुलभा के साथ आया।
कहा जाता है कि त्रेता युग में राजा जनक के दरबार में आध्यात्मिक वाद विवाद चला जिसमें अंत में याज्ञवल्क्य को हरा दिया वह मैत्रेयी के चरणों पर गिर पड़े तथा कहने लगे मुझे अपना शिष्य बना लो मैत्रेयी ने उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया दरबार में मैत्रेयी का सम्मानित किया गया।
प्राचीन काल से ही भारत की नारी सशक्त रही है तथा समय-समय पर अपनी योग्यता क्षमता के झंडे गाड़े हैं तथा विश्व में अपना नाम ऊंचा किया है।

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