Bhartiya Parmapara

शादी में सहमति और बेटी के सपनों का सम्मान – श...

शर्मा जी!  हमें और हमारे बेटे राहुल को आपकी बेटी नेहा पहली नजर में ही पसंद आ गई। इस बारे में आप लोगों का क्या विचार है? हम जल्द ही जानना चाहते हैं। जी....जी... तिवारी जी; ये तो बहुत ही शुभ समाचार है। शादी पक्की हो इससे पहले मैं आप लोगों के समक्ष अपनी कुछ बातें रख...

संयम की अंगाकर रोटी ने स्कूल मेले में सबका दि...

इस बार स्कूल में बहुत मजा आने वाला है। आएगा भी क्यों नहीं;  बाल मेले का आयोजन जो हो रहा है। यह एक प्रतियोगिता भी है। राहुल और संयम को पिछली बार का आयोजन याद आने लगा।  
बड़ा मजा आया था उन्हें।

आधुनिक विवाह और सामाजिक विडंबना: बदलते रिश्तो...

बहुत दिनों बाद अपनी सखी के घर गई थी मैं, बेटी की शादी की बधाई भी देनी थी और मौसी जी के सेहत भी पूछ लेने के आशय से चार बजे पहुंची तो तीनों पीढ़ी एक साथ बैठी थी। नानी,मां और बेटी, साथ बैठ चाय पी रही थी। मैंने पूछा,“बड़ी देर से आई हो पग फेरे के लिए सिया?" सब थोड़ी...

राशन की दुकान पर भ्रष्टाचार: व्यवस्था की सच्च...

निशा अखबार में आज कुछ नई खबर आई है क्या जो इतनी आंखें गड़ाए पढ़ रही हो। 
कुछ नया नहीं है निखिल, पता नहीं हमारे देश का क्या होगा हर तरफ बस भ्रष्टाचार की खबरें पढ़ने मिलती।

मरहम: करुणा, सहानुभूति और मानवता की एक मार्मि...

एक बुढ़िया थी जो बेहद कमज़ोर और बीमार थी। रहती भी अकेले ही थी। उसके कंधों में दर्द रहता था लेकिन वह इतनी कमज़ोर थी कि ख़ुद अपने हाथों से दवा लगाने में भी असमर्थ थी। कंधों पर दवा लगवाने के लिए कभी किसी से मिन्नतें करती तो कभी किसी से। एक दिन बुढ़िया ने पास से गुज़रने वाले एक...

बालकथा - माँ का दर्द

माँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वाह! मैदान भी हरा–भरा है। चीनू उछलते हुए अपनी माँ से कहने लगा; हम रोज आ कर खेलेंगे न.....! 
हाँ बेटा चीनू; माँ ने हँसते हुए हामी भरी। खुले मैदान में चीनू जैसे और भी छोटे – छोटे बच्चे खेल रहे थे यह देख चीनू और भी खुश ह...

पिता–पुत्र की वास्तविक जीत: हार में छिपी इंसा...

राजेश्वर प्रसाद की उम्र यद्यपि काफी हो चुकी थी लेकिन अपनी वास्तविक उम्र से बहुत कम के लगते थे राजेश्वर प्रसाद।  
और इसका कारण था उनकी संतुलित दिनचर्या व जीवनचर्या। नियमित रूप से व्यायाम और सैर करना तथा खानपान में संयम बरतना उनकी आदत बन चुकी थी। उनकी दिनचर्या औ...

लघुकथा : हार-जीत

राजेश्वर प्रसाद की उम्र यद्यपि काफी हो चुकी थी लेकिन अपनी वास्तविक उम्र से बहुत कम के लगते थे राजेश्वर प्रसाद। 
और इसका कारण था उनकी संतुलित दिनचर्या व जीवनचर्या। नियमित रूप से व्यायाम और सैर करना तथा खानपान में संयम बरतना उनकी आदत बन चुकी थी। उनकी दिनचर्या और...

निर्णय (The Decision)

पिछले दिनों एक मित्र मिले। बुज़ुर्ग हैं। उनकी तीन पुत्रियाँ हैं। तीनों ही ख़ूब पढ़-लिखकर अच्छी नौकरियाँ पा चुकी हैं। तीनों की ही शादियाँ भी हो चुकी हैं। छोटी बेटी की शादी अभी हाल ही में हुई थी।

मित्र ने बतलाया कि उनकी छोटी बेटी ब...

नाश्ता: गरीबी, मानवीय रिश्तों और आत्मबोध की म...

‘फिर से सूखी रोटी और आलू की सब्जी। पिछले तीन महीने से यही खाना खा-खाकर ऊब चुका हूं। मैं नहीं खाऊंगा’ -खाने की थाली को गुस्से में उलटते हुए पप्पू ने कहा।

‘अरे बेटा! खाने का अपमान नहीं करते हैं। सुबह में अपने घर से...

दिशा (Direction)

प्रोजेक्ट पूरा कर कॉलेज से निकलने में नेहा को काफी समय हो गया रफ्तार से सीढ़ियां उतरते हुए पैर फिसल गया और वहां नीचे गिर पड़ी। सर से खून बहने लगा पैरो से चलना दूभर हो रहा था इत्तफाक से उसका सीनियर माधव अपने मित्र के साथ वही खड़ा था। इस समय कॉलेज के कैंपस में इक्का-दुक...

डॉ. विश्वास की ईमानदारी: बाल श्रम, भ्रष्टाचार...

डॉ. विश्वास का आज इस नए हॉस्पीटल में पहला ही दिन था। पिछले सप्ताह ही उसकी एमडी पूरी हुई थी और एक सप्ताह के अंदर ही उसे एक सरकारी हॉस्पीटल में नौकरी मिल गई थी। हॉस्पीटल से लौटने के बाद विश्वास बहुत प्रसन्नचित लग रहा था। उसके चेहरे पर व्याप्त प्रसन्नता को देखकर उसके मात...

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