Bhartiya Parmapara

वीर बाल दिवस 26 दिसंबर | साहिबजादा जोरावर सिं...

सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के 9 जनवरी 2022 के प्रकाश पर्व के अवसर पर हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके दो छोटे साहिबजादों की लासानी शहादत को याद करने के लिए 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित किया था और उसी के अनुरूप गृह मंत्रालय ने सरकारी गजट में अध...

तुलसीदास की दृष्टि में नारी शक्ति, प्रकृति, अ...

नारी शक्ति, प्रकृति, अग्नि और समय: तुलसीदास की दार्शनिक दृष्टि में 
तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस सरल अवधी भाषा में काव्य रूप में लिखा गया एक अद्भुत ग्रंथ है, जो न केवल श्रीराम के चरित्र, आदर्शों और मर्यादा का अमृतमय वर्णन करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर...

रामायण महाभारत के युद्ध बनाम आधुनिक युद्ध

भारत की प्राचीन युद्ध परंपरा रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में परिलक्षित होती है, जहाँ युद्ध को धर्म और नीति का साधन माना गया है। इसके विपरीत, 20वीं एवं 21वीं सदी के युद्ध मुख्यतः राजनीतिक सत्ता, भू-सामरिक प्रभुत्व एवं आर्थिक संसाधनों के नियंत्रण हेतु लड़े गए हैं&...

सामाजिक संकट एवं सांस्कृतिक अवसाद की ओर बढ़ते...

समाज का सबसे गहरा संकट तब जन्म लेता है, जब उसकी सबसे मूल इकाई - परिवार अपने ध्येय और दायित्व को विस्मृत करने लगती है। आज यह स्थिति हमें समाज में दृष्टिगोचर हो रही है। भारतीय जीवन-दृष्टि में परिवार केवल एक सामाजिक संरचना मात्र नहीं है, वरन् वह एक जीवंत, स्पन्दनशील और आ...

सच कहने का साहस है.. सलीका है कविता

कविता, पद्य की सबसे खूबसूरत विधा है और दिल तक पहुँचने की सबसे अच्छी अभिव्यक्ति भी। कविता तुकांत और अतुकांत दो तरह से लिखी जा सकती है। बातचीत की खूबसूरत अभिव्यक्ति ही कविता है। नारी का श्रृंगार, प्रकृति का सौंदर्य, प्रेम की अनुभूति, फूल का खिलना और महकना, बच्चे का खिलख...

पहलगाम हमला: जब इंसानियत को धर्म से तोला गया

पहलगाम की गोलियाँ: धर्म पर नहीं, मानवता पर चली थीं 
कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुआ आतंकी हमला सिर्फ एक गोलीबारी नहीं थी—यह एक ऐसा खौफनाक संदेश था जिसमें गोलियों ने धर्म की पहचान पूछकर चलना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आतंकियों ने पहले पर...

श्रम बिकता है, बोलो... खरीदोगे?

श्रम बिकता है, बोलो ..... खरीदोगे..? (ऐसा बाजार जहां रोज लगता है मेहनतकशों का मेला) 
भारत में जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है उतनी ही गति से बेरोजगारी भी बढ़ी है। हालात ऐसे बदतर हैं कि डिग्रीधारी युवकों को चपरासी तक की नौकरी भी नसीब नहीं हो पा रहीं है तथा भारत...

पर्यावरण संकट बढ़ रहा है—अब बदलाव हमारी ज़िम्...

मैंने अपने पिछले आलेख में बता दिया था कि अगर धरा न होती तो हमारा अस्तित्व ही नहीं होता। अब जब इस पर गहनता से विचारें तो सबसे पहले  यह मानना ही पड़ेगा कि जीवन के लिये आवश्यक ऑक्सीजन, पानी व अन्य सभी सामग्रियां यहां सहजता से उपलब्ध है अर्थात इस धरा पर सभी आधारभूत स...

अहंकार का अंधकार | व्यक्तित्व और समाज पर प्रभ...

अहंकार एक ऐसी मानसिक प्रवृत्ति है, जो व्यक्ति को अपनी श्रेष्ठता का अनुभव कराती है और दूसरों से खुद को ऊँचा दिखाने के लिए उसे हर कदम पर प्रेरित करती है। यह ऐसा भाव है, जो किसी भी व्यक्ति को अपनी कमजोरी को छिपाने और अपनी छवि को बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।...

अन्न का दुरुपयोग – दिखावे की संस्कृति में बर्...

अन्न शरीर की मुख्य आवश्यकता है। इससे शरीर पुष्ट होता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। अन्न की प्रकृति का भी अपना प्रभाव है। कहावत है- 'जैसा खाओ-अन्न वैसा बने मन'। पेट भरने के लिए ही संसार चल रहा है। किसी को जरूरत लायक पूर्ति चाहिए तो कोई संग्रहण में जुटा हुआ है। बावजूद इ...

विज्ञान दिवस और हमारे वैज्ञानिक

भारत में विज्ञान दिवस हर वर्ष 28 फरवरी को मनाया जाता है। मनाया भी क्यों न जाए क्योंकि 28 फरवरी 1928 को भारत के वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन ने 'रमन प्रभाव' की महत्वपूर्ण खोज की थी।इसी खोज के लिए 1930 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया या यूं कहें भारत को विज्ञा...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – नारी शक्ति को सला...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: नारी शक्ति का उत्सव 
हर वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान को सम्मान देने का दिन है। यह दिवस न केवल महिलाओं के अधिकारों और समानता की बात करता है, बल्क...

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