परीक्षा निकट आते ही बच्चों के मन में तनाव छा जाता है। फिर परीक्षा चाहे मासिक टेस्ट हो, तिमाही हो या छमाही हो। वार्षिक परीक्षा तो वर्षभर की पढ़ाई का मूल्यांकन समझा जाता है, इसलिए छात्र दिनरात अत्यंत दबाव में रहते हैं। वे खाना, सोना, हँसना - मुस्काना, खेलकूद आदि सब भूलक...
'2 जून की रोटी' एक आम कहावत है, जिसका मतलब है, दिन में दो बार भोजन प्राप्त करना। यह कहावत हमारे समाज में विशेष रूप से गरीब और मेहनतकश वर्ग के जीवन की वास्तविकता को प्रकट करती है। अवधि भाषा में जून का मतलब "वक्त अर्थात समय" से होता है।
संयम और नैतिकता के बूते ही जीवन सुखमय तो होता ही है साथ साथ सम्मानजनक भी। जैसा आप सभी जानते हैं कि विलासिता से अनेक अवगुण स्वत: ही अपने आप विकसित हो जाते हैं और इससे बचने के लिये संयम ही एक कारगर हथियार है। लेकिन हमें सुख जितना पसन्द है उतना संयम नहीं क्योंकि संयम के...
इस्लाम एक इब्राहीमी पंथ है जो एकेश्वरवादी है। इसका प्रादुर्भाव 7 वीं शताब्दी में अरबी प्रायद्वीप में हुआ। इस्लामी परंपरा के अनुसार इस संप्रदाय का सबसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक ग्रंथ 'कुरान' है। इसके अनुयायियों का विश्वास है कि 'वेदों ' के ही समान इसके सारे अवतरण किसी...
वर्तमान में भारत सहित समस्त विश्व चारित्रिक दुर्बलता की व्याधि से पीड़ित है। आए दिन समाचार-पत्रों में वीभत्स दुर्घटनाओं के समाचार भरे रहते हैं। इन कुप्रभावों से बच्चे भी अछूते नहीं हैं। वे हत्या, दुष्कर्म, ठगी, अपहरण, चोरी, आत्महत्या, धूम्रपान, नशा सेवन, लव जिहाद जैसी...
आओ मिलजुल कर हम करेंगे प्रयास
प्रभु राम के आदर्शो का हृदय में हो वास
छल कपट को अपनी देह से दूर रखना
सतयुग लाने का मन में हो दृढ़विश्वास।
किशोरावस्था शैशव तथा बाल्यकाल के उपरांत आती है। यह 13 से 19 वर्ष तक की आयु तक का काल है। किशोरावस्था में बालक के शरीर और व्यवहार में तूफान गति से परिवर्तन होते हैं। उसमें अटपटापन, तनाव, आक्रोश, झंझावात, तीव्रता, आक्रामकता एवं अहं सम्प्रयुक्तता पायी जाती है।
1 जनवरी से प्रतिवर्ष अँग्रेजी नववर्ष प्रारंभ हो जाता है। यह अंग्रेजों के द्वारा हमें दी गयी एक कुप्रथा है, जो हमारी मानसिक दासता का प्रतीक है। यह सत्य है कि विश्व ने इसे अपना लिया है और हम आज अपने अधिकांश कार्य इसी वर्ष के अनुसार करने के लिए बाध्य हैं, परंतु हमे...
पूर्व भारत के कोई प्रांत की बात सुनी थी, जहां बहु की नथनी का वजन परिवार की संपन्नता का प्रतीक हुआ करता था। पहले परिवार भी बड़े ही हुआ करते थे, उस जमाने में। दत्ताजी अपने बेटे को ब्याह के फूल सी बहु लाएं थे। पूरे गांव की औरतें और बच्चे जो रिश्ते में कुछ भी नहीं लगते थे...
नववर्ष की स्वर्णिम आभा के आगमन के पूर्व ही मन में अनेक अभिलाषाएं प्रदीप्त होती है, अधूरे ख्वाब फिर गर्मजोशी में पूरे होने के लिए लालायित रहते है। ख्वाबों पर हकीकत की चादर कैसे बिछाएं इसी ऊहापोह में दिसंबर माह बीत जाता है, लक्ष्य की सुंदर कशीदाकारी में कितने ही ताने बा...
मानव सभ्यता का विकास नदियों के तट पर हुआ। नदियों को मानव ने जल स्रोत और जीवनोपयोगी साधन जुटाने का माध्यम बनाया। सिंधु घाटी की सभ्यता, नील नदी घाटी सभ्यता से लेकर अद्यतन मानव और जीव - जंतुओं का जीवन का आधार भी नदियाँ ही हैं। यह परिवहन और कृषि कार्य के लिए भी अत्यंत उपय...
उत्सव का अर्थ है - मंगल कार्य, धूमधाम, त्यौहार, आनंद विहार। व्यक्ति और परिवार के बाद तीसरी प्रमुख इकाई है, समाज। इन तीनों घटकों को समुन्नति और सुविकसित बनाने के लिए, पर्वोत्सव मनाए जाते हैं। उत्सव मनाने से समाज का स्तर ऊँचा होता है। इससे हर्षोल्लास और प्रसन्नता व्यक्त...
