Bhartiya Parmapara

सनातन संस्कृति में उपवास एवं व्रत का वैज्ञानि...

भारत में उपवास एवं व्रत विशेष महत्व रखते हैं तथा इन्हें रखने की परंपरा साधु-संतों, ऋषि-मुनियों से लेकर ब्रह्मचारी तथा गृहस्थ नर-नारियों में बहुत पुरानी है। सनातन संस्कृति में इन्हें आध्यात्मिक उन्नति और बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए तथा ग्रहों को अनुकूल...

राम राज्य की सोच

राम-राज्य यानी सुशासन का प्रताप ये है कि कोई किसी का शत्रु नहीं है, सभी जन मिल-जुलकर रहते हैं। सामान्य जनमानस शारीरिक, मानसिक और दैविक विकारों से मुक्त हो चुका है। सभी स्वस्थ हैं, राम-राज्य में किसी की अल्प मृत्यु नहीं होती। कोई निर्धन नहीं, कोई दुखी नहीं, कोई अशिक्षि...

घर की लक्ष्मी हैं गृहणियाँ

नारी को सम्मान, सृजन और शक्ति का प्रतीक माना गया है। हमारे धर्मग्रंथों में नारी शक्ति की महिमा गाई गई है। महिला शब्द में ही ममता, मृदुलता, मानवता और मातृत्व का समावेश है। कोई भी धार्मिक कार्य नारी के बिना पूर्ण नहीं होता है। नारी के तमाम गुणों के कारण वह प्राचीन काल स...

बात प्रेम की

बात प्रेम की .....

बसन्त ऋतु में प्रकृति ने प्रेम की चादर ओढ़ ली, जब प्रकृति ही प्रेममय है तो फिर इस प्रेम से कोई कैसे बचे।

प्रेम, प्यार, उल्फत, मोहब्बत, इश्क व लव

न जाने कितने नाम, लेकिन एहसास एक।

आत्मकथा वसंत की | वसंत ऋतु

भारत में वर्षभर में छह ऋतुएँ होती हैं। आपको नाम नहीं मालूम, चलो बता देता हूँ- ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर, हेमंत और वसंत। इस क्रम में मैं भले ही अंत में आता हूँ किंतु हमारी भारतभूमि में हिंदू वर्ष का प्रारंभ वसंत अर्थात मुझसे ही होता है। हिंदी मासों के अनुसार मैं चैत्र...

परीक्षा से डर कैसा

परीक्षा निकट आते ही बच्चों के मन में तनाव छा जाता है। फिर परीक्षा चाहे मासिक टेस्ट हो, तिमाही हो या छमाही हो। वार्षिक परीक्षा तो वर्षभर की पढ़ाई का मूल्यांकन समझा जाता है, इसलिए छात्र दिनरात अत्यंत दबाव में रहते हैं। वे खाना, सोना, हँसना - मुस्काना, खेलकूद आदि सब भूलक...

गाय और इस्लाम: विश्वास, नियम और सम्मान

इस्लाम एक इब्राहीमी पंथ है जो एकेश्वरवादी है। इसका प्रादुर्भाव 7 वीं शताब्दी में अरबी प्रायद्वीप में हुआ। इस्लामी परंपरा के अनुसार इस संप्रदाय का सबसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक ग्रंथ 'कुरान' है। इसके अनुयायियों का विश्वास है कि 'वेदों ' के ही समान इसके सारे अवतरण किसी...

किशोरों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियाँ

किशोरावस्था शैशव तथा बाल्यकाल के उपरांत आती है। यह 13 से 19 वर्ष तक की आयु तक का काल है। किशोरावस्था में बालक के शरीर और व्यवहार में तूफान गति से परिवर्तन होते हैं। उसमें अटपटापन, तनाव, आक्रोश, झंझावात, तीव्रता, आक्रामकता एवं अहं सम्प्रयुक्तता पायी जाती है। 

भारतीय नववर्ष बनाम अंग्रेजी नववर्ष

1 जनवरी से प्रतिवर्ष अँग्रेजी नववर्ष  प्रारंभ हो जाता है। यह अंग्रेजों के द्वारा हमें दी गयी एक कुप्रथा है, जो हमारी मानसिक दासता का प्रतीक है। यह सत्य है कि विश्व ने इसे अपना लिया है और हम आज अपने अधिकांश कार्य इसी वर्ष के अनुसार करने के लिए बाध्य हैं, परंतु हमे...

नथ का वजन – एक परंपरा का अंत

पूर्व भारत के कोई प्रांत की बात सुनी थी, जहां बहु की नथनी का वजन परिवार की संपन्नता का प्रतीक हुआ करता था। पहले परिवार भी बड़े ही हुआ करते थे, उस जमाने में। दत्ताजी अपने बेटे को ब्याह के फूल सी बहु लाएं थे। पूरे गांव की औरतें और बच्चे जो रिश्ते में कुछ भी नहीं लगते थे...

नववर्ष संकल्प से सिद्धि | सकारात्मक सोच, अनुश...

नववर्ष की स्वर्णिम आभा के आगमन के पूर्व ही मन में अनेक अभिलाषाएं प्रदीप्त होती है, अधूरे ख्वाब फिर गर्मजोशी में पूरे होने के लिए लालायित रहते है। ख्वाबों पर हकीकत की चादर कैसे बिछाएं इसी ऊहापोह में दिसंबर माह बीत जाता है, लक्ष्य की सुंदर कशीदाकारी में कितने ही ताने बा...

नदियों को बचाएं – जीवन और संस्कृति की रक्षा क...

मानव सभ्यता का विकास नदियों के तट पर हुआ। नदियों को मानव ने जल स्रोत और जीवनोपयोगी साधन जुटाने का माध्यम बनाया। सिंधु घाटी की सभ्यता, नील नदी घाटी सभ्यता से लेकर अद्यतन मानव और जीव - जंतुओं का जीवन का आधार भी नदियाँ ही हैं। यह परिवहन और कृषि कार्य के लिए भी अत्यंत उपय...

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