Bhartiya Parmapara

दीपोत्सव: भारतीय व्यापार, संस्कृति और अर्थव्य...

विविध त्यौहार, उत्सव, और मेले भारतीय संस्कृति की अन्यतम विशेषता है। अच्छी बात यह है कि हमारे सभी त्यौहार कहीं न कहीं संस्कार, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म से जुड़े हुए हैं, विज्ञान सम्मत है तथा आस्था और विश्वास की मजबूत नींव पर खड़े हैं। आज के व्यावसायिक जीवन में, अपनो के...

अपराध नियंत्रण में संस्कारों की भूमिका और साम...

अपराध नियंत्रण के संदर्भ में संस्कार की प्रासंगिकता 
अपराध एक विश्वव्यापी समस्या है। अपराध समाज को हानि पहुंचाने के साथ ही राष्ट्रीय छवि को भी धूमिल करता है। सनातन संस्कृति में संस्कार को केंद्र में रख कर अपराधों को नियंत्रित करने का लक्ष्य दिखाई देता है। मानव...

क्या वास्तव में “बी प्रैक्टिकल” होना ज़रूरी ह...

जब मन घोर निरीहता से जूझ रहा होता हो, उन क्षणों में भी परमात्मा की सुधि लिए बिना हृदय को जरा सा भी चैन न आए यह प्रेम नहीं तो और क्या ही होगा?  
आज मैं न कोई स्वास्थ्य चर्चा पर बात करूंगा न किसी सामाजिकता पर आज मैं हृदयवादी होना चाहता हूं अपने मर्म की बात...

शास्त्रीजी की जिन्दगी से हमें बहुत कुछ सीखने...

वैसे तो अनेकों ऐसे वाकये हैं जिससे हँसमुख स्वभाव वाले शास्त्रीजी की सादगी के अलावा कर्मठता, सरलता, स्पष्टवादिता, नियमबद्धता, दृढ़निश्चयता वगैरह स्पष्ट झलकती है। लेकिन अब मैं यहाँ एक ऐसा वाकया प्रस्तुत कर रह हूँ जिससे भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ पहचान रखने वाले शास्त्रीज...

कन्याओं को पूजन से अधिक सुरक्षा की जरूरत है ....

क्यों ‌लग जाता है अंकुश उनके हसीन ख्वाबों पर ? 
नवरात्रि का पर्व भारतभर में आस्था का दीप प्रज्वलित कर जाता है। घर-घर में पूजा अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान होते है, एक दिन कन्याओं को देवी स्वरूप मान पूजन कर हम अपने दायित्वों से मुक्त हो जाते है। यह देवी स्वरूप...

रावण की हड़ताल: दशहरा विशेष व्यंग्य

सोटागुरु का खैनी बनाने का अंदाज ही जुदा है। उनकी अदा पर लाखों फ़िदा हैं। सोटागुरु के खैनी बनाने का अंदाज उस समय बेइंतहा हो जाता है जब सिर पर पगड़ी बधी हो और मूछे नागिन डांस करती हों। उनकी खैनीवाली अदा के लाखों दीवाने हैं। 

प्रतिष्ठित शिक्षक - प्रेरक प्रसंग

एक 50 वर्षीय प्रतिष्ठित शिक्षक अपने ८५ उम्र पा चुके पूर्व शिक्षक के बारे में ज्ञात होते ही, बिना विलंब किए, उनसे पाँव-धोक करने के साथ-साथ कृतज्ञता ज्ञापित करने पहुँचे। लेकिन उसको वो शिक्षक महोदय पहचान ही नहीं पाये। फिर भी उसे प्यार से बैठाया और पीठ पर हाथ फेरते हुए कह...

राष्ट्र का सजग प्रहरी और मार्गदृष्टा है, शिक्...

शिक्षक, राष्ट्र का सजग प्रहरी, मार्गदृष्टा और भविष्य निर्माता भी है। शिक्षक माटी को मनचाहा आकार देकर सुंदर घड़ों का निर्माण करते हैं, यानि देश का भविष्य गढ़ते हैं। शिक्षक उस मोमबत्ती के समान है जो ख़ुद जलकर के दूसरों को प्रकाश देती है। शिक्षक हमें अंधेरे से ज्ञान के प्र...

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है?

कई बातें ऐसी हैं जो कही नहीं जाती, कई किस्से ऐसे हैं जो दोहराए नहीं जाते, कई घटनाएं ऐसी हैं जो देखी नहीं जाती और कई चित्र ऐसे हैं जो कभी भुलाए नहीं जातेl आखिर ऐसा क्यों हैं कि आखिर जिन बातों को हम कहना चाहे तो कहने की हिम्मत नहीं हैं या फिर किसी को फुरसत नहीं हैं, आखि...

चलते रहने का महत्व – कर्म, धैर्य और सकारात्मक...

चलते रहने का नाम ही जिंदगी है। जिनको जिंदगी से शिकायत है वे पूरी जिंदगी शिकायत ही करते रह जाते हैं। ‘कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता। कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता।’ मानव जीवन के सच को बयां करती ये पंक्तियां हमें पॉजिटिव बने रहने और जीवन के हर पल...

घोड़े पर योद्धा की मूर्तियों के संकेत: मुद्रा...

इस बार गर्मी की छुट्टियों में जब पोता-पोती दिल्ली घूम कर लौटे तब उन्होंने वहाँ जो-जो फोटो लिये थे, वह सब दिखाने लगे। मैंने जब उनका फोटो महाराणा प्रताप व लक्ष्मीबाई की प्रतिमा के (नीचे खड़े होकर) साथ देखा तब मैंने उनसे उन प्रतिमाओं से क्या संकेत मिलता है, पूछा। 

प्री-वेडिंग शूट: आधुनिकता की अंधी दौड़ या सां...

हो गई तो अच्छी बात है नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई? आजकल तो सभी करवा रहे हैं। इस आधुनिक युग में ये सब आम बात है, अरे भाई! शर्माना कैसा? आप बस तैयारी शुरू करो। आपको एक बहुत अच्छे फोटोग्राफर और प्लेस (स्थान) बताने की जिम्मेदारी हमारी रहेगी। ज्यादा खर्च नहीं आएगा बस वही......

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