Bhartiya Parmapara

क्या हमारे कार्य करने की कोई सीमा होती है?

क्या हमारे कार्य करने की कोई सीमा होती है? इसका सही-सही उत्तर देना शायद संभव न हो लेकिन हम जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक मुश्किल और असंभव लगने वाला कार्य भी कर सकते हैं।

एक बार एक किसान अपने फ़ार्म हाउस पर काम कर रहा था। तभी उसका ब...

खिचड़ी: ढाई हजार साल पुराना भारतीय व्यंजन, स्...

14 जनवरी मकर संक्रांति के दिवस हुए स्वागत से मैं अभी तक अभिभूत हूँ। "अतिथि देवो भव" की परम्परा का पालन करते हुए प्रत्येक घर में मेरे स्वागत की तैयारियाँ थी। उनका स्वागत देख कर ऐसा लगा जैसे मेरे आने की उन्हें लम्बे समय से प्रतीक्षा थी। सभी ने बड़े प्रेम से मेरा स्वागत...

सरकारी नियंत्रण से मन्दिरों को मुक्त करें – ए...

सनातनी करे पुकार - मन्दिरों को अपने नियन्त्रण से मुक्त करें सरकार

हमारे भामाशाहों ने मन्दिरों को सरकारी नियन्त्रण से बचाने का सब समय प्रयास किया है। जब भी मुगलों ने मन्दिर पर नजर डाली उस समय के भामाशाह आगे आकर उसे बचाने का पूरा-पूर...

प्रदूषण और निजी वाहनों का बढ़ता प्रभाव

वर्तमान समय में हम सभी को ज्ञात है कि प्रदूषण हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए एक चुनौती बन गया है परंतु जाने अनजाने हम यह भूल जाते हैं कि यह चुनौती हमारे समक्ष है इसलिए हम इससे उबरने की लिए पुरजोर प्रयास नहीं कर रहे हैं। किसी भी चुनौती का सामना हम सफलता पूर्वक तब ह...

सहनशीलता का गिरता स्तर और समाज पर इसके हानिका...

सहनशीलता का गिरता स्तर- समाज के लिए हानिकर

आज भौतिकतावाद, एकाकी परिवार और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में सहनशीलता शनैः शनैः क्षीण होती जा रही है। है। इस समस्या के मूल में मूल्यों की अवमानना/ स्वार्थपरता की बढ़ती प्रवृत्ति/माता-पित...

कुंबकोणम के शक्ति मुत्तम मंदिर और गरीब पंडित...

तमिलनाडु के कुंबकोणम नामक शहर की तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव का नाम है-शक्त्ति मुत्तम यानि शक्ति का चुंबन। यहां भगवान शिव का एक पुरातन मंदिर है। यहां के ईश्वर का नाम है शिवक्कोळंदु नादर और देवी का नाम है पेरियनायकी। इस मंदिर की देवी पार्वती की मूर्ति परमेश्वर को आ...

भारत के शहरी क्षेत्रों में वाहन पार्किंग की च...

यह ज़रूरी नहीं है कि अच्छा सार्वजनिक परिवहन यातायात की भीड़ को काफ़ी कम कर दे। भीड़भाड़ की स्थिति में सुधार करने के लिए, शहरों को निजी कारों के स्वामित्व और उपयोग के कार्यात्मक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक मूल्यों को लक्षित करने वाली गतिविधियों के साथ ही अपनी सार्वजनिक...

दुविधा – अनुभव और अस्वीकार्यता के बीच की दूरी

एक नए पड़ाव से शुरू हुई यात्रा फिर अगले पड़ाव की ओर उत्सुकता से देखती है। अनदेखे को देख लेने और अनजाने को जान लेने की इस लालसा में हम साल-दर-साल बीतते चले जाते हैं। पता भी तब चलता है जब हमें बीते हुए एक अरसा गुजर चुका होता है। बढ़ते बच्चों की बढ़ती काया और बदलते चले जाते...

दीपोत्सव: भारतीय व्यापार, संस्कृति और अर्थव्य...

विविध त्यौहार, उत्सव, और मेले भारतीय संस्कृति की अन्यतम विशेषता है। अच्छी बात यह है कि हमारे सभी त्यौहार कहीं न कहीं संस्कार, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म से जुड़े हुए हैं, विज्ञान सम्मत है तथा आस्था और विश्वास की मजबूत नींव पर खड़े हैं। आज के व्यावसायिक जीवन में, अपनो के...

अपराध नियंत्रण में संस्कारों की भूमिका और साम...

अपराध नियंत्रण के संदर्भ में संस्कार की प्रासंगिकता 
अपराध एक विश्वव्यापी समस्या है। अपराध समाज को हानि पहुंचाने के साथ ही राष्ट्रीय छवि को भी धूमिल करता है। सनातन संस्कृति में संस्कार को केंद्र में रख कर अपराधों को नियंत्रित करने का लक्ष्य दिखाई देता है। मानव...

क्या वास्तव में “बी प्रैक्टिकल” होना ज़रूरी ह...

जब मन घोर निरीहता से जूझ रहा होता हो, उन क्षणों में भी परमात्मा की सुधि लिए बिना हृदय को जरा सा भी चैन न आए यह प्रेम नहीं तो और क्या ही होगा?  
आज मैं न कोई स्वास्थ्य चर्चा पर बात करूंगा न किसी सामाजिकता पर आज मैं हृदयवादी होना चाहता हूं अपने मर्म की बात...

शास्त्रीजी की जिन्दगी से हमें बहुत कुछ सीखने...

वैसे तो अनेकों ऐसे वाकये हैं जिससे हँसमुख स्वभाव वाले शास्त्रीजी की सादगी के अलावा कर्मठता, सरलता, स्पष्टवादिता, नियमबद्धता, दृढ़निश्चयता वगैरह स्पष्ट झलकती है। लेकिन अब मैं यहाँ एक ऐसा वाकया प्रस्तुत कर रह हूँ जिससे भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ पहचान रखने वाले शास्त्रीज...

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