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एक वैदिक उक्ति है— “आ नो भद्राः क्रतवो यंतु विश्वतः”—अर्थात सभी दिशाओं से विचारों को आने दो। हर युग की अपनी ऐतिहासिक सीमा में तर्कसम्मत विचारों...
भारत की शैल चित्रकला अपने आप में अनूठी है। यह प्रागैतिहासिक काल से ही मानवीय मनो भावों को प्रकट करने का माध्यम रही है। मध्य प्रदेश के भीमबेटका शैलाश्रयों से लेकर महाराष...
स्त्रियों द्वारा मांग में सिंदूर लगाना - भारतीय वैदिक परम्परा खासतौर पर हिन्दू समाज में शादी के बाद हर सुहागिन महिला को मांग में सिन्दूर भरना आवश्यक है। सिन्दूर द्वारा...
हमारे शास्त्रों में लिखा है कि कभी भी उत्तर दिशा में सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे हमारी आयु घटती है क्योंकि दक्षिण की ओर पांव केवल मृत व्यक्ति के ही किये जाते हैं। अत...
स्वास्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में मंगल प्रतीक माना जा रहा है। अतः कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वास्तिक चिन्ह अंकित करके उसका पूजन किया जाता है।...
ॐ का प्रयोग करना - भारतीय संस्कृति में प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा ॐ का प्रयोग किया जाता था, आज भी ॐ का प्रयोग किया जाता है। ॐ के प्रयोग का हमारे जीवन में क्या महत्व है?...
नमस्कार शब्द नमः+कार दो शब्दों से मिलकर बना है। नमस्कार का आशय है हम संसार के कारक को हमेशा सादर नमन करते हैं क्योंकि हमारी निज कोई सता नहीं है जो कुछ भी इस संसार में ह...
हम मंदिर में कहीं भी जाते हैं तो प्रदक्षिणा जरूर करते हैं। यह प्रदक्षिणा क्यों की जाती है क्योंकि जब हम ईश्वर के आस-पास परिक्रमा करते हैं तो हमारी तरफ ईश्वर (प्रत्यक्षत...
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