Bhartiya Parmapara

उत्सव नीरस जीवन में भरते है रंग | जीवन में उत...

उत्सव का अर्थ है - मंगल कार्य, धूमधाम, त्यौहार, आनंद विहार। व्यक्ति और परिवार के बाद तीसरी प्रमुख इकाई है, समाज। इन तीनों घटकों को समुन्नति और सुविकसित बनाने के लिए, पर्वोत्सव मनाए जाते हैं। उत्सव मनाने से समाज का स्तर ऊँचा होता है। इससे हर्षोल्लास और प्रसन्नता व्यक्त...

रिश्वतखोरी का अभिशाप

रिश्वत या फिर सरल शब्दों में घूस कह लें, इससे तो हर कोई परिचित होगा और यह किसी भी राष्ट्र या अच्छे समाज के लिए एक अभिशाप से कम नहीं हैं। सत्ता, शासन प्रशासन से लेकर हर क्षेत्रक के उच्चाधिकारी चाहे वह संगठित क्षेत्र के हो या असंगठित क्षेत्र के हो लगभग 90 फीसदी रिश्वतखो...

प्रवासी भारतीय ही भारतीय संस्कृति के पहरेदार...

नीदरलैंड देश में भारतीय संस्कृति व हिन्दी भाषा की तेज़ी से पनपती बेल को जानने के लिए हमें थोड़ी सी जान पहचान नीदरलैंड देश की मिट्टी से करनी होगी। नीदरलैंड यूरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तर-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसके दक्षिण में बेल्जियम और पूर्व में जर्...

हिंदी की उपेक्षा अर्थात संस्कृति की उपेक्षा |...

हिंदी हमारी भाषा ही नहीं, अपितु हमारी संस्कृति भी है। विश्व के 155 से अधिक देशों में हिंदी भाषियों की उपस्थिति से यह स्पष्ट है कि हिंदी कितनी लोकप्रिय और समृद्धिशाली भाषा है। हिंदी के नाम से लोग विदेशों में भारत को याद करते हैं और विशेष सम्मान प्रदान करते हैं। हिंदी भ...

श्रावण माह: त्योहारों की शुरुआत

सावन माह सभी सनातनियों के लिये खुशी लेकर आता है। आज तो इस उम्र में उत्साह में अवश्य ही कमी आयी है। अतः बाहर जाना तो हो ही नहीं पाता है लेकिन, बचपन से चालीस पचास उम्र तक की याद करते ही मन खुशी से भर जाता है। हां यह अवश्य ध्यान रखता हूँ कि परिवार के सभी बच्चे हों या बड़...

महिला समानता दिवस | नारी सशक्तिकरण: चुनौतियाँ...

मनुस्मृति के अध्याय ३ में उल्लेखित "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः" [श्लोक ५६] का आशय है "जहां स्त्री जाति का आदर-सम्मान होता है, उनकी  आवश्यकताओं-अपेक्षाओं की पूर्ति होती है, उस स्थान, समाज, तथा परिवार पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं"। इसी प्रकार हमारे...

भारत रत्न गुलजारीलाल नन्दा (Guljarilal Nanda)...

योजना, सिंचाई एवं उर्जा मन्त्रालय के अलावा गृहमंत्री, श्रम एवं रोजगार मन्त्री फिर रेलमंत्री के अलावा न केवल योजना आयोग के अनेक वर्षों तक उपाध्यक्ष रहे बल्कि दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे सिद्धान्तवादी, मितव्ययी भारत रत्न गुलजारी लाल नन्दा जी के १२६वीं जयन्ती...

प्रकृति संरक्षण ही जीवन बीमा है – पेड़ बचाएं,...

आप लोगों में से कितनों ने अपना जीवन बीमा या स्वास्थ्य बीमा करवाया है? और क्या गारंटी है कि वो आपके लिए हितकर होगा। यदि बीमा को भोगने से पहले धरती और पूरे जीव जगत का अस्तित्व समाप्त हो गया तो? मैं एक वाक्य में कहूंगा कि "प्रकृति संरक्षण जीवन बीमा है”। ईश्वर...

वैदिक काल में स्त्रियों का स्थान – समान अधिका...

वैदिक काल प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक कालखंड या एक निश्चित समय काल है। वैदिक काल में ही हमारे वेदों की रचना की गई। वेदों का आधारभूत ढाँचा होने के कारण इसे वैदिक काल कहा गया। वैदिक सभ्यता ही हिंदू सभ्यता है। वैदिक काल की सभ्यता को आर्य काल की सभ्यता भी कहा गया, आर्य...

मेरे पिताजी की साइकिल – आत्मनिर्भरता और सादगी...

मैं उस समय की बात कर रहा हूँ, जब शहर में आवागमन के लिये साइकिल का प्रचलन था। दुपहिया वाहन भी इक्के दुक्के ही थे जबकि चार पहिया वाहन तो ना के बराबर थे। उस समय समाज में आपसी प्रेम भाईचारा खूब था और ईमानदारी व सादगी से लोग जीवन यापन करते थे। फिर भी मेरे पिताजी ने कभी साइ...

जलवायु परिवर्तन और हमारी जिम्मेदारी: अब तो जा...

अगर धरा न होती तो हमारा अस्तित्व ही नहीं होता। अब जब इस पर गहनता से विचारें तो सबसे पहले यह मानना ही पड़ेगा कि जीवन के लिये आवश्यक ऑक्सीजन, पानी व अन्य सभी सामग्रियां यहां सहजता से उपलब्ध है अर्थात इस धरा पर सभी आधारभूत संसाधन सहज उपलब्ध हैं, जबकि अभी तक अन्य ग्रहों प...

कुटुंब को जोड़ते व्रत और त्योहार – भारतीय परं...

इंसानियत के मजबूत तानों बानो से बुनकर बनाई गई गृहस्थी में आने वाले त्योहार एक ऐसे संबल के रूप में नजर आते हैं जिनके नाम पर पूरा परिवार मिलजुल कर अपनी परंपराओं को जीवित कर उत्साह से उन्हें मनाता है। इस दिन लगातार चली आ रही जिंदगी की एकरसता से मुक्ति पा समस्त परिवार आनं...

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