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सृष्टि के आरम्भ में ही भगवान विश्वकर्मा ने अड़सठ तीर्थों और उन्नीस पुण्य - कूपों के सहित सम्भल तीर्थ का निर्माण किया था। सत्ययुग में इसका नाम ‘सत्यव्रत’, त्...
1 जनवरी से प्रतिवर्ष अँग्रेजी नववर्ष प्रारंभ हो जाता है। यह अंग्रेजों के द्वारा हमें दी गयी एक कुप्रथा है, जो हमारी मानसिक दासता का प्रतीक है। यह सत्य है कि विश्व ने इस...
भारतीय संस्कृति में नारी को ‘शक्ति’ कहा गया है। वह सृजन की स्रोत, प्रेम की प्रतीक और संतुलन की संवाहिका है। यदि कहा जाए कि परिवार नामक संस्था की धुरी नारी ह...
युगधर्म के अनुसार त्रेतायुग में श्रीराम का एक अलौकिक अवतार हुआ, जिनके उच्चतम आदर्श और मर्यादित आचरण के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के रूप में मान्यता मिली। हजा...
देश को अँग्रेजों से मुक्ति दिलाने के लिए जिन वीर सपूतों ने अपना बलिदान दिया, उनमें अमर बलिदानी हेमू कालाणी का नाम चिरस्मरणीय है। मात्र 19 वर्ष की आयु में वे बलिदान हो ग...
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पूर्व लगभग 272 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोरखपुर नगर आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। गोरखपुर छठी शताब्दी ईसा पूर्व सोलह महाजनप...
दीपावली भारत का सबसे बड़ा त्यौहार है। यह हमारी अनूठी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह त्यौहार है - अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की विजय और बुराई पर अच्...
तीर्थ का तात्विक तात्पर्य है –
“'तीर्थते अनेन या तरति पापादिक यस्मात” अर्थात जिससे तर जाया जाए या पापमुक्त हुआ जाए। तीर्थ बहुत ही पवित्...
शाकाहार एक जीवन - प्रणाली है, जिसका भारतीय संस्कृति और विज्ञान से गहरा संबंध है। यह निर्विवाद है कि आध्यात्मिक, नैतिक, आर्थिक, अहिंसा, प्रकृति, योग, पाचन-क्रिया एवं पर्...
वैदिक सनातन संस्कृति एक ऐसा विशाल वट वृक्ष है, जिसकी शाखाओं - प्रशाखाओं के रूप में संस्कृति के विभिन्न रंगों की झलक मिलती है। इसमें विभिन्न पर्वों का महत्व, ज्ञान-विज्ञ...
नारी को सम्मान, सृजन और शक्ति का प्रतीक माना गया है। हमारे धर्मग्रंथों में नारी शक्ति की महिमा गाई गई है। महिला शब्द में ही ममता, मृदुलता, मानवता और मातृत्व का समावेश ह...
भारत में वर्षभर में छह ऋतुएँ होती हैं। आपको नाम नहीं मालूम, चलो बता देता हूँ- ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर, हेमंत और वसंत। इस क्रम में मैं भले ही अंत में आता हूँ किंतु हम...