खिचड़ी पुराण - मकर संक्रांति के अवसर पर
14 जनवरी मकर संक्रांति के दिवस हुए स्वागत से मैं अभी तक अभिभूत हूँ। "अतिथि देवो भव" की परम्परा का पालन करते हुए प्रत्येक घर में मेरे स्वागत की तैयारियाँ थी। उनका स्वागत देख कर ऐसा लगा जैसे मेरे आने की उन्हें लम्बे समय से प्रतीक्षा थी। सभी ने बड़े प्रेम से मेरा स्वागत किया और मेरे गुणगान करते हुए सेवन किया। अपने मित्रों से भी मेरी मुलाकात हुई, मटर बहन, चाचा टमाटर, तथा कोथ-वीर सिंह से, जब तक पके नहीं तब तक आपस में बैठकर अपना सुख दुख बाँटते रहें, मुझे लगा एक मित्र मेरा और मिल जाता मगर उसे लेट आने की आदत पड़ गई है, क्योंकि उसे महसूस होता है मेरे बिना काम नहीं चलेगा, जी हाँ मैं जीरे चन्द्र की बात कर रहा हूँ। जीरे चन्द्र आये, वही अकड़ वही शान वही शौकत, क्योंकि मेरा मित्र सदा उनके साथ रहता है। वह है घृतचन्द्र, उसकी सुगंध कि उसकी अकड़ का कारण है। आया हेलो हाय की और अपने स्थान पतीले में चला गया। मुझे ऐसा लगा जैसे हमारा संयुक्त परिवार टूटने के कगार पर है, लोग अब मेरे मित्रों से ज्यादा लगाव नहीं रखते। खैर कोई बात नहीं जब परिवार बढ़ता है तो यह समस्याएं आती ही है।
हमें याद आया कानपुर का गंगा किनारा जहाँ मिट्टी की हॉडी में कंडों की आग में धीरे-धीरे लोग पकाते हैं। धीरे-धीरे पकाने कारण मुझे ज्यादा कष्ट भी नहीं होता और मैं सेवन करने वाले को प्रसन्न कर देती हूँ तथा अपने दोस्तों से अच्छी तरह से घुलमिल जाती हूँ। हम लोग फिर अलग-अलग शरीर एकआत्मा वाली बात नहीं रहती हम सब एक आत्मा ही बन जाते।
मैं अपने को सौभाग्यशाली मानती थी, इस दिन महीनों से बंधन में रखी गई बिचारी बुलबुल मेरा सेवन कराकर स्वतंत्र छोड़ दी जाती है। सुनो भाइयों तथा बहनों मुझे पकाना भी एक कला है जो हर व्यक्ति नहीं जानता। मैं और मेरे दोस्त चावल को मिलाकर कुकर में डालकर सीटियां लगा दी। लो मैं हो गई तैयार। मगर जरा सोचो जिसकी संस्कृति घुलमिल जाने की है इतनी जल्दी कैसे घुलमिल सकती है। जब मैं लोगों के सामने सेवन के लिए जाती हूँ, ताने सहती हूँ। यह कोई खिचड़ी है दाल अलग पानी अलग चावल अलग सब अपने-अपने रास्ते पर जा रहे हैं। मगर ऐसे जल्द बाजो को मैं कैसे समझाऊं। लोगों ने कुछ ज्यादा सुनाया था मथानी ली और कुकर में चला दी लो घुट गई खिचड़ी। मैं वर्तमान समय की डिश तो हूं नहीं जिसे मास्टर शेफ ने बनाया हो , ईजाद किया हो। मेरा इतिहास सुनोगे तो चौंक जाओगे, मैं करीब ढाई हजार वर्ष से भारत में रहती हूँ। कई युग तथा दशक बीत गए, मैं अपना अस्तित्व बचा के रखे हूँ। मुझे सर्वप्रथम "संत गोरखनाथ जी" ने भूखे के भक्तों को खिलाने के लिए मुझे बनाया था। आज भी उस स्थान पर खिचड़ी का मेला लगता है। उन्हीं की कृपा से मैं धन्य हो गई।
देश में ही नहीं विदेश में रहने वाले लोग भी मेरे स्वाद का गुणगान करते हैं। ग्रीक राजदूत सेल्यूकस ने लिखा हिंदुस्तान में चावल और दाल का मेल बहुत पसन्द किया जाता है। सन 1950 में भारत आए मोरक्को के सैलानी इब्नबतूता मेरी तथा मेरी सहयोगी के स्वाद की प्रशंसा की थी। रूसी यात्री ने भी मेरे स्वाद का गुणगान किया था। मुगलकालीन समय में भी मेरे नाम और मेरे स्वाद की प्रसिद्धि थी। आप लोगों को जानकारी है ही सम्राट अकबर के नवरत्न थे। उनमें बीरबल उन्हें ज्यादा पसंद थे, कारण बीरबल मुझे बनाने के विशेषज्ञ थे और सम्राट अकबर को मैं बहुत पसंद थी, क्योंकि पाक-कला भी है एक कला जितना ज्यादा समय लगता है उतनी ज्यादा सुंदर होती। अकबर के पुत्र जहांगीर सम्राट भी मेरे स्वाद के कायल थे। अकबर के सलाहकार अब्दुल खान-खाना मुझे विभिन्न प्रकार से बनाते थे उन्होंने मुझे आईने अकबरी में मुझे स्वादिष्ट बनाने की विधि तथा सात प्रकार लिखे हैं।
अब तो आप सभी लोगों को मेरी विशेषताएं तथा मेरी महत्ता का ज्ञान हो गया होगा। मैं विशिष्ट तथा ऐतिहासिक व्यंजन मास्टर शेफ को मुझे अब व्यंजनों में शामिल करना पड़ेगा। मेरी ऐतिहासिकता का परिचय देने वाले लखनऊ नवाब का एक हिस्सा सुनाती हूँ। एक नवाब थे बिल्कुल सीकियाँ पहलवान उन्होंने एक बावर्ची रखा था जो 5 सेर घी में एक पाव मुझे बनाता था। ताकि नवाब असली पहलवान बन जाए। आपको एक गोपनीय बात और बताता हूं इस बावर्ची की तनख्वाह उस समय 1000 अशरफीयाँ थी। मेरी विशेषता है- “मैं सभी धर्मों का आदर करती हूं, धर्म के प्रति मेरी आस्था रहती है।“
मैं कितनी सौभाग्यशाली हूं भगवान जगन्नाथ का विशिष्ट प्रसाद मैं ही हूँ। मेरा स्वाद लेने से पहले जरा सावधान शनिवार को मेरा स्वाद मत लेना कहा जाता है, शनि महाराज नाराज हो जाते हैं। शेष दिनों में मेरी सखी सहेलियों के साथ आप मेरे स्वाद का आनंद ले। मेरी सखियां, अचार, पापड़, दही और घी मेरा इंतजार करती ही रहती हैं।

Login to Leave Comment
LoginNo Comments Found
संबंधित आलेख
पूर्णिमा का महत्व | पूर्णिमा व्रत
सप्ताह के किस दिन करें कौन से भगवान की पूजा | सात वार का महत्व
महा मृत्युंजय मंत्र का अर्थ, उत्पत्ति और महत्व | महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय रखें इन बातों का ध्यान | Maha Mrityunjaya Mantra
हिंदी भाषा से जुड़े रोचक तथ्य
मंदिर शब्द की उत्पत्ति कब हुई | मंदिर का निर्माण कब से शुरू हुआ?
तुलसी जी कौन थी? कैसे बनी तुलसी पौधे के रूप में ? | तुलसी विवाह
हिंदी वर्णमाला की संपूर्ण जानकारी | हिंदी वर्णमाला
अच्युत, अनंत और गोविंद महिमा
निष्कामता
हर दिन महिला दिन | Women's Day
33 कोटि देवी देवता
हिंदू संस्कृति के 16 संस्कार
हिंदी दिवस
शिक्षक दिवस
राखी
बचपन की सीख | बच्चों को लौटा दो बचपन
बात प्रेम की
महामाया मंदिर रतनपुर | संभावनाओ का प्रदेश - छत्तीसगढ़ | मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का ननिहाल
माँ बमलेश्वरी मंदिर | संभावनाओ का प्रदेश - छत्तीसगढ़
माँ चंद्रहासिनी मंदिर | संभावनाओ का प्रदेश - छत्तीसगढ़
खल्लारी माता मंदिर | संभावनाओ का प्रदेश - छत्तीसगढ़
भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहते थे | भारत देश
विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस | World Menstrual Hygiene Day
ज्योतिष शास्त्र | शनि न्याय प्रिय ग्रह क्यों है ?
वास्तु शास्त्र | वास्तुशास्त्र का उदगम
वास्तुशास्त्र में पूजा कक्ष का महत्व
पंचवटी वाटिका | पंचवटी का महत्व स्कंद पुराण में वर्णित
कृतज्ञता: मानसिक सेहत, रिश्तों और सकारात्मक जीवन का आधार
ज्योतिष की विभिन्न विधाये और राजा सवाई जयसिंह (जयपुर) का योगदान
संस्कारों की प्यारी महक
मिच्छामि दुक्कडम्
सत्संग बड़ा है या तप
ब्रह्मांड के स्वामी शिव
बलिदानी - स्वतंत्रता के नायक
महामृत्युंजय मंत्र | महामृत्युंजय मंत्र जाप
राम राज्य की सोच
भारतीय वैदिक ज्योतिष का संक्षिप्त परिचय
भारतीय वैदिक ज्योतिष का प्रचलन
मैच बनाने की मूल बातें (विवाह और ज्योतिष)
कुंडली मिलान | विवाह के लिए गुण मिलान क्यों महत्वपूर्ण है?
कुंडली चार्ट में घरों की बुनियादी समझ
सनातन संस्कृति में व्रत और त्योहारों के तथ्य
सनातन संस्कृति में उपवास एवं व्रत का वैज्ञानिक एवं धार्मिक पक्ष
2 जून की रोटी: संघर्ष और जीविका की कहानी
प्रकृति की देन - पौधों में मौजूद है औषधीय गुण
प्री वेडिंग – एक फिज़ूलखर्च
दो जून की रोटी
गणेश जी की आरती
भारतीय परम्परा की प्रथम वर्षगांठ
नव वर्ष
नहीं कर अभिमान रे बंदे
आज का सबक - भारतीय परंपरा
चाहत बस इतनी सी
नारी और समाज
माँ तू ऐसी क्यों हैं...?
दर्द - भावनात्मक रूप
पुरुष - पितृ दिवस
मितव्ययता का मतलब कंजूसी नहीं
सावन गीत
आया सावन
गुरु पूर्णिमा - गुरु की महिमा
सार्वजानिक गणेशोत्सव के प्रणेता लोकमान्य तिलक
शास्त्रीजी की जिन्दगी से हमें बहुत कुछ सीखने मिलता है | लाल बहादुर जयंती
कन्याओं को पूजन से अधिक सुरक्षा की जरूरत है ...!
जीवन में सत्संग बहुत जरूरी है
धर्म - धारण करना
आलस्य (Laziness)
प्रतिष्ठित शिक्षक - प्रेरक प्रसंग
राष्ट्र का सजग प्रहरी और मार्गदृष्टा है, शिक्षक
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है?
संस्कृति का उद्गम संस्कृत दिवस | Culture origin in Sanskrit Day
75 बरस की आजादी का अमृत महोत्सव और हम
एक पाती शिक्षक के नाम – शिक्षक की भूमिका और मूल्य आधारित शिक्षा
बच्चों को लौटा दो बचपन – आधुनिक पालन-पोषण पर एक प्रेरक विचार
रामबोला से कालिदास बनने की प्रेरक कथा – भारत के महान कवि की जीवनी
त्रिदेवमय स्वरूप भगवान दत्तात्रेय
गणतंत्र दिवस – 26 जनवरी का इतिहास, महत्व और समारोह
बीते तीन साल बहुत कुछ सीखा गया | 2020 से 2022 तक की सीखी गई सीखें | महामारी के बाद का जीवन
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं | कोविड से बचाव के लिए मजबूत इम्यूनिटी
वैदिक काल की विदुषी : गार्गी और मैत्रेयी
वर्तमान दौर में बदलता प्रेम का स्वरूप – एक विचारणीय लेख
जल संरक्षण आवश्यक है – पानी बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं
कुटुंब को जोड़ते व्रत और त्योहार – भारतीय परंपराओं का उत्सव
मेरे गाँव की परिकल्पना – विकास और विनाश पर एक काव्यात्मक चिंतन
जलवायु परिवर्तन और हमारी जिम्मेदारी: अब तो जागो
राजा राममोहन राय - आधुनिक भारत के जनक | भारत के महान समाज सुधारक
भविष्य अपना क्या है? | तकनीक और मोबाइल लत का युवाओं पर असर
प्रकृति संरक्षण ही जीवन बीमा है – पेड़ बचाएं, पृथ्वी बचाएं
वैदिक काल में स्त्रियों का स्थान – समान अधिकार और आध्यात्मिक ज्ञान
मेरे पिताजी की साइकिल – आत्मनिर्भरता और सादगी पर प्रेरक लेख
भारत रत्न गुलजारीलाल नन्दा (Guljarilal Nanda) – सिद्धांत, त्याग और ईमानदारी का प्रतीक
डिजिटल उपवास – बच्चों के लिए क्यों ज़रूरी है?
नववर्ष संकल्प से सिद्धि | सकारात्मक सोच, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति
पीपल की पूजा | भारतीय परंपरा में पीपल पूजा का वैज्ञानिक आधार
जीवन में सत्य, धन और आत्मनियंत्रण की प्रेरणा
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में इसका महत्व
महिला समानता दिवस | नारी सशक्तिकरण: चुनौतियाँ, प्रगति और भविष्य
मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए दिनचर्या का महत्व
हिंदी की उपेक्षा अर्थात संस्कृति की उपेक्षा | हिंदी : हमारी भाषा, संस्कृति और शक्ति
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता
श्रावण माह: त्योहारों की शुरुआत
रिश्वतखोरी का अभिशाप
भारतीय संस्कृति की पहचान
प्रवासी भारतीय ही भारतीय संस्कृति के पहरेदार | नीदरलैंड में भारतीय संस्कृति का उजागर
वेदों की अमूल्य सूक्तियाँ – जानिए 80 अनमोल वैदिक रत्न
उत्सव नीरस जीवन में भरते है रंग | जीवन में उत्सवों का महत्व
सूर्य को जल अर्पण करना | सूर्य नमस्कार
विकसित सोच: सफलता की असली कुंजी
राम – सत्य और धर्म का सार
रावण की हड़ताल: दशहरा विशेष व्यंग्य
नथ का वजन – एक परंपरा का अंत
दुविधा – अनुभव और अस्वीकार्यता के बीच की दूरी
घर की लक्ष्मी हैं गृहणियाँ
आत्मकथा वसंत की | वसंत ऋतु
परीक्षा से डर कैसा
गाय और इस्लाम: विश्वास, नियम और सम्मान
भारतीय नववर्ष बनाम अंग्रेजी नववर्ष
श्रीराम - धर्म के मूर्तिमान स्वरूप
नदियों को बचाएं – जीवन और संस्कृति की रक्षा करें
भगवान श्रीराम के उच्चतम आदर्श
सनातन धर्म और अंधविश्वास का सच
विज्ञान दिवस और हमारे वैज्ञानिक
जीवन का असली उद्देश्य – सेवा, प्रेम और सद्भावना से जीवन जीना
चलते रहने का महत्व – कर्म, धैर्य और सकारात्मक सोच की ताकत
घोड़े पर योद्धा की मूर्तियों के संकेत: मुद्रा क्या दर्शाती है?
मानसिक शांति के लिए क्यों ज़रूरी है एक अच्छी दिनचर्या?
आलस्य और डर से बाहर निकलें: मानसिकता में बदलाव
क्या वास्तव में “बी प्रैक्टिकल” होना ज़रूरी है?
अपराध नियंत्रण में संस्कारों की भूमिका और सामाजिक सुधार
विनम्रता: व्यक्तित्व को निखारने वाला सबसे सुंदर मानवीय गुण
दीपोत्सव: भारतीय व्यापार, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा
राम से बड़ा राम का नाम
सफलता का फार्मूला: अभ्यास और जीवन मूल्य
पर्यावरण संकट बढ़ रहा है—अब बदलाव हमारी ज़िम्मेदारी है
अन्न का दुरुपयोग – दिखावे की संस्कृति में बर्बादी
किशोरों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियाँ
अयोध्या राम मंदिर का इतिहास और निर्माण
पहलगाम हमला: जब इंसानियत को धर्म से तोला गया
श्रम बिकता है, बोलो... खरीदोगे?
जीवन में सफलता के लिए धैर्य का महत्व
अहंकार का अंधकार | व्यक्तित्व और समाज पर प्रभाव
चलिष्याम निरंतर | जोखिम, परिवर्तन और सफलता का संबंध
रामायण महाभारत के युद्ध बनाम आधुनिक युद्ध
सच कहने का साहस है.. सलीका है कविता
सामाजिक संकट एवं सांस्कृतिक अवसाद की ओर बढ़ते भारतीय परिवार
चातुर्मास - सनातनी विज्ञान | पाँच तत्व, विज्ञान और परंपरा
मानवीय सद्गुण की आज बड़ी जरूरत | विनम्रता की शक्ति
जीवन में निर्णय का महत्व
तुलसीदास की दृष्टि में नारी शक्ति, प्रकृति, अग्नि और काल का दर्शन
प्रदूषण और निजी वाहनों का बढ़ता प्रभाव
सरकारी नियंत्रण से मन्दिरों को मुक्त करें – एक सनातनी पुकार
खिचड़ी: ढाई हजार साल पुराना भारतीय व्यंजन, स्वाद, परंपरा और इतिहास के साथ
भारत के शहरी क्षेत्रों में वाहन पार्किंग की चुनौतियाँ और समाधान
सहनशीलता का गिरता स्तर और समाज पर इसके हानिकारक प्रभाव | धैर्य और क्षमा का महत्व
कुंबकोणम के शक्ति मुत्तम मंदिर और गरीब पंडित की बगुला संदेश की कहानी
क्या हमारे कार्य करने की कोई सीमा होती है?
कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलें और अपनी असली क्षमता पहचानें
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – नारी शक्ति को सलाम
शब्द ही ब्रह्म है क्योंकि शब्दों से ही इस त्रिगुणात्मक संसार का सृजन संभव है
आंतरिक और बाहरी दुनिया — ध्यान से आत्म नियंत्रण की शक्ति
हेमू कालाणी – भारत के युवा स्वतंत्रता सेनानी
वीर बाल दिवस 26 दिसंबर | साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह की अमर शहादत
लेखक के अन्य आलेख
होली की भाई दूज – भाई-बहन के प्रेम का अमर पर्व
खिचड़ी: ढाई हजार साल पुराना भारतीय व्यंजन, स्वाद, परंपरा और इतिहास के साथ
भोले बाबा का बटेश्वर धाम – जहां यमुना उल्टी बहती है और 108 शिव मंदिर हैं
उड़द दाल की मीठी बूंदी कैसे बनाएं | स्वादिष्ट भारतीय मिठाई
Bhai Dooj (Yama Dwitiya): Festival of Sibling Love, Tradition, and Rituals
भाई दूज (यम द्वितीया): भाई-बहन के प्रेम, परंपरा और पूजा विधि का पर्व
शरद पूर्णिमा पूजा
विवाह संस्कार – भारतीय संस्कृति में विवाह का महत्व, परंपराएँ और नियम
वैदिक काल में स्त्रियों का स्थान – समान अधिकार और आध्यात्मिक ज्ञान
अक्षय तृतीया: महत्व, पूजा विधि, कथा और शुभ संयोग | Akshaya Tritiya
रंगारंग होली के गीत – रसिया और परंपरागत धुनों का उत्सव
वैदिक काल की विदुषी : गार्गी और मैत्रेयी
संकट चौथ व्रत – महत्व, कथा और पूजन विधि
सफला एकादशी व्रत: शुभता और सिद्धि का पर्व | Saphala Ekadashi
देवोत्थान एकादशी – एक शुभ आरंभ का दिन
दीपावली का प्रारंभ दिवस - धनतेरस
हमारे लोक पर्व - सांझी माता या चंदा तरैया
हरतालिका तीज
वट सावित्री व्रत
सनातन संस्कृति में व्रत और त्योहारों के तथ्य
विवाह संस्कार की उत्पत्ति प्रकार नियम एवं रिवाजें
स्वास्तिक | स्वास्तिक का उपयोग
कजली तीज