Bhartiya Parmapara
बच्चे सीखें भगवान श्रीराम के जीवनादर्श | रामायण से नैतिक शिक्षा

बच्चे सीखें भगवान श्रीराम के जीवनादर्श | रामायण से नैतिक शिक्षा

वर्तमान में भारत सहित समस्त विश्व चारित्रिक दुर्बलता की व्याधि से पीड़ित है। आए दिन समाचार-पत्रों में वीभत्स दुर्घटनाओं के समाचार भरे रहते हैं। इन कुप्रभावों से बच्चे भ...

किशोरों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियाँ

किशोरों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियाँ

किशोरावस्था शैशव तथा बाल्यकाल के उपरांत आती है। यह 13 से 19 वर्ष तक की आयु तक का काल है। किशोरावस्था में बालक के शरीर और व्यवहार में तूफान गति से परिवर्तन होते हैं। उसम...

हिमाचल की बहुभाषी संस्कृति | हिमाचल प्रदेश

हिमाचल की बहुभाषी संस्कृति | हिमाचल प्रदेश

हिमाचल शब्द दो शब्दों - हिम और अचल से मिलकर बना है, हिम का अर्थ बर्फ और अचल का अर्थ है पर्वत। अतः बर्फ के पर्वत को हिमाचल कहा जाता है। हिमाचल संज्ञा सार्थक भी है क्योंक...

भारतीय नववर्ष बनाम अंग्रेजी नववर्ष

भारतीय नववर्ष बनाम अंग्रेजी नववर्ष

1 जनवरी से प्रतिवर्ष अँग्रेजी नववर्ष  प्रारंभ हो जाता है। यह अंग्रेजों के द्वारा हमें दी गयी एक कुप्रथा है, जो हमारी मानसिक दासता का प्रतीक है। यह सत्य है कि विश्व...

श्रीराम - धर्म के मूर्तिमान स्वरूप

श्रीराम - धर्म के मूर्तिमान स्वरूप

धर्म' भारतीय संस्कृति का एक संकेत - शब्द है। धर्म मनुष्य को पूर्ण बनाता है, व्यक्ति को उन्नत बनाता है, जीवन के समस्त अंगों का समन्वय करना सिखाता है और सभी के...

नदियों को बचाएं – जीवन और संस्कृति की रक्षा करें

नदियों को बचाएं – जीवन और संस्कृति की रक्षा करें

मानव सभ्यता का विकास नदियों के तट पर हुआ। नदियों को मानव ने जल स्रोत और जीवनोपयोगी साधन जुटाने का माध्यम बनाया। सिंधु घाटी की सभ्यता, नील नदी घाटी सभ्यता से लेकर अद्यतन...

उत्सव नीरस जीवन में भरते है रंग | जीवन में उत्सवों का महत्व

उत्सव नीरस जीवन में भरते है रंग | जीवन में उत्सवों का महत्व

उत्सव का अर्थ है - मंगल कार्य, धूमधाम, त्यौहार, आनंद विहार। व्यक्ति और परिवार के बाद तीसरी प्रमुख इकाई है, समाज। इन तीनों घटकों को समुन्नति और सुविकसित बनाने के लिए, पर...

शिखा का वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व

शिखा का वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व

सनातन हिंदू धर्म में पुरुषों द्वारा सिर पर शिखा अर्थात चोटी रखने का विधान है।शिखा को हिंदुओं के एक सम्मानित प्रतीक चिह्न के रूप में मान्यता प्राप्त है। आज उनके सिर...

हिंदी की उपेक्षा अर्थात संस्कृति की उपेक्षा | हिंदी : हमारी भाषा, संस्कृति और शक्ति

हिंदी की उपेक्षा अर्थात संस्कृति की उपेक्षा | हिंदी : हमारी भाषा, संस्कृति और शक्ति

हिंदी हमारी भाषा ही नहीं, अपितु हमारी संस्कृति भी है। विश्व के 155 से अधिक देशों में हिंदी भाषियों की उपस्थिति से यह स्पष्ट है कि हिंदी कितनी लोकप्रिय और समृद्धिशाली भा...

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