तीर्थाटन में पुण्य लाभ के साथ अवसरों का सृजन
तीर्थ का तात्विक तात्पर्य है –
“'तीर्थते अनेन या तरति पापादिक यस्मात” अर्थात जिससे तर जाया जाए या पापमुक्त हुआ जाए। तीर्थ बहुत ही पवित्र दृष्टि से देखे जाते हैं। वहाँ जाने से लोग अपना सौभाग्य समझते हैं और गौरव की अनुभूति करते हैं। उन्हें लगता है कि कई जन्मों के संचित पुण्य के फलस्वरूप ही उन्हें तीर्थ जाने, रुकने, दिव्य प्रतिमाओं के दर्शन एवं पवित्र नदियों - सरोवरों में स्नान आदि करने का लाभ मिला है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा भी है -
तीरथ अमिट कोटि सम पावन।
नाम अखिल अघ पूग नसावन।
तीर्थाटन से अंतःशुद्धि होकर लोग शांतचित्त ब्रह्मनिष्ठ बन जाते हैं। उनके हृदय में अघनाशक भगवान का वास होता है। वे परमगति मोक्ष को प्राप्त होते हैं। पवित्र नदी, सरोवर, मंदिर, देवस्थान आदि तीर्थ रूप में सम्मान्य होते हैं। वहाँ धार्मिक कृत्य होते रहने से वातावरण पवित्र और सात्विक हो जाता है।
आधुनिक भारत कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात, राजस्थान से अरुणांचल असम तक फैला हुआ है। यहाँ अनेक तीर्थस्थल विद्यमान हैं, जिसमें गोला गोकर्णनाथ, नैमिषारण्य,चित्रकूट, ऋषिकेश, प्रयागराज, काशी, अयोध्या, मथुरा, रामेश्वरम, अमरनाथ, वैष्णो देवी, कैलाश मानसरोवर, चारों धाम, सात ज्योतिर्लिंग, शुक्र तीर्थ, गंगासागर, द्वारका, बौद्ध गया आदि हैं। गंगा के तट पर यदि हजारों - लाखों तीर्थ हैं, तो नर्मदा के तट पर उससे कई गुना अधिक तीर्थ हैं।
भारत भौगोलिक रूप से कई सुंदर, पवित्र किंतु दुर्गम तीर्थ स्थलों का गंतव्य है। यहाँ पहाड़, पठार, नदियाँ, समुद्र के तट हैं। कहीं-कहीं घने जंगल और वन्य जीव आश्रय स्थल भी हैं। ग्रीष्म ऋतु में पहाड़ और शीत ऋतु में समुद्र तट तथा द्वीपीय प्रदेश यात्रा के लिए उपयुक्त हैं।
तीर्थाटन का हिंदू संस्कृति और हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मनुष्य अपने जीवन में भारत के सभी तीर्थों के दर्शन करके जीवन को सफल बनाना चाहता है। अस्तु, तीर्थयात्रा मानव जीवन का श्रेष्ठ कर्म और धर्म है।
तीर्थाटन और पर्यटन में अंतर -
तीर्थाटन में पर्यटन समाहित है किंतु दोनों के भावों में सूक्ष्म अंतर है। पर्यटन में केवल व्यक्तिगत मौज मस्ती, कहीं आनंद के लिए जाना, होटलों में सुख-सुविधाएं प्राप्त करना, सैर-सपाटा करना आदि है, किंतु तीर्थाटन में व्यक्ति कष्ट सहकर भी तीर्थों का भ्रमण करता है। कुंभ मेले में करोड़ों लोग नदियों में पवित्र स्नान तथा पूजा-पाठ के लिए दूर-दूर से जाते हैं, सोमवती अमावस्या जैसे पर्वों पर नदियों में लोग स्नान करते हैं, वहाँ श्रद्धा भाव से सारे अनुष्ठान बिना किसी व्यवधान के सम्पन्न हो जाते हैं। अतः पर्यटन कभी भी तीर्थयात्रा का अंग नहीं बन सकता। हाँ, तीर्थाटन से पर्यटन का आनंद उठाया जा सकता है। तीर्थयात्रा को धार्मिक पर्यटन भी कह सकते हैं।
कुछ दशकों पूर्व घूमना-फिरना केवल उच्च वर्ग के वश की बात मानी जाती थी, किंतु जैसे-जैसे आर्थिक उन्नति हुई, तो समाज ने आवश्यकताओं से ऊपर उठकर यातायात की बढ़ती सुविधाओं का उपभोग करना प्रारंभ कर दिया। फिर चाहे वह तीर्थाटन हो या पर्यटन, यात्रा करने का कोई विशेष समय निश्चित नहीं रहा। महानगरीय जीवन शैली में तो लगभग हर सप्ताहांत में यात्रा या पर्यटन की योजना बन जाती है। लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ आसपास के किसी क्षेत्र में घूमने के लिए निकल जाते हैं। समाज में तेजी से विकसित होती संस्कृति ने सरकारों और पर्यटन व्यवसायियों को विश्व स्तर पर विभिन्न आस्थाओं के श्रद्धालुओं से लाभ कमाने के लिए 'तीर्थ यात्रिक पर्यटन' (पिलग्रिमेज टूरिज्म) पर जोर दिया है। इसको धार्मिक पर्यटन भी कह सकते हैं। अतः तीर्थ यात्रियों को पर्यटक रूप में ढालना इस व्यवसाय की रणनीति होती है।
तीर्थ- स्थलों के प्राकृतिक संसाधन आधार पर बढ़ती भीड़ का क्या प्रभाव होगा, इसकी चिंता पर्यटन व्यवसायियों और सरकारों को सताती रहती है। कस्बाई तीर्थस्थलों की सीमित ढांचागत संरचना तथा प्राकृतिक संसाधन आधार अपनी स्थायी आबादी से कई गुणा भीड़ की आवश्यकताओं के बोझ से चरमरा जाते हैं। फलतः स्थानीय पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी को नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। जल संसाधनों को तीर्थयात्रियों की भीड़ में प्रदूषण मुक्त रखना तीर्थस्थलों की एक प्रमुख समस्या है, जो बिना सरकारी हस्तक्षेप और पर्यटन व्यवसायियों के तालमेल के दूर नहीं की जा सकती है।
संभावनाओं के द्वार खोलता धार्मिक पर्यटन -
भारत जैसे विविधताओं वाले देश में पर्यटन उद्योग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। यहाँ की संस्कृति, संगीत, हस्तकला, खानपान से लेकर नैसर्गिक सुंदरता तथा पावनता देशी - विदेशी सभी पर्यटकों को आकर्षित करती है। इससे शहरों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हैं। वैश्विक स्तर पर पर्यटन एक बड़ा उद्योग है। यह कई क्षेत्रों में अवसर सृजित करता है। पर्यटन के निरंतर विस्तार के साथ ही होटल एवं रेस्टोरेंट, विमानन, रेल, वाहन, मनोरंजन, हस्तशिल्प जैसे उद्योगों को भी बहुत लाभ पहुंचता है।
अनुभव के आधार पर शोध दर्शाते हैं कि चार यात्री एक व्यक्ति को रोजगार प्रदान करते हैं । इसकी एक और विशेषता यह भी है कि इससे महिलाओं के लिए भी रोजगार के अनेक अवसरों की खिड़की खुलती है।
धार्मिक पर्यटन प्रदेश के विकास में किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसे अयोध्या में भव्य-नव्य श्रीराम मंदिर के साथ - साथ वहाँ हो रही चतुर्दिक प्रगति से समझा जा सकता है। यहाँ प्रतिदिन दो लाख श्रद्धालु आ रहे हैं, इससे स्थानीय जनजीवन की आर्थिक प्रगति के साथ छोटे-बड़े सभी व्यवसायियों को भी लाभ हो रहा है।
प्रसाद, फूल-माला एवं अन्य पूजा सामग्री विक्रेताओं, पुजारियों, टेम्पो, ई-रिक्शा चालकों, होटल, रेस्टोरेंट, फोटो, मॉडल एवं मूर्ति विक्रेता, हस्तशिल्प, धार्मिक पुस्तकों आदि कारोबार से जुड़े लोगों की आय में कई गुणा की वृद्धि हुई है।
विकल्प हैं कई -
डिजिटलीकरण ने पेशेवरों के लिए पर्यटन उद्योग में नौकरी की नई भूमिका और अवसर विकसित कर दिए हैं। यहाँ इवेंट स्पेशलिस्ट एक उभरता करियर है। इसमें अलग-अलग थीम का निर्धारण, उचित स्थान का चयन एवं लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन जैसे कार्य सम्मिलित हैं।
पर्यटन के इस क्षेत्र में ट्रैवल कंसलटेंट, टूरिज्म मैनेजर, रिलेशनशिप मैनेजर, इनबाउंड, टूर मैनेजर, सेल्स मैनेजर, ट्रैवल काउंसलर,इंटरप्रेटर, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, एयरलाइन ग्राउंड स्टाफ, आपरेशंस मैनेजर, ट्रैवल बुकिंग एग्जीक्यूटिव आदि की पर्याप्त मांग रहती है। युवा ट्रैवल एजेंट, टूर गाइड एवं गेस्ट रिलेशन ऑफिसर के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। ट्रैवल एजेंट जहाँ यात्रियों को किसी भी गंतव्य का विशेष व श्रेष्ठ अनुभव करने में सहायता करते हैं, वहीं टूर गाइड उनके संग विभिन्न स्थलों के दर्शन कराते है, और सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहा-
-हासिक विरासत, स्थानीय रीति-रिवाजों से परिचय कराते हैं। इन दिनों इस क्षेत्र में नई व्यवस्थाएं विकसित हुई है, जिसके अंतर्गत भोजन एवं भ्रमण के अतिरिक्त होम डाइनिंग की लोकप्रियता बढ़ी है। इसमें भी रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं। इसके अतिरिक्त फोटोग्राफी. वीडियोग्राफी, ट्रैवल ब्लॉगर, टूर ऑपरेटर, ट्रैवल राइटर, ट्रैवल जर्नलिस्ट, अपना रेस्तरां, कॉटेज या होम स्टे के रूप में यात्रियों को सेवाएं दे सकते हैं। आज पात्र युवाओं के पास सरकारी और निजी, दोनों ही क्षेत्रों में करियर के श्रेष्ठ विकल्प उपलब्ध हैं।
आज जब देश में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है और वे यात्राओं में रुचि लेकर उस पर व्यय कर रहे हैं, तो इससे पर्यटन क्षेत्र में नए विकल्पों के साथ अवसर भी बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में योग्यता एवं कुशलता रखने वाले युवाओं के लिए आगे बढ़ने के अवसर हैं। फिर वे कलाकार, शेफ, इंजीनियर, एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाले, वेलनेस एक्सपर्ट आदि छोटे स्तर पर नई शुरुआत करके स्वयं का व्यवसाय आरंभ कर सकते हैं।
इस क्षेत्र में प्रारंभिक स्तर पर लगभग तीन लाख रुपये वार्षिक और अनुभव होने के बाद पाँच से सात लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित कर सकते हैं।
यहाँ यह भी बताना आवश्यक है कि आज की मांग को देखते हुए, आप अपने किसी भी व्यवसाय को सोशल मीडिया के साथ अवश्य जोड़ें। सोशल मीडिया आपके व्यवसाय के प्रचार का सशक्त माध्यम बन चुका है। इसलिए अपने व्यवसाय से जुड़े पेज बनाएं और उनको समय-समय पर अद्यतन अवश्य करें।
कोर्स एवं शैक्षिक योग्यता -
पर्यटन के क्षेत्र में किसी भी स्ट्रीम में युवा अपना करियर शुरू कर सकते हैं। आज देश के प्रतिष्ठित कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में ट्रेवल एवं टूरिज्म से संबंधित कई कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इनमें ट्रैवल एवं टूरिज्म मैनेजमेंट, हॉस्पिटैलिटी एवं ट्रैवल मैनेजमेंट, एयर ट्रैवल मैनेजमेंट आदि कोर्स कराए जा रहे हैं। ट्रैवल एवं टूरिज्म में बीबीए और एमबीए भी कर सकते हैं। यदि युवा विभिन्न देशों की संस्कृति एवं भाषा सीखने में रुचि रखते हैं, तो निश्चित रूप से यह क्षेत्र उनके करियर के लिए श्रेष्ठ विकल्प सिद्ध हो सकता है। इसके लिए आवश्यक कौशल और पात्रताएं सर्वथा अपेक्षित हैं।
अनुसंधान और प्रबंधन कौशल को विकसित करने के लिए शीर्ष कंपनियों में इंटर्नशिप के लिए आवेदन करना चाहिए। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति लिंक्डइन, इंडीड और इंटर्नशाला जैसे प्लेटफार्म से आवेदन कर सकते हैं।
'अतुल्य भारत' और 'अतिथि देवो भव' जैसे उद्घोषों को व्यापक योजनाओं के साथ सफल बनाने के लिए भारत के धार्मिक पर्यटन - स्थलों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास आवश्यक है। विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आवक एक अच्छा संकेत है।
व्यक्तिगत एवं संस्थागत इस दिन- प्रतिदिन बढ़ते उद्योग के लिए अच्छे रियायती दरों पर सुविधापूर्ण होटलों, विमानन कंपनियों से लेकर ट्रैवल एजेंसियों, दुकानदारों एवं वाहन चालकों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युवाओं को नौकरियां पाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
तो देर किस बात की, बनाइए योजना सपरिवार किसी तीर्थ स्थल के लिए जाने की, स्वीकार करें मेरी अग्रिम शुभकामना 'आपकी तीर्थयात्रा मंगलमय हो'।

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