मांग मे सिन्दूर लगाना
स्त्रियों द्वारा मांग में सिंदूर लगाना - भारतीय वैदिक परम्परा खासतौर पर हिन्दू समाज में शादी के बाद हर सुहागिन महिला को मांग में सिन्दूर भरना आवश्यक है। सिन्दूर द्वारा मांग भरा जाना सुहाग का प्रतीक समझा जाता है।
वर्तमान समय में सिन्दूर के स्थान पर कुंकुम अन्य कॉस्मेटिक चीजों ने ले ही है। हमारे मन में सवाल उठता है कि आखिर सिन्दूर ही क्यों लगाया जाता है ?
इसके अनेक कारण हैं -
1. विवाह के समय सिंदूर से मांग भरने का संस्कार सुमंगलकारी है।
2. मांग में सिन्दूर औरतों के लिए सुहाग की निशानी माना जाता है। जो उनके पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करता है।
3. सिन्दूर नारी श्रृंगार का एक महत्वपूर्ण अंग भी है। जिसको मंगल सूचक भी समझा जाता है।
4. सिन्दूर का धारण करना धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का पालन करने का एक तरीका है, जो स्त्री के जीवन में शुभता और समृद्धि की प्राप्ति का संकेत होता है।
5. यह भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के संबंधों की पारंपरिकता और सम्मान का प्रतीक है।
6. सिन्दूर के रंग को स्त्री की शक्ति, साहस और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है, जो उसे परिवार और समाज में सशक्त बनाता है।
वैज्ञानिकता - शरीर विज्ञान में सिन्दूर का महत्व बताया गया है सिन्दूर में पारा जैसी धातु अधिक होने के कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़ती है। सिन्दूर मांग में भरा जाता है वह स्थान ब्रह्मरंध्र और अधिम नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है इससे स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित होती है। विवाह के बाद ही मांग इसलिए भरी जाती है क्योंकि विवाह के बाद जब महिला पर गृहस्थी का दबाव आता है तो उसे चिंता, तनाव और अनिद्रा जैसी बीमारियाँ घेर लेती हैं। पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है। यह मस्तिष्क के लिए लाभकारी है और यह औषधि का काम करता है। अतः सिन्दूर मांग में भरा जाता है।

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