नमस्कार
नमस्कार शब्द नमः+कार दो शब्दों से मिलकर बना है। नमस्कार का आशय है हम संसार के कारक को हमेशा सादर नमन करते हैं क्योंकि हमारी निज कोई सता नहीं है जो कुछ भी इस संसार में है वह इस संसार के कर्ता नियंता का है। अतः हमारा दूसरे व्यक्ति से जो मिलन हुआ है वह उस परमसत्ता की कृपा से हुआ है जो अवश्य ही शुभ और मंगलमय होगा।
नमस्कार, नमस्ते का अर्थ है उस परमात्मा को नमस्कार करना कहीं कहीं परंपरा स्वरूप हाथ मिलाकर, गले मिलकर या अभिवादन किया जाता है। ये सभी क्रियाएं नमस्कार का मौन स्वरूप है। दो व्यक्तियों का हाथ से हाथ, दिल से दिल, ह्रदय से ह्नदय मुख से मुख मिलते हैं तो भी परम सत्ता की दो विभूतियों को एकाकार हो जाना ही नमस्कार की उच्च श्रेणी बन जाता है। नमस्कार के पीछे वैज्ञानिक कारण यही रहा है कि व्यक्ति निजत्व को त्यागकर सार्वभौम सत्ता को स्वीकार करता है व्यष्टि से समष्टि में मिल जाता है। आत्मा से परमात्मा, अणु से परमाणु और इस प्रकार वह अपनी विराट सत्ता बना लेता है। उसका अहम समाप्त हो जाता है। नमस्कार करते ही उसमें विनम्रता, निर्मलता, सह्नदयता मैत्री भाव और अपनत्व का भाव व्याप्त हो जाता है। मनोवैज्ञानिक या वैज्ञानिक स्तर पर देखें तो दोनों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार दोनों नमस्कार करने वाले में हो जाता है। कई बार हम देखते हैं कि कोई व्यक्ति हमसे रुष्ट होता है। जब हम स्वयं पहल करके नमस्कार करते हैं तो हमारे प्रति वह सद्व्यवहार करता है।
यह इस बात का प्रमाण है कि नमस्कार से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह जरूर ध्यान रखे कि नमस्कार छोटे-बड़े सभी को किया जा सकता है, जबकि प्रणाम हमेशा अपने से बड़ों से किया जाता है। नमस्कार के पीछे एक वैज्ञानिक कारण यह भी है कि जब हम नमस्कार करते हैं तो हमारे हाथों की हथेलियाँ आपस में जुड़ती हैं जिससे अंगुलियों के माध्यम से एक दबाव पैदा होता है जो हमारी याददाश्त को मजबूत बनाने में सहायक है।

Login to Leave Comment
LoginNo Comments Found
संबंधित आलेख
शादी में क्यों मारा जाता है तोरण?
मैं माहेश्वरी | माहेश्वरी उत्पत्ति दिवस
रावणहत्था | रावणहत्था वाद्ययंत्र | रावणहत्था की बनावट
स्वास्तिक | स्वास्तिक का उपयोग
बसंत पंचमी माँ परमेश्वरी की जयंती | देवांगन समाज की कुल देवी
विवाह संस्कार की उत्पत्ति प्रकार नियम एवं रिवाजें
सप्तपदी या अष्टपदी
तिलक क्यों और कैसे लगाते है | तिलक के प्रकार | तिलक का महत्व
स्वस्तिक बनाने के तथ्य | स्वस्तिक कैसे बनाया जाता है | स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है
शंखनाद
माहेश्वरी समाज की वंशोत्पत्ति दिवस
विवाह संस्कार – भारतीय संस्कृति में विवाह का महत्व, परंपराएँ और नियम
सूर्य को जल अर्पण करना | सूर्य नमस्कार
शिखा का वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व
ॐ का वैज्ञानिक महत्व: भारतीय संस्कृति में छिपे रहस्यों की वैज्ञानिक व्याख्या
प्रदक्षिणा का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
नमस्कार का अर्थ, महत्व और वैज्ञानिक कारण
उत्तराखंड की 500 साल पुरानी परंपरा | सांस्कृतिक विरासत को सहेजती पहल
भारतीय परंपराओं के पीछे वैज्ञानिक कारण
अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अभिवादनशीलता का महत्व
महाकुंभ 2025: सनातन ज्ञान एवं संस्कृति का खुला विश्वविद्यालय
लेखक के अन्य आलेख
पहली तूलिका, पहली कहानी: भारत के प्रागैतिहासिक शैल चित्रों का अद्भुत संसार
नमस्कार का अर्थ, महत्व और वैज्ञानिक कारण
प्रदक्षिणा का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
ॐ का वैज्ञानिक महत्व: भारतीय संस्कृति में छिपे रहस्यों की वैज्ञानिक व्याख्या