Bhartiya Parmapara

सोने की सही दिशा कौनसी है? | उत्तर दिशा में सिर करके सोना क्यों वर्जित है?

दक्षिण दिशा मे सिर करके सोना 


हमारे शास्त्रों में लिखा है कि कभी भी उत्तर दिशा में सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे हमारी आयु घटती है क्योंकि दक्षिण की ओर पांव केवल मृत व्यक्ति के ही किये जाते हैं। अतः हमें हमेशा दक्षिण में सिर करके सोना चाहिए। इसका कारण है कि पृथ्वी का उत्तर ध्रुव चुम्बकत्व का प्रभाव रखता है जबकि दक्षिण ध्रुव पर यह प्रभाव नहीं पाया जाता है। शोध से पता चलता है कि साधारण चुम्बक शरीर से बांधने पर वह हमारे शरीर के उत्तकों पर विपरीत प्रभाव डालती है यदि साधारण चुम्बक हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है तो उत्तरी पोल पर प्राकृतिक चुम्बक भी हमारे मन मस्तिष्क और शरीर पर विपरीत असर डालता है।

वैज्ञानिकता - पृथ्वी के दो ध्रुवों उत्तर दक्षिण के कारण बिजली की जो तरंगें होती है यानी उत्तर ध्रुव में बिजली अधिक होती है दक्षिणी ध्रुव में ऋणात्मक (-) अधिक होती  है। इसी प्रकार मनुष्य शरीर में विद्युत धनात्मक केन्द्र होता है। पैरों की ओर ऋणात्मक। यदि बिजली दोनों तरफ से धनात्मक होगी तो मिलेगी नहीं अपितु हटेगी। यदि घनत्व अलग-अलग होगा तो दौड़कर मिलना चाहती है जैसे सिर दक्षिण की ओर तो सिर धनात्मक (+) और यदि पैर उत्तर की ध्रुव तो ऋणात्मक (-) बिजली एक दूसरे के सामने आ जाती है और मिलना चाहती है परन्तु यदि पांव दक्षिण की ओर हो तो सिर का धनात्मक तथा उत्तरी ध्रुव धनात्मक बिजली आमने-सामने होती है और एक दूसरे को हटाती है। जिसमें मस्तिष्क में आंदोलन होता रहता है। एक दूसरे के साथ खींचा ताने चलती रहती है। पूर्व पश्चिम में भी सिर हमेशा पूर्व की और करके सोना चाहिए। सूर्य की प्राण शक्ति मानव शरीर पर अच्छा प्रभाव डालती है। अतः कभी भी दक्षिण की तरफ पैर करके नहीं सोना चाहिए।



       

 

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