Bhartiya Parmapara
दुआ | पूर्णिमा की दीपावली की कहानी

दुआ | पूर्णिमा की दीपावली की कहानी

माटी के दीयों को बड़ी तन्मयता से पूर्णिमा सजा रही थी। इन्हीं दीयों की बदौलत उसके घर में दीपावली मनती है। अब की बार उसने अपने पति दामू से कहा कि दीयों के साथ हम रंगोली क...

नवरात्रि : सत्यमेव जयते | बेटियों को सुरक्षा चाहिए, केवल पूजन नहीं

नवरात्रि : सत्यमेव जयते | बेटियों को सुरक्षा चाहिए, केवल पूजन नहीं

"कन्याओं को पूजन की नहीं सुरक्षा की जरूरत है...! प्रकृति के खूबसूरत नजारों को अपनी आंखों में कैद करने का हक उनका भी है, वह भी खुली हवा की ताजगी रोम रोम में भरना चाहती ह...

रेशम की डोर | रक्षाबंधन: प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का पावन पर्व

रेशम की डोर | रक्षाबंधन: प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का पावन पर्व

शिव आराधना का श्रावण मास आस्था और विश्वास के साथ ही प्रकृति के सुंदरतम श्रृंगार का मनभावन मौसम है। तृप्त धरा चारों और हरियाली की लहराती चुनर में इठलाती है। नदियों में ऊ...

लघुकथा – पिता और सपनों की सच्चाई

लघुकथा – पिता और सपनों की सच्चाई

अरे नमन! तुम यहां स्टेशन पर क्या कर रहे हो भाई?
शानु तुम..... यहाँ कैसे मेरे दोस्त और कहां जा रहे हो ....? तुम तो बिल्कुल भी नहीं बदले जहाँ तक मुझे याद है तुम्हारे पापा का तबादला हुआ तब हम सातवी...

यात्रा

यात्रा

ट्रेन रफ्तार से दौड़ी जा रही थी और उसके साथ ही मेरे विचारों ने भी रफ्तार पकड़ ली अतीत में छुट्टियों के दौरान की गई यात्राओं के सुखद पल मानस पटल पर अंकित होते ही एक मीठी...

परीक्षा और परवरिश की कहानी: दादाजी की सीख और राघव की जीत

परीक्षा और परवरिश की कहानी: दादाजी की सीख और राघव की जीत

राघव अनमना सा हो पढ़ने की कोशिश कर रहा था किंतु वह विषय उसकी रूचि का न होने से उसे कुछ भी याद नहीं आ रहा था और कुछ देर पहले मम्मी की कही हुई बात मानो उसके कानो में शूल...

विश्वास (Faith) - किसानों, सपनों और प्रकृति पर प्रेरक कहानी

विश्वास (Faith) - किसानों, सपनों और प्रकृति पर प्रेरक कहानी

"लगता है तुम फिर मुंगेरीलाल की तरह सपने देखने लगे हो हरिया कहते हुए श्याम मुस्कुराने लगा हर साल यहीं क्रम चलता है तुम्हारा, मृग लगे नहीं की तुम्हारे सपनों की...

होली पर लघुकथा – रंगों से भरी दिल छू लेने वाली कहानी

होली पर लघुकथा – रंगों से भरी दिल छू लेने वाली कहानी

हैलो हैलो! क्या बात है ठेकेदार आधी रात में फोन करने का कारण...? सर मैंने आपसे पहले ही कहा था इतनी रेत मिलाना सही नहीं है, पर आपने उस समय हँसकर बात टाल दी आपने...

वर्तमान दौर में बदलता प्रेम का स्वरूप – एक विचारणीय लेख

वर्तमान दौर में बदलता प्रेम का स्वरूप – एक विचारणीय लेख

वर्तमान परिदृश्य में प्रेम की परिभाषा जिस गति से बदल रही है, वह चिन्तनीय है। प्रेम में एक-दूसरे को आहत करने का भाव जहाँ पनपता है, वह वास्तविक प्रेम है ही नहीं, वह मात्र...

रिश्तों की डोर - पतंग से मिली जीवन सीख

रिश्तों की डोर - पतंग से मिली जीवन सीख

आसमान में उड़ती रंग बिरंगी पतंगों ने विभा का ध्यानाकर्षण किया वह टकटकी लगाए उन्हें अपलक निहार रही थी। तभी "ये कटी, ये कटी" की आवाज ने उसकी तंद्रा भंग की यह आव...

आभूषण | माँ-बेटी के रिश्ते और जीवन के सुंदर संदेश की कहानी | Adornment

आभूषण | माँ-बेटी के रिश्ते और जीवन के सुंदर संदेश की कहानी | Adornment

दुल्हन का लिबास पहने जैसे ही दर्पण में आभा अपना प्रतिबिंब निहार रही थी तभी मॉं ने कमरे में प्रवेश किया। आभा तुनक कर मॉं से कहने लगी "घाघरे का यह रंग तो मुझे पसंद ही नही...

बचपन की सीख | बच्चों को लौटा दो बचपन

बचपन की सीख | बच्चों को लौटा दो बचपन

बच्चे तो माटी के घड़ों से है उन्हें सही रूप में ढ़ालने का दायित्व अभिभावकों का है। आज व्यस्त जीवनशैली के चलते अभिभावकों के पास समय का अभाव पाया जाता है भौतिक संसाधनों क...

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