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भाषा मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है, जो उसके व्यक्तित्व, संस्कार और सभ्यता का परिचायक बनती है। जिस प्रकार वस्त्र शरीर को ढँककर बाहरी रूप को सुंदर बनाते हैं, उसी प्रकार भा...
महोदय, "क्षमा बड़न को चाहिए" यह कहावत जीवन के गहन अनुभव और परिपक्वता से उपजी सत्यता को प्रकट करती है। क्षमा मांगना और देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मा का शुद्धिकरण...
आज जब समाज में संवेदनशीलता खत्म हो रही है मानवीय सदगुणों की बड़ी जरूरत महसूस की जा रही है। विनम्रता ऐसा सद्गुण है जो न तो कमजोरी है न ही झुकाव का प्रतीक बल्कि यह वह आंत...
जीवन में सफलता के लिए धैर्य बहुत जरूरी
बचपन और विद्यार्थी जीवन परीक्षा के असल मुकाम है जब उसे कसौटी बड़ी सख्ती से कसती है। यही वह स...
अन्न शरीर की मुख्य आवश्यकता है। इससे शरीर पुष्ट होता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। अन्न की प्रकृति का भी अपना प्रभाव है। कहावत है- 'जैसा खाओ-अन्न वैसा बने मन'। पेट भरने...