Bhartiya Parmapara

आधुनिक विवाह और सामाजिक विडंबना: बदलते रिश्तों की सच्चाई

विवाह

बहुत दिनों बाद अपनी सखी के घर गई थी मैं, बेटी की शादी की बधाई भी देनी थी और मौसी जी के सेहत भी पूछ लेने के आशय से चार बजे पहुंची तो तीनों पीढ़ी एक साथ बैठी थी। नानी,मां और बेटी, साथ बैठ चाय पी रही थी। मैंने पूछा, “बड़ी देर से आई हो पग फेरे के लिए सिया?" सब थोड़ी देर चुप रही किंतु मौसी जी आदतन बोल गई, “कहां का पग फेरा, ये तो वापस आईं हैं, लड़का नालायक था एकदम।" 
मैं सुन के चुप हो गई लेकिन आश्चर्य हुआ कि अभी तो दो महीने भी पूरे नहीं हुए थे शादी हुए, और वापिस? बताया था कि लड़के के किसी और लड़की से भी गलत संबंध थे। मैं बैठी काफी देर के लिए, इधर उधर की बातें कर चाय के साथ कुछ नमकीन लिया और मौसी जी से इजाजत ले लिफ्ट में जा खड़ी हुई। 


घर आकर रसोई में गई, शाम के खाने की तैयारी में लग गई। रात का खाना खा थोड़ी देर इनके और बच्चों के साथ बैठी। रात के दस बज गए तो बच्चे अपने काम ले बैठ गए। हम दोनों अपने कमरे में आए तो मैंने उन्हें मीना की बेटी सिया की बात बताई तो हैरान रह गए। कुछ देर बात कर सो गए, लेकिन मैं सो नहीं पाई, क्योंकि मीना भी ऐसे ही तीन बच्चों को ले कर घर आई थी और मौसी जी के सहारे और अपनी काबिलियत से अपना कारोबार शुरू किया था और बहुत नाम भी कमाया था। बाद पिछले साल अपने छोटे बेटे को कारोबार सौंप वह बड़े बेटे के पास दुबई घूमने चली गई थी। कुछ महीने बाद रिया की शादी कर शायद बिल्कुल की निवृत्त हो जाना था लेकिन आज फिर से बेटी की जिम्मेवारी आई थी उसके सर ।

बेटी की शादी का टूटना कुछ आश्चर्यचकित कर रहा था। उसने लव मैरिज की थी, उस लड़के से जो उसका सहाध्यायी था। उसके साथ वह लिव-इन संबंध भी थे उसके तो इसे काम इच्छा की वजह से शादी की ये भी नहीं कह सकते, सामान्यतः: युवाओं में जातीय आकर्षण भी शादी या लव मैरिज की वजह होती हैं किंतु इस शादी को क्या नाम दें? वैसे तो युवां लोगों में ये भावना का आना आम बात हैं, और बुरी भी नहीं हैं लेकिन एक बात जरूर हैं कि जिस पात्र का चयन कर रहे हो उसका पारिवारिक प्रतिष्ठा को देखना अति आवश्यक होता हैं। अपने देश में विवाह एक संस्कार हैं, न की कानूनी अनुबंध, विवाह के कई रूप हैं जिसमें एक प्रचलित रीत हैं जो परिवार द्वारा आयोजित होते हैं। अरेंज्ड मैरिज, जिस में परिवार द्वारा अच्छे परिवार का अच्छा लड़का ढूंढने की कोशिश की जाती हैं। लड़का अच्छा होने का मतलब ये होता हैं कि वह लड़की का आर्थिक, भावनात्मक, सामाजिक आदि तरीकों से ध्यान रख सके। समाज में अपनी पत्नी का मान बढ़ा सके, अपने परिवार में सम्मानजनक स्थान दिला सके इसी लिए परिवार वाले अच्छे घर का लड़का पसंद करते हैं। अगर खुद से भी पसंद किया जाए तो भी परिवार के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। 


विवाहों के कई प्रकार हुआ करते थे, स्वयंवर, गंधर्व विवाह, आयोजित विवाह आदि। जिसमें शकुंतला और दुष्यंत का गंधर्व विवाह प्रचलित हैं। सीता जी और द्रौपदी का स्वयंवर के बारे में हम जानते हैं। लेकिन एक प्रश्न आम हैं, जिन देशों में प्रेम लग्न की रीत हैं वहां लग्न विच्छेद के किस्से भी बहुत ज्यादा होते हैं। वहां शादी का महत्व हाथ मिला कर अभिनंदन से ज्यादा नहीं हैं, दो सेकंड में हाथ छूट जाता हैं, साथ भी वैसे ही छूट जाता हैं। ऐसी शादियां अपने सामाजिक ढांचे को डगमगा देता हैं और विवाह के महत्व को भी घटा देता हैं। 
वहां के लोग विवाह का प्रदर्शन जाहिर में प्यार जता कर, डार्लिंग आदि शब्दों से करते हैं किंतु कुछ ही दिनों में उनके लग्न विच्छेद की खबर भी मिल जाती हैं, किंतु अपने देश में चाहे आपस में लड़ भी लेंगे लेकिन एक नहीं सात जन्मो का साथ लेने की कसम खाई और निभाई भी जाती हैं। 
सनातन धर्म में विवाह का स्थान अपने सोलह संस्कारों में से एक हैं  जिसका पूरी दुनिया में मान सम्मान किया जा रहा हैं। सुख में साथ दुःख में अलायदा होने का संस्कार हमें कभी भी नहीं दिया गया हैं। हां आजकल पाश्चात्य प्रणाली में लिप्त युवाओं और युवतियों में ये प्रवृत्ति ज्यादा देखने मिलती हैं किंतु उसका जो परिणाम हैं वह मानसिक, आर्थिक, कौटुंबिक और सामाजिक विध्वंस से ज्यादा कुछ नहीं हैं। 

                                    

                                      

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