Bhartiya Parmapara

स्थानीय व्यापार का समर्थन करें

स्थानीयता को मजबूती प्रदान करना हम सबका फर्ज

आप सभी जानते ही हैं कि हमारे देश के अलावा भी विश्व के अनेक देशों में इस बार गर्मी का भयंकर दौर देखने को मिला है। चूँकि तापमान लगातार बढ़ता ही जा रहा है जिसके चलते हमारे देश में अभी भी कई राज्य लू की चपेट में हैं।

मौसम जानकारों का मानना है कि  बदलता मौसम गर्मी के प्रकोप को और ज्यादा बढ़ाने का काम करेगा जिसके चलते आने वाले समय में स्थिति और खराब होने की सम्भावना है। इस बीच बड़े-बुजुर्ग यह भी बता रहे हैं कि इस साल गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

अब जब आप इतनी भीषण गर्मी में बाज़ार निकलते हैं तो देखते होंगे कि आपको को गर्मी और धूप से बचाने के लिये शामियाने लगे हुए हैं और वहाँ बैठने के लिये कुर्सियाँ भी रखी गयी हैं। कुछ जगहों पर तो विश्राम करने के लिये खाट भी रखे हुए मिलेंगे। लेकिन इन सब जगहों के अलावा भी बाजार क्षेत्र में जगह-जगह पर ठंडे पानी की व्यवस्था की गई मिलेगी।

आपके ध्यानार्थ यह सब व्यवस्था "स्थानीय दुकानदारों" ने बिना किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता के आपसी चन्दा इकट्ठा कर, मिलकर की हुई होती है। साथ-साथ इस तरह की व्यवस्था में लेशमात्र भी भेद-भाव की गुंजाईश नहीं रखते हैं अर्थात किसी भी जाति का हो, छोटा हो या प्रौढ़, औरत हो या पुरुष सभी इस व्यवस्था से लाभान्वित होते हैं।

इतना ही नहीं धूप में आपकी गाड़ी की सीट गर्म हो गई हो तो सीट को ठंडा करने के लिए पानी भी यही "स्थानीय दुकानदार" निःसंकोच  देता है। राह चलते किसी राहगीर की तबीयत खराब हो गई हो तो उसको पंखा-कूलर-एसी की शीतल छाया में बैठने या अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था भी यही "स्थानीय दुकानदार" करता है।



       

 

उपरोक्त के अलावा, किसी भी दुकान में प्रवेश करते ही आपको सम्मान के साथ ठण्डे पानी, गन्ने का रस, नींबू पानी, लस्सी वगैरह को पूछने वाला भी यही "स्थानीय दुकानदार" ही होता है।

आपको किसी गली या प्रथम मंजिल तक जाना हो तो भैया गाड़ी रख दूँ क्या?   
थोड़ा सा ध्यान रख लेना" ऐसा कहकर आपकी गाड़ी की मुफ़्त की पार्किंग और हिफाज़त का ज़िम्मा भी यही "स्थानीय दुकानदार" उठाता है।

जब आपको टैक्सी, रिक्शा या कैब वाले को भुगतान करना हो या ऑनलाइन खरीददारी का भुगतान करना हो तब छुट्टे पैसे/चेंज भी यही "स्थानीय दुकानदार" एक बार हल्की आनाकानी करने के बाद भी मुहैया करा देते हैं, भले ही बाद में उन्हें अपने धंधे में थोड़ी तकलीफ ही क्यों न उठानी पड़े।

उपरोक्त सभी पर विचार कर बतायें  -   
- बदले में आप क्या करते हैं ?   
- आपको क्या करना चाहिये ?  
- आपको क्यों करना चाहिये ?

रुमाल से लेकर साड़ी तक, चार्जर से लेकर लेपटॉप तक यहाँ तक कि दैनिक उपयोग की हर छोटी बड़ी ख़रीदारी भी आजकल हम और आप बेधड़क ऑनलाइन कर रहे हैं।

कृपया ध्यान दे लें, मैं ऑनलाइन ख़रीदारी के ख़िलाफ़ नहीं हूँ, मगर ऑनलाइन पर ही निर्भर हो जाना हर लिहाज से न भी हो तो कुछ लिहाज से तो अवश्य ही गलत है। यहाँ इतना ही निवेदन है कि अति आवश्यक वाले हालत को छोड़, हमें हमारे निकटतम स्थित स्थानीय बाजार से ही खरीददारी पर ध्यान देना चाहिये। मेरा मानना है कि हम सभी स्थानीय खरीददारी के लाभों से वाकिफ तो हैं लेकिन जरा से आलस्य के चलते ऑनलाइन ख़रीदारी कर लेते हैं, उसमें ही थोड़ी सुधार कर लेने की आवश्यकता है।

इसलिये ही इस रचना के माध्यम से मैं सभी से यही अनुरोध करता हूँ कि यदि आप स्थानीय बाजार से नहीं खरीदेंगे, तब इन "स्थानीय दुकानदारों" का धंधा ख़त्म हो जाएगा या एकदम मन्दा पड़़ जायेगा। फिर उस हालात में आपको/हमको उपरोक्त अघोषित सेवाएं मिलनी भी बन्द हो जायेंगी।

इसलिए कोशिश करें स्थानीय व्यापार और व्यापारियों दोनों को जीवित रखें  क्योंकि ये, वे लोग हैं जो सर्वशक्तिमान से केवल एक ही प्रार्थना करते हैं, वो है -

साईं इतना दीजिए,   
जा में कुटुंब समाय ।  
मैं भी भूखा न रहूं,   
साधु ना भूखा जाय ।।



       

 

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