Bhartiya Parmapara

घोड़े पर योद्धा की मूर्तियों के संकेत: मुद्रा क्या दर्शाती है?

स्वतंत्रता सेनानी

घोड़ों पर बैठे योद्धा वाली स्थापित मूर्तियों के संकेत

इस बार गर्मी की छुट्टियों में जब पोता-पोती दिल्ली घूम कर लौटे तब उन्होंने वहाँ जो-जो फोटो लिये थे, वह सब दिखाने लगे।

मैंने जब उनका फोटो महाराणा प्रताप व लक्ष्मीबाई की प्रतिमा के (नीचे खड़े होकर) साथ देखा तब मैंने उनसे उन प्रतिमाओं से क्या संकेत मिलता है, पूछा। पहले तो वे यही बोले ये शुरवीर थे लेकिन जब और स्पष्ट करते हुए मैंने पूछा कि ये जिस घोड़े पर बैठे हैं उससे क्या समझ में आता है तब उन्होंने कहा कि मार्गदर्शक ने ऐसा कुछ तो बताया ही नहीं।

तब मैंने उन्हें महाराणा प्रताप की घोड़े पर बैठी प्रतिमा देखने को कहा, जहाँ उस घोड़े का एक पाँव उठा हुआ है अर्थात हवा में है। वहीं रानी लक्ष्मी बाई की भी घोड़े पर बैठी प्रतिमा दिखा बताया कि यहाँ घोड़े के दोनों पाँव हवा में परिलक्षित अर्थात जमीन से उठे हुए दिखाई दे रहे हैं। तब बच्चों ने पूछा क्या रानी लक्ष्मी बाई महाराणा प्रताप से ज्यादा अच्छी घुड़सवार थीं क्योंकि इनके घोड़े के तो आगे वाले दोनों पाँव हवा में उठे हुए हैं?  
तब मैंने उनसे कहा ऐसी बात नहीं है। दोनों ही एक समान अच्छे घुड़सवार के साथ - साथ पराक्रमी व शूरवीर थे।  
प्रतिमा में घोड़े का एक पाँव हवा में या दो पाँव हवा में इसके अलावा दोनों पाँव जमीन पर से हमें योद्धाओं के बारे में कुछ संकेत मिलता है अर्थात घोड़ों का ऐसा रुप ऊपर बैठे योद्धा के बारे में बहुत कुछ बता देता है। जब बच्चों ने संकेतों के बारे में बताने का कहा तब मैंने उन्हें इन संकेतों के बारे में रात्रि में शान्ति से बताने का बता उन्हें फिलहाल अपना-अपना गृह कार्य निपटा लेने की सलाह दे, पढ़ने वास्ते भेज दिया।

रात्रि में बिस्तर पर जाने से पहले वे मेरे से जानने के लिये एक साथ आ धमके, तब उन्हें समझाते हुए उन्हें मैंने जो कुछ बताया वो इस प्रकार है  -

जब मूर्ति में घोड़े का एक पाँव उठा हुआ, कहिये या हवा में है, से यह तात्पर्य है कि योद्धा लड़ाई के दौरान घायल / जख्मी हो गया और उस योद्धा की मृत्यु युद्ध क्षेत्र में नहीं हुई बल्कि बाद में अन्य जगह पर उस जख्म के चलते हुई।

लेकिन जब बायाँ पैर हवा में हो तो उस घोड़े की मृत्यु उस पर बैठे योद्धा से पहले हुई।  जैसा हम सब जगह घोड़े पर बैठे महाराणा प्रतापजी की मूर्ति में पाते हैं अर्थात उनका प्रिय और इतिहास में अमर हो चूका नीलवर्ण घोड़ा चेतक का बायाँ पैर हवा में उठा हुआ ही परिलक्षित होगा।

अब रानी लक्ष्मी बाई के घोड़े के दोनों पाँव हवा में थे। जिसका मतलब है कि इनको युद्ध श्रेत्र में लड़ते हुए वीरगति प्राप्त हुई।

इसके अलावा यह भी जान लो कि कुछ मूर्तियाँ ऐसी भी देखने को मिलेंगी जिसमें घोड़े के चारों पैर जमीन पर टिके हुए होंगे। उसका मतलब यही है कि उस घोड़े पर बैठे योद्धा की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई है।

उपरोक्त चर्चित तथ्यों का सारांश यह है कि - 
1. घोड़े का आगे का एक पैर हवा में हों तो युद्ध में प्राप्त जख्म के कारण सम्मानित व्यक्ति की मृत्यु हुई है।  
2. घोड़े के दोनों आगे के पैर हवा में हों तो सम्मानित व्यक्ति युद्ध में बलिदान हुआ है। 
3. घोड़े के चारो पैर जमीन पर हों तो : प्राकृतिक कारण से सम्मानित व्यक्ति की मृत्यु हुई है। 
4. घोड़े का आगे का बायाँ पैर हवा में हो तो उस घोड़े की मृत्यु उस पर बैठे योद्धा से पहले हुई है।  
आशा है उपरोक्त बताये सारे तथ्यों को भूलोगे नहीं और समय-समय पर अपने सहपाठियों का ज्ञान वर्धन करते रहोगे।

                                    

                                      

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