Bhartiya Parmapara

जीवन का असली उद्देश्य – सेवा, प्रेम और सद्भावना से जीवन जीना

खुशहाल जीवन 


बहुत पुण्य का उदय हुआ कि मानव के रूप में हम इस दुनिया में आए, लेकिन इस धरती पर हमारा जन्म किसी को कष्ट पहुँचाने के लिए नहीं हुआ है।

हम कितने ही ज्ञानी हो जाएं या धनवान हो जाएं लेकिन, हमारी वजह से किसी को कष्ट पहुँचता है, तो यह सब व्यर्थ है। असल में दूसरों की मदद करने में ही हमें सच्ची खुशी प्राप्त हो सकती है।

अगर हमने अपने जीवन में कोई दुश्मन बनाया है या किसी को परेशान किया है, तो हम कभी भी खुश नहीं रह सकते। अगर कोई व्यक्ति किसी को धोखा देता है या कष्ट देता है,  तो जीवन के अंत में उसका कमाया हुआ सारा धन, ज्ञान और यश सब निरर्थक हो जाता है। 

तभी तो कहा गया है कि दूसरों की खुशी के लिए ख़ुद को समर्पित करने वाला व्यक्ति ही खुशहाल जीवन जीता है। 
सबकी खुशी में ही अपनी खुशी मानना ही जीवन में खुशहाली लाता है।

अतः जितना संभव हो सके हमें दूसरों की सेवा करनी चाहिए और अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।

जीवन में खुशहाली लाने के लिए दूसरों के जीवन का भी हमें पूरा सम्मान करना चाहिए। दूसरों की मदद करना अपने जीवन को खुशहाल बनाने का सबसे अच्छा तरीका है। 

हमारे अन्दर ये सब भाव जागरूकता और अच्छी शिक्षा से आते हैं, इसलिए हमारी शिक्षा में नैतिक सिद्धांतों का होना अति आवश्यक है।

हे परमात्मा! 
हमारे मन में दूसरों के प्रति प्रेम, मित्रता, सद्भावना, समर्पण और सबके प्रति हित की भावना हमेशा रहे, ताकि हम अपना जीवन पूरी तरह से खुशी से व्यतीत कर सकें।

सबका जीवन शांत और सुख से बीते, यही ईश्वर से प्रार्थना है।

धन्यवाद!!

 

                                    

                                      

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