भगवान शिव की आराधना का पर्व
भारत की संस्कृति धर्म परायण है, धर्म परायण होने के कारण भारतीय संस्कृति में व्रत का अपना एक विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि एक प्रमुख धार्मिक पर्व उत्सव एवं व्रत है। शैव धर्मालम्बी महाशिवरात्रि को बड़ी श्रद्धा तथा उत्साह से मनाते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व भारत के साथ-साथ नेपाल तथा बांग्लादेश में भी मनाया जाता है। साल में 12 शिवरात्रि होती है प्रत्येक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहा जाता है लेकिन फागुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा जाता है।
क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?
मान्यताएं -
1) पौराणिक एवं धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सृष्टि का प्रारंभ अग्नि लिंग से हुआ था। (महादेव का विशालकाय स्वरूप)
2) भगवान शंकर एवं पार्वती जी का विवाह इसी दिन हुआ था।
3) भगवान शिव जिनसे योग परंपरा की शुरुआत मानी जाती है, शिव को योग का प्रथम गुरु माना जाता है परंपरा अनुसार इस दिन रात्रि को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि मानव में ऊर्जा तथा शक्ति की प्राकृतिक लहर बनती है।
4) शिवरात्रि के दिन ही रात्रि में शिव के निराकार रूप से साकार रूप हुआ था ब्रह्मा जी के रूप में।
कथा –
महाशिवरात्रि के बारे में कई कथाएं प्रचलित है, धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय अमृत कलश निकलने से पहले हलाहल नाम का विष निकला, हलाहल विष के निकलते ही संपूर्ण ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया, त्राहि-त्राहि होने लगी समुद्र में ऊंची ऊंची लहरें उठने लगी। हलाहल विष में ब्रह्मांड को समाप्त करने की क्षमता थी और भगवान शिव ही इसे नष्ट कर सकते थे अतः भगवान शिव से प्रार्थना की गई भगवान शिव ने हलाहल विष पान किया तथा उसे अपने कंठ में रख लिया कंठ में रखने के कारण उनका कंठ नीला पड़ गए इसलिए भगवान शिव को "नीलकंठ" भी कहते हैं। हलाहल विष को कंठ में रखने के कारण उनको भयंकर कष्ट हुआ। वैद्य तथा चिकित्सक बुलाए गए चिकित्सकों ने सलाह दी भगवान शिव को रात में सोने न दिया जाए। शिवजी रात में सोने ना पाए इसलिए रात भर उत्सव मनाया गया नृत्य तथा गान हुए प्रातः भगवान शिव ने सब को वरदान दिया। इसी उत्सव की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। भगवान शंकर ने सृष्टि को बचाया था तो उनके भक्त गण व्रत रखते हैं तथा रात जागरण करते हैं।
पूजन विधि -
- महाशिवरात्रि को प्रातः काल स्नान करके पूजन कार्य करें पूजन करने से पहले त्रिपुंड तिलक लगाएं पूजन के साथ व्रत भी करें यदि संभव हो तो निर्जल व्रत रखें।
- भगवान शंकर पर रोली अक्षत चंदन इत्र बेलपत्र धतूरा तथा साथ में मंदार के श्वेत पुष्प भी अर्पण करें।
- पूजन करते समय ईशान कोण की तरफ मुंह करें।
- जो बेलपत्र अर्पण करें उस बेलपत्र पर ओम नमः शिवाय लाल चंदन से लिखकर चढ़ाएं तो विशेष फलदायक होता है।
- भगवान शिव का पूजन करने से पहले भगवान गणेश का तथा शिव परिवार का पूजन करें तत्पश्चात शिवजी का पूजन करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें, यह मंत्र कष्ट निवारक होता है यदि संभव हो तो मंत्र छपवा कर वितरण करें।
- अपने द्वार पर महामृत्युंजय मंत्र कांच में मड़वा कर स्थापित करें।
- शहद दूध दही शक्कर तथा इत्र से अभिषेक करें।
- सौभाग्यवती महिलाएं सुहाग सामग्री मां पार्वती को अर्पण करें।
- कुंवारी कन्याएं दूध में केसर तथा शक्कर डालकर मीठा दूध भगवान शंकर पर चढ़ाएं।
- अविवाहित पुरुष सफेद तथा पीली फूलों की माला चढ़ाएं ऐसा करने से शादी में आने वाली रुकावटें समाप्त हो जाती हैं।
क्यों होता है इन वस्तुओं से अभिषेक?
शहद : मां लक्ष्मी की कृपा होती है तथा वाणी में मिठास आती है।
दूध : स्वास्थ्य रक्षा एवं संतान प्राप्ति हेतु।
दही : जो पशु पालन का व्यवसाय करते हैं पशुओं की संख्या और अधिक बढ़े।
घी : बल तथा उर्जा की प्राप्त हेतु।
इत्र : विचार पवित्र हो।
शक्कर : सुख समृद्धि में वृद्धि हो।
विभिन्न राशियों वाले व्यक्तियों को अपनी राशि के अनुसार सामग्री प्रयोग कर अभिषेक करना चाहिए -
मेष - शक्कर तथा शहद से अभिषेक करें
वृष - गाय के दूध से अभिषेक करें।
कर्क - मंदार का फूल तथा दूब को पीसकर उससे अभिषेक करें
सिंह - पंचामृत से अभिषेक करें
तुला - दूध तथा गन्ने के रस से अभिषेक करें।
धनु - गन्ने के रस से अभिषेक करें
मकर - गुड़ तथा तथा गन्ने के रस से अभिषेक करें
मिथुन - शहद से अभिषेक करें
कन्या - गुड़ तथा घी से अभिषेक करें
मीन - मंदार की जड़ तथा दूब को पीसकर उससे अभिषेक करें
कुम्भ - जल में गुलाब की पंखुड़ी या इत्र डालकर उससे अभिषेक करें
वृश्चिक - शहद तथा घी मिलाकर उससे अभिषेक करें, अभिषेक करने के उपरांत भगवान से प्रार्थना करें घी का दीपक जलाएं।
शिवरात्रि महिलाओं के लिए विशेष शुभ मानी जाती है अपने पति के स्वास्थ्य तथा सुख के लिए पत्नी भगवान शिव से प्रार्थना करती है। कन्याएं भगवान शिव जैसा आदर्श पति प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करती हैं।
सोमवार को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है अतः सोमवार के दिन भगवान शिवजी का व्रत कथा पूजा होती है। बांग्लादेश में लोग चंद्र नाथ धाम पूजा करने जाते हैं। नेपाल में भगवान पशुपतिनाथ जी के मंदिर में बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है, मान्यता के अनुसार शंकर पार्वती का विवाह शिवरात्रि को हुआ था, इसलिए रात्रि में शिव की बारात भी निकाली जाती है।
महाशिवरात्रि को "बोध उत्सव" भी कहते हैं जिसका अर्थ यह है इस बात का बोध होता है कि हम सब शिव के अंश हैं तथा उनके संरक्षण में हैं। मध्य भारत प्रांत में शैव अनुयायो की बड़ी संख्या है। उज्जैन में महाकाल मंदिर सिवनी के मठ जबलपुर का तिलवारा घाट मैं महाशिवरात्रि के उत्सव दर्शनी हैं दक्षिण भारत में भी आंध्र प्रदेश कर्नाटक केरल तमिलनाडु तेलंगाना के मंदिरों में भी महाशिवरात्रि के उत्सव तथा पूजन होते हैं। कश्मीरी ब्राह्मणों के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण है वहां यह व्रत तीन-चार दिन पहले शुरू होता है तथा 2 दिन बाद तक चलता रहता है।
ये अवश्य करें - यदि घर में भगवान शिव की प्रतिमा हो तो दूध से उसका अभिषेक करें और यदि प्रतिमा ना हो तो किसी मंदिर से अभिषेक का दूध लाकर संपूर्ण घर की दीवारों पर तथा संपूर्ण घर में छींटे मारे ऐसा करने से घर से नकारात्मक शक्तियों का विलोप होता है तथा सकारात्मक शक्तियों का प्रवेश होता है।
ऊँ नमः शिवाय

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