Bhartiya Parmapara

जीवन की बाँसुरी: सरलता से चुनौतियों को मधुर बनाने की कला

जीवन मे सरलता  

जीवन की बाँसुरी: सरलता से चुनौतियों को मधुर बनाने की कला   
जीवन में सरलता चुनौतियों को भी सहज और आसान बना देती है। हम किसी भी चुनौती को जितना 'दिलचस्प' बना लेंगे, उससे निपटना उतना ही सरल हो जाएगा।   
यहाँ 'दिलचस्प' होने का अर्थ यह है कि हम चुनौतियों का सामना इस प्रकार करें कि हमारा मन प्रफुल्लित और उत्साह से भरा रहे।

हमारे भीतर एक ऐसी संपत्ति, योग्यता और मौलिकता विद्यमान है, जिसका सदुपयोग कर लिया जाए, तो हर बड़ी चुनौती स्वतः ही मनोरंजक (दिलचस्प) बन जाएगी। यह अद्भुत योग्यता शरीर और इंद्रियों सहित हमारे अंतःकरण की सरलता से आती है, यानी हमें अपने भीतर से सरल होना होगा। यही सरलता जब परमात्मा के प्रति होती है, तो वह "भक्ति" कहलाती है; और जब यह संसार के प्रति होती है, तो वह "सदाचार" कहलाती है।

प्रश्न: भीतर की इस सरलता में कैसे उतरें?  
इस गहन प्रश्न का उत्तर एक अति सुंदर उदाहरण में छिपा है — "बाँसुरी"।  
छोटे से बाँस से बनी बाँसुरी, जिसमें कई छिद्र होते हैं, वह इतना मधुर संगीत कैसे देती है?  
जब बाँसुरी से पूछा गया कि "तुम कैसे इतना मीठा बोलती हो, और कृष्ण की भी इतनी प्रिय कैसे बन गई हो?"

तो बाँसुरी ने सहजता से उत्तर दिया: "न तो मैंने कोई विशेष साधना की, न ही कोई तपस्या। इसका बस एक ही कारण है— मेरे भीतर मेरा कुछ भी नहीं है। जैसे कृष्ण मुझे बजाते हैं, वैसे ही मैं बज लेती हूँ।“

इसका सीधा और गहरा अर्थ यह है कि जब हम स्वयं को ऊपर वाले के संकेत के अनुसार चलने देते हैं, तो हमारे भीतर सहज ही सरलता उतर आती है। और यही परमात्म-समर्पित सरलता बड़ी-बड़ी चुनौतियों को भी दिलचस्प बनाकर आसान कर देती है।

हे परमेश्वर...  
हम जीवन में हर चुनौती और मुश्किल का सामना बड़े धैर्य और धीरज से करें, और हमेशा सरल भाव से उन्हें सुलझाने का प्रयत्न करें। यही प्रार्थना है कि सभी स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें और अपने जीवन को सरलता के मार्ग पर ले जाने का यत्न करें।



   

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