Bhartiya Parmapara
युग परिवर्तन

युग परिवर्तन

एक घने जंगल में एक विशाल वटवृक्ष के पास पीपल के एक बिरवे ने जन्म लिया। विशाल वटवृक्ष की लंबी सैकड़ों बरोहें धरती को वटवृक्ष के चारों ओर से जकड़ी हुई थीं। नन्हें पीपल को...

नारी और समाज

नारी और समाज

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता“ की परम्परा हमारे ग्रंथों में लिखी गई है जिसका अर्थ है - जहाँ महिलाओं का सम्मान किया जाता हैं वहां देवता निवास क...

प्रेम की जीत

प्रेम की जीत

सुबह का समय था। बाहर से मेरे कुछ दोस्त आये हुए थे। कुछ खाने पीने के बाद हम साथ बैठे चाय पी रहे थे। तभी हमने देखा दुखना घर आ गया है। वहीं से मैंने उसे आवाज दी- 'अरे दुखन...

चाहत बस इतनी सी

चाहत बस इतनी सी

फूल कहाँ माँगे थे मैंने, कब माँगी मँहगीं सौग़ातें,
ये भी कभी नहीं चाहा.. तुम चाँद सितारे ले आते!

कहाँ कभी चाहा मैंने] सोने चाँदी से लद जाना,
या ऊँची ब्रैंडिड गाड़ी में] घूम घूम कर इतर...

आज का सबक - भारतीय परंपरा

आज का सबक - भारतीय परंपरा

आज जब परंपराओं की बात आती हैं तो हम एक कदम पीछे हटने लगते हैं।

हमसे जब कोई हमारी परंपराओं का जिक्र करने
लगता हैं तो हम निशब्द हो जाते हैं।

क्या यही हमारी भारतीय परंपराओं की पहचान...

अलविदा मेरे प्यारे बेटे

अलविदा मेरे प्यारे बेटे

बरसात का मौसम हो चला था। सूखे दरख़्त पानी की आस लगाए अब भी ऊपर टकटकी लगाए खड़े थे। पूरे चार बरस हो आए थे आख़िरी मानसून आए हुए, कारण भी लगभग तय ही था, फैक्ट्रियों औट कों...

भारतीय परम्परा की प्रथम वर्षगांठ

भारतीय परम्परा की प्रथम वर्षगांठ

भारतीय परम्परा की है आज प्रथम वर्षगांठ
स्वतंत्रता सेनानियों से है जिंदगी में आजादी का ठाठ
त्यौहार, संस्कृति, रीति रिवाज और इतिहास है हमारा आधार
जो भारत के गौरव को...

जीवन सार : प्रेरणादायक कहानी

जीवन सार : प्रेरणादायक कहानी

मोहन बेटा ! मैं तुम्हारे काका के घर जा रहा हूँ।

क्यों पिताजी ?

और आप आजकल काका के घर बहुत जा रहे हो ...? आपका मन मान रहा हो तो चले जाओ ... पिताजी !!! लो ये पैसे रख लो, काम आएंगे ।

अच्युत, अनंत और गोविंद महिमा

अच्युत, अनंत और गोविंद महिमा

भगवान धन्वन्तरि समुद्र-मंथन के समय हाथ में अमृत कलश लेके प्रकट हुए थे। आरोग्य के देवता माने जाने वाले धन्वंतरि देव भगवान विष्णु के अवतार है। भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा...

देसी बीज

देसी बीज

तुमने बताया नहीं घनश्याम, कि मैं क्या करूं?

क्या सारे बिंड़ा (टंकियां) तुड़वा दूं और यह सारा बीज खत्म कर दूँ?

एक बार फिर अपना सवाल लेकर चाचा मेरे सिर पर सवार थे। मैंने उन्हें फिर समझ...

ज्योतिष की विभिन्न विधाये और राजा सवाई जयसिंह (जयपुर) का योगदान

ज्योतिष की विभिन्न विधाये और राजा सवाई जयसिंह (जयपुर) का योगदान

जयपुर शहर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह जी ज्योतिष, खगोल शास्त्र, अंतरिक्ष विज्ञान एवं वास्तुशास्त्र के विशेषज्ञ थे।  उनके शासन काल में इन विषयो...

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं | हनुमान जयंती

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं | हनुमान जयंती

"गुरु" का न होना लघु होना है। जीवन में गुरु के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है। अर्थात "जो अपने कर्म, ज्ञान एवं व्यवहार से हमारी लघुता मिटा दे वही गुरु है।" इस परिभाषा की दृष्टि से हनुमानजी एक...

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