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विनम्रता: व्यक्तित्व को निखारने वाला सबसे सुंदर मानवीय गुण

विनम्रता व्यक्तित्व को निखार देती हैं

विनम्रता एक अद्भुत मानवीय गुण है। विनम्र होने का मतलब है स्वयं को समझना और स्वीकार करना जैसा कि आप वास्तव में हैं और दूसरों को वैसे ही स्वीकार करना जैसा कि वे वास्तव में हैं।विनम्रता आपके आंतरिक प्रेम की शक्ति से आती है।

अब प्रस्तुत कर रहा हूँ, उपरोक्त तथ्यों को चरितार्थ करते कुछ वाक्य जो हाल ही के वर्षों में देखने-सुनने में आये हैं -

१) जब क्रिकेटर राहुल द्रविड़ को बैंगलोर यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किये जाने के बारे में पूछा था, तो राहुल द्रविड़ ने विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उस समय उन्होंने कहा था, ''मेरी पत्नी एक डॉक्टर है। उसने इस डिग्री को पाने के लिए अनगिनत दिन, बिना सोए बिताए हैं। दूसरी तरफ मेरी माँ एक कला शिक्षिका हैं। उन्होंने अपनी डिग्री के लिए धैर्यपूर्वक पचास वर्षों तक प्रतीक्षा की। मैंने क्रिकेट खेलने के लिए बहुत मेहनत की, लेकिन मैंने उतनी पढ़ाई नहीं की, तो मैं यह उपाधि कैसे स्वीकार कर सकता हूँ ?”

२) 1952 में इज़रायली सरकार ने आईन्स्टाईन को प्रधानमन्त्री पद की पेशकश की। आईन्स्टाईन ने विनम्रतापूर्वक कहा, “मैं भौतिकी का एक अनुभवहीन छात्र हूँ। मैं राज्य के शासन और प्रशासन के बारे में क्या समझता हूँ !!!”

३) विश्व प्रसिद्ध रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने 2006 में फील्ड मेडल और गणित में नोबेल पुरस्कार के बराबर मानी जाने वाली एक बड़ी राशि लौटा दी थी। उन्होंने कहा, ''हमारा बचपन गरीबी में बीता। माँ की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए हमें बहुत गणितीय तरीके से प्रबन्धन करना पड़ा। शायद इसीलिए मैं कम उम्र से ही कुछ गणित कौशल विकसित करने में सक्षम हो गया। अब जब मैं गरीबी के उस दौर में नहीं हूँ, तो इतने पैसे का क्या करूंगा ?”

४) हाल ही में, टी-ट्वन्टी विश्वकप जीतनेवाली टीम का कोच होने के नाते राहुल द्रविड़ को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने  ₹ 5 करोड का बोनस देने की बात कही, जब कि बाकी सहयोगी कर्मचारी - वर्ग (सपोर्ट स्टाफ) को ₹ 2.50 करोड़ देने का तय हुआ था। यहां वापस द्रविड़ का बड़प्पन देखने को मिला जब उन्होंने यह ज्यादा राशि स्वीकारने को विनम्रतापूर्वक नकारा, यह कहकर की मैं भी एक सहयोगी स्टाफ हूँ और यह ज्यादा राशि स्वीकारने का मैं अकेला हकदार नही हुँ!

उपरोक्त घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि "विनम्रता जब उभरती है, अहम लुप्त होता है... तब महान व्यक्तित्व उभरता है।“ और इसी सीख को बहुत पहले रहीम जी ने निम्न दोहा गढ़ व्यक्त किया था - 
बड़े बड़ाई नहिं तजैं, लघु रहीम इतराइ । 
राइ करौंदा होत है, कटहर होत न राइ ॥  

भावार्थ : जिन लोगो में विनम्रता और बड़प्पन होता है, वे धनी न होने के बाद भी दूसरों से मान-सम्मान पाते हैं। जबकि,गुणहीन लोग थोड़ा सा धन आने पर ही घमण्ड करने लगते है। जिस तरह राई का बीज करौंदा बन जाय तो वह इतराने लगता है,जबकि कटहल में यह भावना नहीं होती।

अन्त में सारांश यही निकलता है कि विनम्रता किसी को भी झुकने पर मजबूर कर देती है। याद रखें, जिस किसी ने यह लिखा है, सत्य लिखा है - "विनम्रता की सीमा आकाश है और किसी भी स्तर पर, उसके नीचे गिरने की कोई सीमा नहीं है।"

                                    

                                      

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