Bhartiya Parmapara

आंधी-तूफान और बिजली से बचाव | बच्चों की प्रेरणादायक कहानी | सावधानी

सावधानी

बारिश का मौसम था। आसमान में काली घटाएँ घिरने लगी थीं। छोटी-छोटी लड़कियाँ खेलकूद करते हुए मौसम का आनंद ले रही थीं। तभी अचानक जोर से बिजली चमकी और सभी बच्चियाँ डर गईं। वे सहमकर एक-दूसरे का चेहरा देखने लगीं।

उन्हीं में से एक बच्ची मिन्नी बोली, "अब हमें यहाँ से चलना चाहिए। आँधी और बारिश शुरू होने वाली है।"

लेकिन मिन्नी की बातों को उसकी सहेलियों ने अनसुना कर दिया। तभी विधि बोली, "तुम्हें जाना है तो जा सकती हो, मिन्नी। हमें तो बारिश का मज़ा लेना है।"

मिन्नी ने समझाते हुए कहा, "मेरे पिताजी कहते हैं कि जब जोर से बिजली चमके तो पेड़ों के नीचे या खुले आसमान के नीचे नहीं ठहरना चाहिए। और जहाँ बिजली का खंभा हो, उसके आसपास तो बिल्कुल भी नहीं रहना चाहिए।"

इतना सुनते ही सभी सहेलियाँ उसका मज़ाक उड़ाने लगीं और बोलीं, "हमें कुछ नहीं होगा। मिन्नी, तुम खुद डर रही हो और हमें भी डरा रही हो।"

मिन्नी चुपचाप अपने घर की ओर चली गई।

थोड़ी ही देर में बारिश तेज हो गई। बिजली लगातार चमकने लगी और बादलों की तेज गर्जना सुनाई देने लगी। अब सभी लड़कियाँ शांत हो गईं।

विधि बोली, "चलो उस पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो जाते हैं। जैसे ही बारिश कम होगी, हम घर चले जाएँगे।"



       



 

जैसे ही सभी ने आगे कदम बढ़ाया, पलक झपकते ही जोरदार गर्जना के साथ आसमान से वज्रपात हुआ। देखते ही देखते हरे-भरे वृक्षों में आग लग गई। लड़कियाँ बाल-बाल बच गईं। वे एक-दूसरे को देखते हुए काँपने लगीं। डर के कारण उनके मुँह से आवाज तक नहीं निकल रही थी।

धीरे से प्रिंसी बोली, "विधि, तुम्हारा घर पास में ही है। हम तुम्हारे घर चलते हैं। यहाँ रुकना बिल्कुल सही नहीं है।"

सभी ने उसकी बात मान ली और भीगते हुए विधि के घर पहुँच गईं।

विधि के मम्मी-पापा ने दूर से ही विधि और उसकी सहेलियों को घर की ओर आते देख लिया था। सभी अंदर आए। पिताजी ने सबको एक-एक तौलिया देते हुए पूछा, "इतनी बारिश में तुम सब कहाँ से आ रहे हो?"

सभी बच्चियाँ डर के कारण चुप थीं। उन्हें लग रहा था कि अब तो डाँट पक्की है।

फिर उन्होंने प्यार से पूछा, "बताओ बेटा, क्या हुआ?"

प्रिंसी ने पूरी घटना क्रम की जानकारी मम्मी-पापा को दी।

विधि के पिताजी ने सभी को समझाते हुए कहा— 
"जीवन में हमेशा याद रखना कि ऐसे समय में हमें पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे न तो खेलना चाहिए और न ही खड़ा होना चाहिए। तुम सबने देखा कि आसमान से वज्रपात पेड़ों पर हुआ। जैसे दो पत्थरों को आपस में रगड़ने से आग उत्पन्न होती है, उसी प्रकार आसमान में बादल जब एक-दूसरे से टकराते हैं तो बिजली उत्पन्न होती है। यह धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण पेड़ों और बिजली के खंभों जैसी ऊँची वस्तुओं पर गिरती है। जहाँ यह गिरती है, वहाँ आसपास आग लग जाती है और भारी नुकसान होता है। इससे निकलने वाला धुआँ भी बहुत हानिकारक होता है। यह केवल आसपास की जगहों को ही नहीं, बल्कि वहाँ मौजूद मनुष्यों के शरीर को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।"

उन्होंने आगे कहा, 
"बादल और बिजली के संबंध में जो बातें मिन्नी के पिताजी ने उसे समझाई थीं, वही बातें उसने तुम सबको भी बताईं। लेकिन तुम लोगों ने उसे मज़ाक समझ लिया।"

यह सुनकर सभी बच्चियाँ सिर झुकाए चुपचाप विधि के कमरे की ओर चली गईं। उन्हें आज जीवन का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण सबक मिल गया था।

शिक्षा

प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी चेतावनियों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर बरती गई सावधानी ही हमें बड़े हादसों से बचा सकती है।




       



 

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