1/4 चम्मच हल्दी पाउडर, 1 चुटकी नमक, 2-3 बूंद सरसों का तेल लें, सबको अच्छी तरह मिलाएं और प्रतिदिन दांतों और मसूड़ों पर धीरे-धीरे मालिश करें। इससे दांत सफेद और मसूड़े मजबूत हो जाते हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के एक दिन बाद भाद्रपद की नवमीं को दही हांडी का पर्व बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में एक मिट्टी की हांड़ी (मटकी) में...
शरीर के किसी भी हिस्से में खुजली होने पर लहसुन को सरसों के तेल में उबाल कर ठंडा होने दे। अब इस तेल को कुछ दिनों तक लगते रहे, खुजली मिट जाएगी।
एक और तरीका अपना सकते है - खोपरे के तेल में कपू...
शरीर पर दाद को जड़ से हटाने का रामबाण नुस्खा।
लहसुन को जला ले अब उसकी राख (भस्म) को शहद में मिला कर दाद पर दिन में 2-3 बार लगा ले।
1/2 kg नारियल का तेल और 50 ग्राम करी पत्ते (मिठा नीम), दोनों को 5 मिनट साथ उबालें और फिर तेल को ठंडा होने दें। फिर उस तेल को छान कर एक बोतल में भरदे। सप्ताह में द...
उत्कल प्रदेश के प्रधान देवता श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरम्भ होती है और शुक्ल पक्ष की ग्यारस को रथयात्रा का समापन होता है...
भारतीय संस्कृति में गुरु को देवता तुल्य माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का यह पर्व महार्षि वेद व्यास जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है...
योग रोगमुक्त जीवन जीने की एक कला है। योग का मुख्य उद्देश्य मन की परम शांति प्राप्त करना है, जिसके लिए आत्मा, शरीर और मन को एकजुट करना होता है। योग करने से तन, मन और आत्...
अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाती हैं। अक्षय शब्द को २ भाग में विभाजित करके इसके अर्थ को आसानी से समझा सकता है, अ + क्षय जिस...
साजिबू नोंग्मा पैनाबा नाम मणिपुरी शब्दों से मिलकर ही बना है, साजिबू - वर्ष का पहला महीना जो आमतौर पर अप्रैल के महीने के दौरान मेइती चंद्र कैलेंडर के अनुसार आता है, नोंग...
गणगौर राजस्थान एवं सीमावर्ती राज्यों का एक मुख्य त्योहार है, चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर का व्रत किया जाता है। यह व्रत महिलाये अपने पति की लम्बी आयु के ल...
चैत्र शुक्ल द्वितीया से सिंधी नववर्ष प्रारम्भ होता है। जिसे चेटीचंड के नाम से जाना जाता है। चैत्र मास को सिंधी में "चेट" कहा जाता है और चांद को "चण्डु", इसलिए चेटीचंड क...
