Bhartiya Parmapara

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड से होने वाले खतरे

गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए यू.पी.एफ. के स्वाद को त्यागना होगा।

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड भारतीय लोगों के खान-पान में तेजी से बढ़ रहा है। यहां तक कि यह खान-पान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन गया है। यह फूड स्वाद में उम्दा होते हैं, लेकिन साथ ही ये कई खतरनाक बीमारियों की जोखिम भी बढ़ा रहे हैं। यदि आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, पिज़्ज़ा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज जैसी चीज आपके स्वाद को बढ़ा रही है और इनके बिना आप रह नहीं सकते तो समझ लीजिये की आपको अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की आदत लग चुकी है।

36 देशों में हुए अलग-अलग 281 शोध कार्यो से पता चला है कि दुनिया का हर सातवां युवा और आठवां बच्चा अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का आदि हो गया है। ये फूड आहार की गुणवत्ता को कम करते हैं एवं इनसे शरीर को पोषक तत्व भी नहीं मिल पाते हैं। इन फूड में चीनी, नमक, फाइबर के साथ केवल अधिक कैलोरी होती है व प्रोटीन बहुत कम मात्रा में होता है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार 23% भारतीय वयस्क अधिक वजन या मोटापे के शिकार है। डाइट में बदलाव और पैकेज्ड फूड का चलन बढ़ने से लोगों में सूक्ष्म पौषक तत्वों की कमी हो रही है। इन वस्तुओं की बिक्री कोरोना काल में धीमी हो गई थी, लेकिन अब फिर तेजी से बढ़ने लगी है। देश में एक दशक से स्नैक्स और शीतल पेय की बिक्री तीन गुना तक बढ़ गई है। पिछले वर्ष देश में जंक फूड की बिक्री 2.49 लाख करोड़ रुपये की रही है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार गैर सेहतमंद खान-पान से सेहत के नुकसान के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी भी घट रही है।

चीनी के ज्यादा सेवन से हमारा इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है। अधिक मात्रा में चीनी का सेवन करने से सफेद रक्त कोशिकाएं कमजोर हो जाती है, इस वजह से वह बैक्टीरिया और वायरस से नहीं लड़ पाती है। चिप्स, फ्रोजन डिनर और फास्ट फूड जैसे खाद्य पदार्थ शरीर के इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं।

नमक से आंत के बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचता है, जिस वजह से ऑटो इम्यून डिजीज की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही नियमित फास्ट फूड के सेवन से आंतों में सूजन आ जाती है।  
फास्ट फूड में थैलेट होते हैं, यह एक तरह का केमिकल कंपोनेंट है जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक के समान बनाने में किया जाता है। इससे इम्यून सिस्टम को बहुत नुकसान पहुंचता है। इसलिए कहा जाता है कि पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्डड्रिंक के साथ हर किस्म का प्रोसैस्ड फूड दुनिया में फैल रही सामाजिक महामारी का एक बहुत ही बड़ा कारण है।

यदि आप अपना स्वाद बदलने के लिए अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड(यू पी एफ) का सेवन लगातार करते रहेंगे तो यह अति प्रसंस्कृत आहार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। एक ताजा शोध में दावा किया गया है कि इसके अधिक सेवन से मुंह, गला सर व गर्दन का कैंसर विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

भारत में 63% लोग हर सप्ताह पिज़्ज़ा बर्गर जैसे पैक्ड जंक फूड खाते हैं। देश के 66% लोग यह मानते हैं कि फास्ट जंक फूड के सेवन से आंत से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती है। शोधकर्ता ने बताया कि अमेरिका में 58% और ब्रिटेन में 57% कैलोरी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खा रहे हैं। इसी वजह से मोटापा, बीपी जैसी कई बीमारियों से लड़ रहे हैं। अमेरिका, ब्राजील और स्पेन के वैज्ञानिक कहते हैं कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट या फैट्स हमारे दिमाग में उतना ही डोपामिन रिलीज करते हैं जितना की निकोटिन और और अल्कोहल लेने के बाद दिमाग से रिलीज होता हैं। इसमें हमारा पेट भी सक्रिय भूमिका निभाता है।

दूसरी और कतिपय लोग फास्ट फूड स्टॉल पर मोमोज का सेवन करते हैं कई बार इनमे जिन सब्जियों का इस्तेमाल होता है उनकी गुणवत्ता बहुत अच्छी नहीं होती है।

मोमोज में अगर सब्जियां ठीक से पक नहीं पाती है तो उनके जरिए भी संक्रमण फैलने का डर रहता है। मोमोज में प्रयुक्त मैदे को मुलायम बनाए रखने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है जो कि स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसमें अधिक मैदा होने से यह पेट में जाकर आंतों में तुरंत चिपक जाता है एवं इससे गंभीर बीमारियों के साथ ही डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ जाता है।

एक अध्ययन में जंक फूड और खराब डाइट से ब्रिटेन में 5 साल तक के बच्चों की औसत ऊंचाई घट गई। बच्चे फल, सब्जियां और फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं खाते। इसके बजाय सस्ता ज्यादा कैलोरी मात्रा वाला परंतु कम पोषण वाला खाना खाते हैं, जिससे बहुत नुकसान देखा गया है। विकासशील देशों में बहुत से बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि ये फूड्स एक्सट्रूजन, मोल्डिंग, मिलिंग आदि प्रक्रिया से गुजरने के कारण उनके प्राकृतिक तत्वों 
को हटाकर कृत्रिम तत्वों में बदल दिया जाता है, जिसके कारण इसमें पोषण तत्व खत्म हो जाते हैं।

बच्चे व युवा पीढ़ी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की दीवानगी को छोड़ें, कुछ भी खाने का मन हो तो बस दिल जंक फूड पर ही आकर टिक जाता है। इससे युवा पीढ़ी में हृदय रोग की शिकायतें भी बढ़ रही है। इसलिये अब इस यू पी एफ की बढ़ती खपत को बाय-बाय करना ही होगा। 
एक रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया है कि सरकार ऐसे टीवी विज्ञापनों के नियमों में संशोधन करें। इसके साथ ही इससे जुड़ी ऐसी खाद्य कंपनियों और उनके प्रमुख संगठनों को जनता के स्वास्थ्य के प्रति चिंता करके इसे बंद कर अन्य व्यवसायों में रुचि लेना चाहिए। स्वास्थ्य और परिवार मंत्रालय के द्वारा सभी फूड जंक फूड के लिए चेतावनी लेवल को भी अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए।

लेखक - डॉ. बी.आर. नलवाया जी, प्राध्यापक वाणिज्य,
प्रो. योगेश कुमार पटेल जी, सहायक प्राध्यापक वाणिज्य, मंदसौर (म. प्र.)

                                    

                                      

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