Bhartiya Parmapara

सफलता की ओर साधना से रास्ता

सफलता


"सफलता" जीवन में हमारी मेहनत और क़ाबलियत यह तय करती है कि हम सफल होंगे या असफल। हमारे ख़्वाबों का घरोंदा हमेशा दूसरे ही नहीं तोड़ते, कभी-कभी इसमें हमारा अपना योगदान भी होता है।  दुनिया में कईं लोगों को समान अवसर मिला लेकिन, उनमें से कुछ लोग ही सफल हो सके बाक़ी पिछड़ते गए, जो आगे बढ़ गए उनको कोसने की बजाय, जो पीछे रह गए उन्हें अपना मूल्यांकन करना चाहिए कि "कहाँ कमी रह गई"??

हमें अपनी प्रगति को कार्य नहीं "साधना" मानना होगा, "साधना" का आध्यात्मिक अर्थ होता है कि हम अपने भावों को स्थिर रखें। गुरु देव ने कहा कि जैसे - मौसमी और संतरे का छिलका मोटा होता है परन्तु, अन्दर कलियाँ मुलायम और अलग-अलग होती हैं। छिलका कलियों से कहता है कि तुम मेरे अन्दर सुरक्षित हो, ठीक इसी प्रकार हमें बाहर से मज़बूत होना है, परन्तु भीतर से ईमानदार और  विनम्र रहना है, इसी को "साधना" कहते हैं। जो लोग गलत रास्ते से, भ्रष्टाचार और अपराध करके जीवन में आगे बढ़ते हैं और उन्हें यह लगता है कि यह तो सफलता का छोटा और आसान रास्ता है। परन्तु, वो यह नहीं जानते कि कभी न कभी उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा, क्योंकि ऊपर भी तो कर्मों का सब हिसाब रखा जाता है।

किसी ने बहुत सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं कि "ऊपर वाले की अपनी  व्यवस्था पर कड़ी नज़र रहती है और उसके जैसी व्यवस्था कोई कर ही नहीं सकता कि यहाँ हर इन्सान खाली हाथ आता है और एक तिनका भी यहाँ से ले जा नहीं सकता"। इसलिए, हमें अपने कर्मों पर नज़र रखने  और जीवन में जो भी अवसर मिले उसका भरपूर उपयोग करके सफलता हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।

हे परमात्मा!   
दूसरों पर दोषारोपण न करते हुए हमें ख़ुद के व्यक्तित्व  विकास पर ध्यान देना चाहिए और जीवन में ईमानदारी एवं विनम्रता को आभूषणों की तरह धारण करके सफलता की ओर बढ़ना चाहिए। सबका जीवन शांत और सुख से बीते, यही ईश्वर से प्रार्थना है।



       

 

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