Bhartiya Parmapara

राम से बड़ा राम का नाम

राम से बड़ा राम का नाम 

ॐ दशरथाय विद्‌महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो राम प्रचोदयात । 
कौशल्या सुप्रजा रा मपूर्वा सन्धया प्रवर्तते। उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमाहिकम् ।

एक भरोसो, एक बल, एक आस, एक विश्वास, एक राम धन एक हित यातच तुलसीदास। 
भज राम राम सियाराम, भज राम राम सियाराम। राम से बड़ा राम का नाम, भज राम राम सियाराम ।।

धर्मकाज पृथ्वी पर आये, दशरथ जी के पुत्र कहलाये। जनक पुरी में शिव धनु तोड़ा, सती सिया संग नाता जोड़ा।  
सिया पिया बन राम, प्रभु कहलाये सीताराम।।  
भज राम राम ।। १ ।। 
विश्वामित्र यज्ञ रखवारे, सती अहिल्या तारन हारे। पिता वचन के पालन हारे, राज पाट तज वन को सिधारे ।। 
पंचवटी को बना दिया, एक आर्य धर्म का धाम ।। भज राम राम ।। २ ।। 
असूरों का संहार ध्यान कर, सेना सहित चढ़े लंका पर। अभिमानी रावण को मारा, सीता को संकट से उबारा।। 
राम राज्य हो गया देश में, गुण गाये हनुमान ।। भज राम राम ।। ३ ।।

“राम नामका अखूट खजाना - महात्मा गांधीजी”

राम - नाम सिर्फ कुछ खास आदमियों के लिये नहीं है, वह सबके लिये है। जो राम नाम लेता है, वह अपने लिये भारी खजाना जमा करता जाता है और यह तो एक ऐसा खजाना है, जो कभी घटता नहीं। जितना इसमें से निकालो, उतना बढ़ता ही जाता है। इसका अन्त ही नहीं, और जैसा कि उपनिषद कहता है- पूर्ण में से पूर्ण निकालो, तो पूर्ण ही बाकी रह जाता है, वैसे ही राम नाम है। यह तमाम बीमारियों का एक शर्तिया इलाज है, फिर चाहे व (बीमारियां) शारीरिक हों, मानसिक हों या आध्यात्मिक हों।

राम - नाम ईश्वर के कई नामों में से एक है। आप राम की जगह कृष्ण कहें या ईश्वर के अनगिनत नामों में से कोई और नाम लें, तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लड़कपन में अंधेरे में मुझे भूत-प्रेत का डर लगा करता था। मेरी आया ने मुझसे कहा था- अगर तुम राम नाम लोगे तो तमाम भूत-प्रेत भाग जायेंगे। मैं तो बच्चा ही था, लेकिन आया की बात पर मेरी श्रद्धा थी। मैंने उसकी सलाह पर पूरा-पूरा अमल किया। इससे मेरा डर भाग गया। अगर एक बच्चे का यह अनुभव है तो सोचिये कि बड़े आदमियों के बुद्धि और श्रद्धा के साथ राम नाम लेने से उन्हें कितना फायदा हो सकता है। लेकिन शर्त यह है कि राम-नाम दिल से निकले। क्या बुरे विचार आपके मन में आते हैं? क्या काम या लोभ आपको सताते हैं? यदि ऐसा है तो (इन्हें मिटाने के लिये) राम नाम जैसा कोई जादू नहीं।

फर्ज कीजिये कि आपके मन में यह लालच पैदा होता है बिना मेहनत किये, बेईमानी के तरीके से आप लाखों कमा लें, लेकिन यदि आपको राम नाम पर श्रद्धा है तो आप सो चेंगे कि बीबी बच्चों के लिये आप ऐसी दौलत क्यों इकट्ठा करें, जिसे वे शायद उड़ा दें। अच्छे आचरण और अच्छी शिक्षा के रूप में इनके लिये आप ऐसी विरासत क्यों न छोड़ जायें, जिसमें वे ईमानदारी और मेहनत के साथ अपनी रोटी कमा सकें। आप यह सब सोचते तो हैं, परंतु कर नहीं पाते। मगर राम नाम का निरंतर जप चलता रहे तो एक दिन वह आपके कण्ठ से हृदय तक उतर आयेगा और वह राम-बाण चीज साबित होगा।

एकश्लोकी रामायण - 
आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं काश्चनं, वैदेहीहरणं जटायुमरणं सुग्रीवसम्भाषणम्। 
वालीनिग्रहणं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनं पश्चाद् रावणकुम्भकर्णहननमेतद्वि रामायणम्

रिद्धी - सिद्धी प्राप्ति चौपाईयां - 
जब ते राम ब्याहि घर आये,  
नित नव मंगल मोद बधाये। 
भुवन चारिदस भूधर भारी,  
सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी ।। 
रिद्धी सिद्धि संपत्ति नदी सुहाई,  
उमगि अवध अंबुधी कहु आई। 
मनिगन पुर नर नारि सुजाति,  
सुचि अमोल सुंदर सब भांति ।। 
कहि न जाई कछु नगर विभूति,  
जनु एतनिअ बिरंचि करतुति। 
सब विधि सब पूर लोग सुखारी,  
रामचंद्र मुख चंदु निहारी।।  
राघवो विजयं दद्यात् मम सीता पति प्रभो। 
राघवस्य पद द्वन्द्व दद्या दमित वैभवम् ।।

                                    

                                      

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