Bhartiya Parmapara

कठिन समय में कौन साथ है?

ठोकर खाना 


कभी-कभी ठोकरें भी अच्छी होती हैं.    
एक तो रास्ते की रुकावटों का पता चलता है.. और  
दूसरा संभालने वाले हाथ किसके हैं?  
ये भी पता चलता है।

यूँ तो दुनिया जान-पहचान वालों से, रिश्तेदारों से भरी पड़ी है..

परन्तु ...  
कठिन समय में जो हाथ बढ़ा दे, वही सच्चा शुभचिंतक है...

ऐसे में एक गीत की दो पंक्तियाँ याद आ रही हैं...  
"दरद हमारा कोई ना जाने,  
अपनी गरज़ के सब हैं दीवाने“

इस जहाँ में सब अपनी-अपनी उलझनों में उलझे हैं, ऐसे में एक छोटी सी मदद.. और  
दो शब्द सांत्वना के हल्की सी मुस्कान..  
किसी के लिए बहुत बड़ी मदद हो सकती है!!

यह भी सही है कि  
जीवन के मुश्किल समय को जिसने निकाल लिया.... वह जीत गया...

क्योंकि... सीधे रास्ते पर तो सब चल लेते हैं..  
लेकिन....  
ठोकर खाकर जो संभल जाते हैं, वो ही दूर तक चल लेते हैं।

हे परमात्मा!!  
हमारी पूरी आस्था और विश्वास है कि हम कठिन समय में अपना धैर्य बनाए रखेंगे और जीवन के पथ पर हँसते-मुस्कुराते आगे बढ़ते रहेंगे । हम आपस में प्रेम, विश्वास, स्नेह, सम्मान, आत्मीयता और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में अपने सम्बन्धों को मज़बूती प्रदान करते हुए, अपना जीवन जीएं और ख़ुद भी खुश रहें और औरों को भी खुश रहने देंगे।

सबका जीवन शांत और सुख से बीते, यही ईश्वर से प्रार्थना है।



       

 

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