Bhartiya Parmapara

सच कहने का साहस है.. सलीका है कविता

सच कहने का साहस है, सलीका है कविता

कविता, पद्य की सबसे खूबसूरत विधा है और दिल तक पहुँचने की सबसे अच्छी अभिव्यक्ति भी। कविता तुकांत और अतुकांत दो तरह से लिखी जा सकती है। बातचीत की खूबसूरत अभिव्यक्ति ही कविता है। नारी का श्रृंगार, प्रकृति का सौंदर्य, प्रेम की अनुभूति, फूल का खिलना और महकना, बच्चे का खिलखिलाकर हँसना, नदियों का अविरल बहना, पंछियों का कलरव करना, प्रपात का झर-झर झरना, दिनकर का उगना, चाँद का दर्श, बादलों में लालिमा का छाना, इंद्रधनुष के मनभावन सप्तरंग, प्रकृति की अनुपम मनहर छटाएँ, माँ की लोरियाँ और पिता का वात्सल्य ही कविता की सुंदर भावाभिव्यक्ति है।

सच कहने का साहस है, सलीका है कविता। कविता कवि की आत्मा है, साक्षात्कार है, आत्मा का परमात्मा से। झूठ को कत्ल करने का शस्त्र भी है कविता। कविता गूँगे-बहरों की जुबान भी हैं और शाश्वत प्रेम की अनुभूति भी है। कविता कांटों के जंगल में खिला खूबसूरत गुलाब का फूल है। कविता ईश्वर की आराधना है, त्याग, तपस्या, साधना है। देश की चौकीदार है कविता। कविता शांति है, क्रांति है, भ्रांति है और मरंति भी है। कविता प्रेम की युक्ति है, विरहन की विरक्ति है, मीरा की भक्ति है और राधा की शक्ति है। कविता नंगे बदन का लिबास है, फूलों में खुशबू का वास है और सुनहरे सपनों का दिव्य आकाश है। घने अंधकार में आस और भरोसे की टिमटिमाती हुई एक लौ है...कविता।

दुष्कर्म के घिनौने कृत्य पर एक करारा प्रहार है कविता। ममता का सागर है, माँ का वात्सल्य है, पिता का त्याग है, समर्पण है, तपस्या है और संघर्ष की एक संपूर्ण गाथा है कविता।  कविता, गम की दवा है, माँ की दुआ है और लू के थपेड़ों में शीतल हवा है। कविता शब्दों की जादूगरी है और सत्ता की बाजीगरी है।

कविता एक कला है और शब्दों की कारीगरी है। कविता बेलगाम सत्ता रूपी अश्व की लगाम है और हर एक प्रकार के दर्द का अचूक बाम है। कविता दैरो-हरम है, शिवाला है, अमृत का प्याला है और धधकते हुए अंगारों पर पाँव का छाला है। कविता, फाकामस्ती में रोज त्यौहार है। कविता, चीख है, पुकार है, दुश्मनों का संहार है। देश पर आंच आए तब कविता तलवार है और मखमल के बिस्तर पर सुलगता अंगार है कविता। कविता, संबल है, हौसला है, हिम्मत है, प्रार्थना है, साधना है।

कविता कवि की जान है, उसका जहान है, कवि का मान-सम्मान है और कवि का स्वाभिमान है। निराशा के अरण्य में कविता आशा और विश्वास का एक प्रज्जवलित अखंड दीपक है। कविता एक सादगी है, बांकपन है, संजीदगी है, पूजा है, अर्चना है, इबादत है और तपते मरु में खिला खूबसूरत-सा एक ब्रम्ह कमल है। कविता युद्ध की विभीषिका पर अम्न और प्रेम का पैगाम है। कविता धधकते हुए ज्वालामुखी के लावे पर मुसलसल गिरती बर्फबारी की शीतलता है। कविता ऐसा दरिया है जो दरिया-दरिया से मिलकर सागर और सागर से महासागर बनता है। कविता एक अनंत आकाश है जिसमें कुछ सपनें हैं, कुछ ख्वाहिशें हैं और जीवन जीने की ललक भी है कविता। सागर की अथाह गहराइयां है कविता जिसमें कई सीपियाँ हैं और कई बेशकीमत मोती भी है।

कविता का काम पुल बनाकर इंसान को इंसान से जोड़ना है। कविता, सीता की अग्नि परीक्षा है, अभिमन्यु का चक्रव्यूह है, कृष्ण का सुदर्शन है और राम का वनवास है। आदमी के भीतर की संवेदनाएँ मर चुकी है किंतु मानवता आज भी जिंदा है...कविता के भीतर।

लेखक - नलिन खोईवाल जी, इंदौर
 

                                    

                                      

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