भारतीय व्यंजन शान है देश के
भारतीय भोजन का संग्रह देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। "भारतीय भोजन" शब्द देश के विभिन्न हिस्सों के स्वादों के मिश्रण को दर्शाता है और दुनिया के सुदूर कोनों के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रदर्शन करता है। भारतीय भोजन में जड़ी-बूटियां और मसाले महत्त्वपूर्ण भूमिका हैं, अलग-अलग व्यंजनों के मसाले भी अलग-अलग होते हैं।
मसालों में गरम मसाला सबसे महत्त्वपूर्ण मिश्रण है, जो कि भारतीय भोजन का अत्यन्त आवश्यक अंग है। भारत के प्रत्येक राज्य के गरम मसाले का अपना ख़ास मिश्रण है। मसालों एवं जड़ी-बूटियों की भूमिका केवल भोजन पकाने तक ही सीमित नहीं है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में रोग-निदान के लिए इनके गुणों का वर्णन किया गया है। हालांकि आज की पीढ़ी के ज्यादातर लोगों को मसालों और जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों का ज्ञान नहीं है बल्कि, खुशबू और स्वाद ज्यादा हावी है।
भारतीय भोजन-शैलियों में उत्तर भारतीय भोजन शैली सम्भवतः सबसे लोकप्रिय है। उत्तर भारत में ज्यादातर गेहूं पैदा होता है, इसलिए परम्परागत तौर पर इस क्षेत्र के भोजन के साथ कई तरह की रोटियों- नान, तंदूरी रोटी, चपाती या परांठे का सेवन किया जाता है। समोसा सम्भवतः उत्तरी भारत का सबसे पसंदीदा नाश्ता है। दही से बनने वाली लस्सी भी एक स्वादभरा पेय है। गुलाब जामुन और मोतीचूर के लड्डू इस इलाके की पसंदीदा मिठाई हैं। उत्तर भारत के कुछ रोचक व्यंजनों में रेशमी कबाब, सीक कबाब, शामी कबाब, कश्मीरी पुलाव, तंदूरी चिकन और मटन हैं। कश्मीरी भोजन-शैली में सबसे महत्त्वपूर्ण सामग्री मटन है, जिसकी 30 से अधिक किस्में हैं।
कश्मीरी भोजन-शैली की अनोखी विशेषता यह है कि इसमें जिन मसालों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें तलने के बजाय उबाला जाता है जिससे अनोखा खुशबूदार जायका मिलता है।
पंजाबी भोजन-शैली मध्य एशियाई और मुगलई भोजन शैलियों से प्रभावित है। दाल, सरसों का साग और मक्के की रोटी, तंदूरी रोटी, मीट करी, रोगन जोश और भरवां परांठे- पंजाबी भोजन शैली के कुछ लोकप्रिय व्यंजन हैं।
अवधी भोजन-शैली में पारसी, कश्मीरी, पंजाबी और हैदराबादी शैलियों का समावेश दिखता है। अवध में भोजन पकाने की दम शैली का जन्म हुआ, जिसमें दम अर्थात् धीमी आँच पर एक बड़ी हांडी में खाद्य-पदार्थों को बंद कर गरम करके पकाया जाता है।
दक्षिण भारतीय भोजन-शैली में विभिन्न व्यंजन तवे पर सेंके जाते हैं, जैसे डोसा, उत्तपम आदि, जिसके साथ सांबर का उपयोग किया जाता है। सांबर पतली दाल से बनाया जाता है। इसके अलावा दक्षिण भारत में समुद्री भोजन की भी एक विशेष श्रृंखला है। यह क्षेत्र करी पत्ता, इमली और नारियल के प्रयोग के लिए भी जाना जाता है।
कर्नाटक में भोजन पकाने की दो प्रमुख शैलियां हैं- पहली, ब्राह्मण भोजन शैली, जो पूरी तरह शाकाहारी है। दूसरी, कुर्ग की भोजन शैली, जो मांसाहारी व्यंजनों के लिए मशहूर है।
बंगाली भोजन-शैली में सरसों के तेल के साथ काली मिर्च पर बहुत अधिक जोर दिया जाता है तथा इसमें अधिक मात्रा में मसालों का प्रयोग होता है। यह भोजन शैली मछली, सब्जी, मसूर की दाल और चावल के साथ अपने तीखे जायके व खुशबू के लिए विख्यात है। ताजे मीठे पानी की मछली इसकी सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक है।
मारवाड़ और राजस्थान के सभी भोजन शाकाहारी हैं जिनके लोकप्रिय व्यंजन दाल-बाटी-चूरमा, लड्डू, गट्टे की सब्जी, केर सांगरी का साग एवं कढ़ी-खिचड़ी हैं।
गुजरात की एक बड़ी आबादी मुख्य रूप से शाकाहारी है, इसलिए गुजराती भोजन शैली पूरी तरह से शाकाहारी है। इसके व्यंजनों में उंधियु, पात्रा, खांडवी, थेपला, ढोकला, खमण आदि प्रमुख हैं।
भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां खाने के मामले में सुकून मिलता है। भारत में खाद्य पदार्थों में इसके विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन हैं। इस अवधि में, भारत ने इतने सारे व्यंजन जमा किए हैं कि कभी-कभी उन्हें गिनना मुश्किल होता है और उन्हें रैंक करना अधिक चुनौती पूर्ण होता है। स्वाद, व्यंजन, ताजा भोजन की सुगंध, लोग, भाषा, सब कुछ हर कुछ किलोमीटर पर बदल जाता है। इसकी संस्कृति और इसका भोजन इतने घनिष्ठ रूप से मिश्रित है कि कभी-कभी वे अविभाज्य होते हैं। भारत में खाद्य पदार्थ हमारे देश की विविधता में एकता का एक आदर्श उदाहरण हैं।
भारत में भोजन और यहां परोसा जाने वाला व्यंजन स्वाद, गुणवत्ता, प्रेम और सम्मान से परे है। जुनून से एक यात्री और दिल से खाने का शौकीन होने के नाते, यहाँ का प्रत्येक व्यंजन आपकी स्वाद कलियों के साथ-साथ आपकी आत्मा को भी निश्चित रूप से छूएगा।
लेखिका - पूजा गुप्ता, मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)

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