Bhartiya Parmapara

एक कप चाय और सच्चा प्रेम

फ़र्ज़ 

रवि अपने स्वर्णिम किरणों को बिखेरने में व्यस्त था और यह भोर सभी के जीवन में नव ऊर्जा का संचार कर रही थी।

किंतु हर्ष और काव्या को अपने जीवन में अंधकार ही नजर आता। विवाह को पांच वर्ष पूरे होने को थे पहले दोनों ही अपने कैरियर को लेकर सचेत थे इसलिए बच्चा चाहते नहीं थे पर जब अपना मकान, गाड़ी सब हो गया तो इस घर आंगन का सूनापन दूर करने दोनों ही उतावले हो रहे थे किंतु चाहने से कब किसी के मन की हसरत पूरी हुई है।

जगह-जगह मन्नतें मांगी, कितने ही मंदिरों में माथा टेका किंतु कोई फायदा नहीं हुआ। शहर के नामी डॉक्टरों से इलाज करवाया कितनी ही दवाएं ली पर समस्या का हल नहीं निकला। आखिर टेस्ट ट्यूब बेबी का निर्णय ही एक आखिरी आस थी।   
काव्या की सांसू मां बहूं की देखरेख के लिए आ गई थी। सुंदर नाजुक सी काव्या पहले एक इंजेक्शन लगने पर सारा घर सर पर उठा लेती और आज‌ न जाने डॉक्टरों द्वारा कितने ही प्रयोगों को हंसते हुए सह रही थी।   
बच्चे की चाहत और घर आंगन की रौनक के खातिर वह किसी भी इलाज के लिए मना नहीं करती।  
टेस्ट ट्यूब बेबी ट्रिटमेंट के दौरान डॉक्टर ने काव्या को पूरी तरह आराम करने के लिए कहा। काव्या को रात में बहुत मुश्किल से नींद आयी थी, तभी मां ने हर्ष को आवाज दे कहा “बहू को चाय दे दे बेटा”

हर्ष ने  काव्या का दर्द देखा था इसलिए जब वह कुछ समय सुकून से सो रही थी तो उसने उसे उठाना उचित नहीं समझा।  
उसकी और प्यार से देखते हुए सोचने लगा एक कप चाय ही है जो फिर से बन सकती है इस वक्त काव्या को आराम की जरूरत है। जब वह उठकर चाय रसोई में रखते हुए "मां से कहने लगा मां काव्या को अभी-अभी नींद आयी है" मां ने मुस्कुराते हुए कहा मुझे तुझ पर गर्व है बेटा पुरुष होते हुए भी तुम भावनाओं को समझते हुए नारी के प्रति सम्मान रखते हो। काव्या जब इस घर आंगन के लिए इतना दर्द सह रही है तो उसका ध्यान रखना हमारा फर्ज है बेटा।



       

 

Login to Leave Comment
Login
No Comments Found
;
MX Creativity
©2020, सभी अधिकार भारतीय परम्परा द्वारा आरक्षित हैं। MX Creativity के द्वारा संचालित है |