भारतीय संस्कृति में निहित वैज्ञानिक तथ्य एवं उनकी व्याख्या –
भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से करना - जब कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। यह भारतीय परम्परा रही है। लोगों का मानना है कि अन्त में हमेशा मीठा खिलाना चाहिए जिससे हमारे संबंधों में मिठास बनी रहे।
वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अन्त में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है। मीठा भोजन को पचाने में भी अपना योगदान देता है तथा मीठे से भोजन आसानी से पचता है।
जमीन पर बैठकर भोजन करना - भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर भोजन करना अच्छी बात होती है।
वैज्ञानिक तर्क के अनुसार पालथी मारकर बैठना एक प्रकार का योग आसन है। इस स्थिति में बैठने से मस्तिष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस स्थिति में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिग्नल पेट तक जाता है कि वह भोजन के लिए तैयार हो जाये।
कान छिदवाने की परम्परा - भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्कशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।
लेखक - डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता जी,
प्रवक्ता, अग्रवाल महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, गंगापुर सिटी, (राज.)

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